आपके शिशु का हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए? जानिए बच्चों के हीमोग्लोबिन के बारे में
और उसकी कमी को easy उपायों से कैसे दूर करें।

आपके शिशु का हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए? जानिए बच्चों के हीमोग्लोबिन के बारे में और उसकी कमी को easy उपायों से कैसे दूर करें।

क्या आप जानते है आपके शिशु का हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए।

बच्चों के हीमोग्लोबिन
बच्चों के हीमोग्लोबिन


आज का हमारा यह article बच्चों के हीमोग्लोबिन के लेवल के बारे में है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि हीमोग्लोबिन क्या होता है? शिशु का हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए? हीमोग्लोबिन कम या ज्यादा होने के क्या कारण हो सकते है? हीमोग्लोबिन की कमी से बच्चों को किस तरह से जूझना पड़ता है। बच्चों में हीमोग्लोबिन के कमी के क्या लक्षण होते है? और किस तरह से हम बच्चों में हीमोग्लोबिन कमी होने के बाद ध्यान रखने वाली बातें। शिशु का हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए हमें शिशु को क्या करना चाहिए?

हीमोग्लोबिन क्या होता है।

हीमोग्लोबिन जिसे Hb भी कहां जाता है। लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) में मौजूद एक महत्वपूर्ण प्रोटिन होता है जिस में heme मतलब irons पाया जाता है। हीमोग्लोबिन में जो irons के atoms होते है वह हमारे रक्त कोशिकाओं (RBC) के structure को , सामान्य आकार को बनाएं रखने में मदद करते है। साथ ही रक्त कोशिकाओं (RBC) को oxygen और carbon dioxide के परिवहन में भी मदद करता है। यह हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण घटक है जो संतुलित रहना आवश्यक है।

शिशु का हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए।

Normally एक नवजात शिशु में 270ml याने एक कप के बराबर खून होता है। बड़ों की तुलना में शिशु का हीमोग्लोबिन का स्तर औसतन ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए होता है जब शिशु गर्भ में होता है क्यो कि गर्भ में oxygen का स्तर ज्यादा होता है। और oxygen को परिवहन के लिए अधिक रक्तकोशिकाओं की जरूरत होती है। लेकिन कई हफ्तों के बाद शिशु का हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने लगता है।

नीचे दिए गए चार्ट के माध्यम से आप अपने शिशु का normal हीमोग्लोबिन का लेवल जान सकते है।

agefemale range (g/dl) male range (g/dl) 
1. 0-30 days  13.4 – 9.9 13.4 – 9.9
2. 31-60 days  10.7 – 17.1 10.7 – 17.1
3. 2-3 months  9.0 – 14.1 9.0 – 14.1
4. 3-6 months  9.5 – 14.1 9.5 – 14.1
5. 6-12 months    
 11.3 – 14.1
 11.3 – 14.1
6. 1-5 years 10.9 –15.0 10.9 –15.0
7. 5-11 years 11.9 – 15.0 11.9 – 15.0
8. 11-18 years 11.9 – 15.0 12.7 – 17.7

शिशु का हीमोग्लोबिन

उपरोक्त चार्ट में 0 days से 18 years के बच्चों का नॉर्मल हीमोग्लोबिन लेवल दिखाया गया है।

बच्चों में हीमोग्लोबिन के कमी के क्या लक्षण होते है?

पहले एक महत्वपूर्ण बात आपको बता दें कि 9 से 24 महीनों के अंदर के को बच्चे होते है उनमें बहुत ज्यादा chances होते है कि हीमोग्लोबिन की कमी हो जाए। इसका reason यह है कि 9 से 24 महीनों में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास काफ़ी तेजी से होता है। बच्चे की सबसे ज्यादा growth इसी दौरान होती है। और शरीर को विकसित होने के लिए शरीर में irons का होना बहुत जरूरी होता है। इस दौरान कई बार बच्चों को iron rich food नहीं मिल पाता। या किसी अन्य वजह से भी शरीर में irons की कमी हो जाती है। जिस से शिशु का हीमोग्लोबिन लेवल कम हो जाता है।

