baby speech development in hindi 2021। जाने बच्चे कब बोलते है?

baby speech development in hindi 2021। जाने बच्चे कब बोलते है?


बच्चे कब बोलते है?

baby speech development in hindi



कई बार माता-पिता अपने शिशु के बोलने की प्रक्रिया से काफी चिंतित रहते है। वह सोचते है की शिशु एक साल का हो गया है और अभी भी ठीक से बोल नही पाता? 2 साल का हो गया है अभी भी बोल नही पाता? आखिर बच्चे कब बोलते है? लेकिन माता-पिता या parents अपने बच्चे की बोलने की प्रक्रिया को समझ नही पातें और इसीलिए वह कई बार काफी परेशान से हो जाते है।

हम baby speech development in hindi के इस आर्टिकल में बच्चे कब बोलते है? तथा बच्चों के बोलने की प्रक्रिया को विशेषज्ञों की राय के द्वारा समझेंगे ताकि parents को यह ज्ञात हो जाए की उनका शिशु कितने दिनों में बोल सकता है और हमें उसे किस तरह से बोलने के लिए प्रेरित करना चाहियें।

यह भी पढ़ें :- 3 month baby care in hindi में जानें ३ महीने के शिशु की देखभाल कैसे करें?

baby speech development in hindi कैसे होती है?



आप को पता है baby speech development in hindi कैसे होती है? बच्चे कब बोलते है? किसी भी शिशु के लिए सुनने, आवाज ग्रहण करने की क्षमता का विकास महिला के गर्भ से ही शुरू हो जाता है। गर्भ में ही शिशु माँ के शब्दों तथा आवाज को महसूस करता है जो उसके बोलने की क्षमता को विकसित करने के प्रथम चरण को स्पष्ट करता है। इसलिए आप को कई बार ऐसी सलाह दी जाती है की आप गर्भ में पल रहे शिशु के साथ बात करें। या कुछ अच्छा सुनें जिसे आप के पेट में पल रहा शिशु भी ग्रहण कर पायें।

शिशु के जन्म से लेकर 2 साल की उम्र तक, अधिकांश शिशु कई तरह के शब्दों को सीखते है, कई तरह के वाक्यों को समझते है और अपने विचार साझा करने के लिए कई शब्दों का प्रयोग भी करते है। आइए देखें कि जन्म से लेकर शिशु के आम बोल चाल तक की यह प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है? कितने दिनों में शिशु पूर्ण रूप से बोलने की क्षमता को ग्रहण करता है? और विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में बोलने का विकास किस तरह से होता है?

बच्चे कब बोलते है? इस पर विशेषज्ञों की क्या है राय



baby speech development in hindi में हम सब से पहले विशेषज्ञों की बातों को समझते है।


विशेषज्ञों का कहना है कि 12 महीने की उम्र तक, शिशु एक शब्द या दों शब्द बोलने में सक्षम हो पाते है जैसे, माँ , पापा, दादा जैसे सरल शब्दों का उच्चारण कर पाते है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है की इस दौरान सरल अनुरोधों को समझने और उनका पालन करने में भी सक्षम होता है। जैसे यहाँ आओ, बैठो, खाना खाओ , जैसे अनुरोधों को बच्चा आसानी से समझ सकता है।

जब आप का शिशु दों साल का हो जाता है तब आपका बच्चा पांच से छह शब्दों को या दों से तिन शब्द के एक पूर्ण वाक्यों को बोलने में सक्षम होता है। साथ ही इस दौरान शिशु कई सरल निर्देशों को समझकर पालन करने और बातचीत में सुने गए शब्दों को दोहराने में सक्षम हो जाता है।

यह भी पढ़ें:- vaccination for babies में जानें शिशु के टीकाकरण की जानकारी

जब एक बच्चा तिन साल का हो जाता है तब, शिशु दो या तीन चरणों के साथ एक निर्देश का पालन करने में काबिल हो जाता है, साथ ही पास पड़ोस की सभी सामान्य वस्तुओं, चित्रों को पहचान पाता है, और यदि आप के द्वारा किसी वास्तु के लाने के निर्देश दिए जाते है तो शिशु वही वस्तु आप को लाकर देता है। और जो कुछ कहा जाता है उसे समझने लगता है। याने शिशु की ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। सस्थ ही कुछ शब्दों के स्पष्ट उच्चारण के साथ बोलने की कोशिश करता है।