हीमोग्लोबिन की कमी की वजह से हम बच्चों में कुछ लक्षण देख सकते है जो हीमोग्लोबिन के कमी को identify कर सकते है। जैसे आपका शिशु या बच्चा बार बार बीमार पड़ रहा है। उसका बुखार बार बार repeat हो रहा है। या आपका बच्चा जल्दी थकान महसूस कर रहा है। या बच्चा ज्यादा चिड़चिड़ा हो गया है या बार बार रों रहा है। बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी आ गई है। और हीमोग्लोबिन की कमी की वजह से हाथ ज्यादा सफेद दिखने लगेंगे। ऐसे कुछ लक्षणों से हम बच्चों में हीमोग्लोबिन की कमी को जान सकते है।

हीमोग्लोबिन की कमी से बच्चों को किस तरह से जूझना पड़ता है।

लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) में पाए जाने वाले हीमोग्लोबिन की कमी आने से बच्चों को थकान, बार बार चक्कर आना, हृदय गति का तेज होना, हांफना या सीने मै दर्द होना, शरीर का सफेद होना ऐसे कई लक्षणों से हम एनीमिया जैसे बीमारी को पहचान सकते है। एलशिशु का हीमोग्लोबिन लेवल कम होने के वजह से शिशु में kidny की समस्या भी देखी जा सकती है। हीमोग्लोबिन की कमी के वजह से शरीर में oxygen वहन की क्षमता भी कम हो जाती है।

बच्चों में हीमोग्लोबिन कमी होने के बाद ध्यान रखने वाली बातें

किसी भी उम्र में यह समस्या देखी जा सकती है लेकिन आमतौर पर ज्यादा तर 9 से 24 महीनों में बच्चों में हीमोग्लोबिन की कमी की समस्या देखी जा सकती है। शिशु का हीमोग्लोबिन का स्तर maintain रखने के लिए या बढ़ाने के लिए हमें उसके खानपान पर विशेष ध्यान रखना होता है।

  • शरीर में irons की कमी के कारण हीमोग्लोबिन की लेवल कम होती है। इसलिए बच्चों को iron और minerals rich food देना आवश्यक होता है।

  • अगर आप का बच्चा 6 month के ऊपर हो गया है और उस में हीमोग्लोबिन की कमी पाई जाती है तो आप बच्चे को दूध देना कम कर दे। ऐसा इसलिए दूध में calcium की मात्रा अधिक होती है जो शरीर में irons का absorption कम करता है।

  • बच्चों को vitamin C rich food ज्यादा दे क्यो कि vitamin C शरीर में irons के absorption को बढ़ाता है।

  • जब भी आप अपने शिशु के लिए कोई आहार बना रहे हो तो उसे लोहे के बर्तन में बनाए। ध्यान रहे लोहे का बर्तन जंग लगा हुआ नहीं होना चाहिए। अच्छे से साफ किया हुआ हो।

  • शिशु का हीमोग्लोबिन कम होना या ज्यादा होना अनुवांशिकता भी हो सकता है। आप के परिवार में कई पीढ़ियों से अगर यह समस्या है तो वह आप के शिशु में भी देखी जा सकती है।

  • बच्चों में हीमोग्लोबिन की समस्या पर यदि ध्यान ना दिया जाए तो आगे चलकर बच्चे में अस्थमा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या भी हो सकती है।

  • अगर किसी कारण वश शिशु को मां का दूध नहीं मिल पाता तो शिशु को गाय का दूध दिया जाता है इस से भी 6 माह के कम उम्र के बच्चों में हीमोग्लोबिन की कमी पाई जा सकती है। ध्यान रखें 6 माह के कम उम्र के बच्चों को गाय का दूध ना दे। आप डॉक्टर्स की सलाह से बच्चे को farmulla milk दे सकते हो।


शिशु का हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

शारीरिक विकास के दौरान बच्चे को एक संतुलित आहार की जरूरत होती है। जिस में irons, minerals, vitamins, proteins से भरपूर आहार की आवश्यकता होती है। खून मे irons की कमी की वजह से ही शरीर का हीमोग्लोबिन कम होता है। इसलिए हमें बच्चों को irons से भरपूर आहार देने की आवश्यकता होती है।