चौथे साल तक आते आते आप का बच्च काफी अच्छे तरह से समझकर बोलने की क्षमता तक पहुँच जाता है। छोटे, सरल सवालों को पूछने के साथ साथ कई तरह के वाक्यों को एकसाथ बोलने में सक्षम हो जाता है। बच्चे द्वारा बोले गये शब्दों का उच्चारण अशुद्ध जरुर हो सकता है लेकिन यह कभी भी परेशानी वाली बात नही होती।

5 साल की उम्र में ,आपका बच्चा अपने शब्दों में एक कहानी फिर से सुनाने और एक वाक्य में पांच से अधिक शब्दों का उपयोग करने में सफल हो जाता है। और काफी अच्छी तरह से बोलना सिख जाता है।

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माता-पिता के लिए जरुरी बातें


baby speech development in hindi के i आर्टिकल में हम ने आप को बच्चों के बोलने के क्रमिक विकास को बताया है। जिस से आप काफी निश्चिन्त हो सकते है। आप को यह समझना होगा की हर बच्चा अलग होता है। जरुरी नहीं की आप के पड़ोस में जो बच्चा है वह 2-3 साल में बोलना शुरूकिया है तो आप का भी शिशु उस उम्रे में बोलना शुरु कर देगा। और आप को चिंता करने की भी कोई बात नहीं की आप का बच्चा बोलेगा या नहीं।

किसी भी माता-पिता को यह जानना आवश्यक है जो शिशु के बोलने के विकास के लिए जरुरी है। जरुरी यह है की आप अपने शिशु को बोलने में कितनी मदद कर पा रहे हो। जरुरी है की आप अपने शिशु के साथ कितनी बातें करते हो? उसे किस तरह से चीजों के बारे में बताते हो? इस लिए किसी भी माता-पिता के लिए बच्चों के बोलने के लिए चिंता करने की आवश्यकता नही होती।

baby speech development in hindi इस आर्टिकल में हम ने आप के सवाल बच्चे कब बोलते है? इस का जबाब दिया है और कई विशेषज्ञों से बात कर उनके निष्कर्षों को आप के सामने प्रस्तुत किया है

baby speech development in hindi
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3 month baby care in hindi में जानें ३ महीने के शिशु की देखभाल कैसे करें?

3 month baby care in hindi में जानें ३ महीने के शिशु की देखभाल कैसे करें?

 

3 month baby care in hindi में जानें ३ महीने के शिशु की देखभाल कैसे करें?

3 month baby care in hindi
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जब हमारा बेबी तीसरे महीने का हो जाता है तो हमें शिशु की देखभाल कैसे करनी है यह हम इस 3 month baby care in hindi के इस आर्टिकल में जानेंगे।


जब एक नन्हा शिशु आप के घर में कदम रखता है तो माता पिता के साथ साथ घर के सभी सदस्यों को भी काफी खुशी होती है और पुरे घर में ख़ुशी का माहौल तैयार हो जाता है। साथ ही घर में सभी की और खास कर माता पिता की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। अपने शिशु की देखभाल करने के लिए सभी को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

पहले दों महीनों में शिशु की कैसे देखभाल करनी है यह हम ने आप को दों आर्टिकल में बताया है अगर आप नही जानते की पहले और दुसरे महीने में हम अपने शिशु की देखभाल कैसे कर सकते है तो आप निचे दिए गये link पर click कर वह आर्टिकल पढ़ सकते है


 3 month baby care in hindi के आर्टिकल में क्या-क्या जानेंगे


  • 3 महीने में हम शिशु में क्या बदलाव देख सकते है?

  • 3 महीने के शिशु की क्या-क्या गतिविधियाँ होती है?

  • 3 महीने के शिशु का खानपान का ध्यान कैसे रखना है?

  • 3 महीने के शिशु के लिए क्या जरुरी है?

  • शिशु के टीकाकरण का हमे क्या जानना आवश्यक है?

  • पहले दों महीनों के मुकाबले शिशु की नींद में क्या बदलाव आता है?

  • 3 महीने के शिशु के लिए किस तरह के खिलौने हमें खरीदने चाहियें?

  • 3 month baby care in hindi में आप के लिए विशेष सलाह





3 महीने में हम शिशु में क्या बदलाव देख सकते है?


जब आप का शीशु 3 महीने का हो जाता है तो आप भी थोडा रिलैक्स महसूस करते है। एक माँ यह भलीभांति जानती है की शिशु के जन्म से लेकर पाहिले दों महीनों तक शिशु के देखभाल के लिए कितना सजग रहने की आवश्यकता होती है। जिस के लिए एक माँ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शिशु की नींद, उसका खान पान, उस की साफसफाई की सब से ज्यादा care करने की आवश्यकता पहले दों महीनों में होती है। लेकिन 3 month में बेबी comfortable महसूस करता है। 3 month baby care in hindi के इस आर्टिकल में हम सब से पहले देखेंगे की जब बच्चा 3 महीने का हो जाता है तो उस में क्या-क्या बदलाव देख सकते है।


स्पर्श को पहचानना :- आप को पता है जब भी एक माँ अपने शिशु को जन्म देती है तब कई डॉक्टर्स और घर के बड़ें बुजुर्ग भी आप को सलाह देते है की आप बच्चे को ज्यादा से ज्यादा स्पर्श की जरूरत होती है। जिसे हम touch theropy भी कह सकते है। जो बच्चो के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माँ का स्पर्श बच्चे के लिए मेडिसिन की तरह काम करता है।

जब 3 month का हो जाता है तब वह स्पर्श से अपने माता पिता को अच्छे से पहचान पाता है। एक शीशु अपने माँ के स्पर्श से सहज हो जाता है। और स्पर्श से ही बच्चे और आप में अच्छी तरह से बॉन्डिंग बन सकती है।


आवाज पर प्रतिक्रिया करना :- शिशु के जन्म के पूर्व ही शिशु गर्भ में रहते ही आवाज की और ध्यान देता है। इसलिए शिशु के जन्म के बाद आप को कई डॉक्टर्स या आप के घर के बड़े बुजुर्ग हमेशा आप को बच्चों के साथ बाते करने की सलाह देते है वह इसलिए की आवाज या ध्वनि बच्चे के विकास की अहम कड़ी है। जब आप का शिशु 3 month का हो जाता है तो वह आवाज पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू करता है, जैसे वह आप की आवाज पर किसी तरह का आवाज निकाल कर, आवाज की तरफ देखकर, हंसकर, या अपने शरीर के किसी हिस्से को हिलाकर, जैसे  हाथ या पैर हिलाकर प्रतिक्रिया देता है।


शारीरिक एक्टिविटीज को बढ़ाना :- शिशु के 3 month के उपरांत हम अपने शिशु में कई तरह के बदलाव देख सकते है। उन में  से ही एक है शिशु में शारीरिक एक्टिविटीज को बढ़ा देता है। वैसे तो शिशु शारीरिक मानसिक और बौद्धिक स्तर पर विकास की और अग्रेसर रहता है। जैसे 3 month के बाद से ही बच्चे खुद के शरीर को स्थिर करना शुरू करते है। पीठ के बल लेटे हुए अपने हाथोंसे अपने सिर को उठाने की कोशिश करते है, साथ ही अपने हाथों को मुंह में डालकर चुसना, किसी चीज को उठाकर मुंह में डालने की कोशिश करना, पीठ के बल होने की कोशिश करना, ऐसे कई तरह की एक्टिविटीज को 3 month के शिशु में हम देख सकते है।


3 महीने के शिशु की क्या-क्या गतिविधियाँ होती है?