हरी सब्जियां

शिशु का हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ने के लिए बच्चों को हरी सब्जियां खिलानी चाहिए। जिस से उनके शरीर की irons की मात्रा को बढ़ाया जा सकें। हरी सब्जियों में पुदीना, चौलाई, पालक साग, सहजन की पत्तियां, धनियां पत्ता, गोगू में पर्याप्त मात्रा में irons पाया जाता है।

किशमिश

सुखाएं हुए अंगूर को किशमिश कहां जाता है जो dry foods में शुमार होता है। शरीर में हीमोग्लोबिन को बढ़ाने के लिए किशमिश भी एक अच्छा विकल्प है सकता है। जिस मे irons और B-complex प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जो बच्चे एनीमिया से ग्रस्त होते है। उनके लिए किशमिश सब से ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

रागी

रागी प्राकृतिक irons का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है। एनीमिया और हीमोग्लोबिन के कमी से जूझने वाले बच्चों एवं वयस्कों के लिए भी रागी को अपने आहार में शामिल करना फायदेमंद होता है। रागी में irons के साथ vitamin C भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो शरीर में irons के absorption को बढ़ाता है।

ओट्स

शिशु का हीमोग्लोबिन बढ़ाने और संतुलित रखने के लिए ओट्स भी अच्छा विकल्प है सकता है। उसे आप बच्चे के नाश्ते के रूप में बच्चे को दे सकते हैं। ओट्स में irons के साथ साथ minerals और B complex भी होता है जो शरीर में खून की कमी को पूरा करता है।

टमाटर

आप बच्चे को सलाद में और सैंडविच में भी टमाटर खिला सकते है या टमाटर जा ज्यूस भी से सकते है। टमाटर में विटामिन सी और लाइकोपीन जैसे तत्व मौजूद होते है जो irons का absorption increase करने में काफी मदद करते है

अनार

अगर आपको लगता है कि आप के शिशु का हीमोग्लोबिन कम ना हो, बच्चे को एनीमिया से ना जूझना पड़े तो आपको अपने बच्चे को रोजाना एक अनार खाने में देना चाहिए। या बच्चे को अनार का ज्यूस पीने को देना चाहिए। अनार एक super food है जिस में irons, minerals के साथ प्रोटीन,विटामिन, कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

चुकंदर

Irons की अधिक मात्रा होने के कारण हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) को बढ़ाने के लिए और उन्हें सक्रिय करने के लिए काफ़ी मददगार साबित होने वाला फल है चुकंदर। एनीमिया जैसे रोगों में चुकंदर अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। आप अपने बच्चों को चुकंदर का ज्यूस भी पिला सकते है या उसका सलाद के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं।

गाजर

आपके शिशु का हीमोग्लोबिन संतुलित रखने के लिए आप अपने शिशु को गाजर अवश्य खिलाए अथवा गाजर का ज्यूस अवश्य दे। गाजर में विटामिन्स, पोटैशियम मिनरल्स के साथ साथ B complex भी होता है। जो शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाता है।

खजूर

मैग्नेशियम, पोटेशियम के साथ भरपूर मात्रा में irons खजूर में पाया जाता है। जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मददगार साबित होता है। अपने बच्चे को रोजाना खजूर खिलाने से उसके शरीर के irons की कमी को पूरा किया जा सकता है।

तिल और गुड़

शिशु का हीमोग्लोबिन संतुलित रखने के लिए हम तिल और गुड़ का भी प्रयोग कर सकते है। खासकर काले तिल और गुड़ का सेवन करने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है।

महत्वपूर्ण

बच्चों के शरीर में पाए जाने वाली खून की कमी (एनीमिया) को नजरंदाज ना करें। इस से आगे चलकर बच्चे को कई खतरनाक बीमारियां हो सकती है। जो आपके शिशु के लिए घातक हो सकती है। अगर बच्चे के शरीर में हीमोग्लोबिन के कमी के लक्षण पाए जाते है तो आप अपने बच्चे का अपने डॉक्टर्स से चेक अप जरूर कराएं। और डॉक्टर्स की सलाह से बच्चे का सही इलाज करें।

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