3 month baby care in hindi के इस आर्टिकल में हम जानेंगे की 3 month के शिशु में आप किस तरह की गतिविधियों को देख सकते है। किस तरह से एक शिशु शारीरिक तौर पर और मानसिक तौर पर गतिविधियाँ करता है। 

आप देख सकते है की शिशु के जन्म के बाद पहले और दुसरें महीने के बाद शिशु की शारीरिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होती है और साथ एक शिशु के मानसिक गतिविधियों को भी हम देख सकते है। जैसे 3 month के उपरांत शिशु अपने आजूबाजू होनेवाली एक्टिविटीज पर ध्यान केन्द्रित करता है। जैसे आप शिशु के पास बैठ कर बातें करते हो तो वह आप के ओठों की एक्टिविटीज को देखता है..आप की आवाज पर प्रतिक्रिया करता है जैसे हसकर, या हाथ या पैर हिलाकर आप की बातों पर रियेक्ट होता है। भूक लगने पर या किसी असहजता के लिए रोकर या चिल्लाकर ध्यान आकर्षित करता है। 


3 month में शिशु अपने हाथों से किसी वस्तु या खिलौने को पकड सकता है। किसी चीज को हाथों से अपने मुंह में डालने की कोशिश करता है।इसी दौरान शिशु खुद को एक तरफ लुढकने की भी कोशिश करता है। अपने हाथों को मुंह में डालकर चुसता है, इस दौरान आप ने देखा होगा की 3 month के उपरांत शिशु की देखने और पहचानने की क्षमता में भी काफी बढ़ोतरी होती है जैसे शिशु अपने माँ-बाप और परिचित चेहरें को काफी अच्छे से पहचान पाता है।


3 महीने के शिशु का खानपान का ध्यान कैसे रखना है?


3 month के उपरांत शिशु के खानपान का हमें किस तरह से ध्यान रखना है इस बातो को जानना भी आप के लिए आवश्यक है इसलिए 3 month baby care in hindi के इस आर्टिकल में  हम ने आवश्यक तौर पर शामिल किया है जो एक शिशु के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। 

जब तक आप का शिशु 6 month का नही हो जाता तब तक आप को आप के शिशु को माँ के दूध के आलावा कुछ भी नहीं देना है। हाँ यदि किसी कारणवश आप अपने शिशु को माँ का दूध नही पिला सकते तब आप को अपने डॉक्टर्स की सलाह से ही शिशु को फार्मुल्ला मिल्क देने की जरूरत होती है। कई माँ बाप अपने शिशु को या नवजात शिशु को गाय का दूध देते है जो आप के शिशु के लिए काफी harmful साबित हो सकता है।

जन्म के बाद 3 month के उपरांत आप का शिशु आप के साथ या आप जहाँ भी रहते है उस जगह से जुड़ जाता है सहज हो जाता है। जिस से उसके कई एक्टिविटीज में बदलाव आता है। तब जन्म के बाद जो उसकी feeding की activities थी उस में भी आप को आप के शिशु के जरूरत के हिसाब से बदलाव करने की जरूरत होती है। क्यों की बढ़ने के साथ साथ आप के बच्चे की भूक भी बढ़ना लाजमी है। 

वैसे तो हर बच्चे का दूध पिने का पैटर्न अलग होता है,फिर भी दिनमें औसतन 3 से 4 घंटें और रात को दों या तिन बारमें आप को अपने शिशु को दूध पिलाने की आवश्यकता होती है। जो शिशु के सही तरह के विकास के लिए जरुरी भी है।


3 महीने के शिशु के लिए क्या जरुरी है?


3 month baby care in hindi के इस आर्टिकल में आप को यह जानना आवश्यक है की इस दौरान आप के लिए और आप के शिशु के लिए क्या जरुरी और महत्वपूर्ण है। आप को तो यह पता है की आप का शिशु पूर्ण तरह से आप पर ही निर्भर है। उसे लिए स्वच्छता का ध्यान, शिशु के साफसफाई का ध्यान, शीशु को किसी तरह से rashes या अन्य इन्फेक्शन न होने के लिए भी आप को ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। साथ साथ आप ने यह भी सुना होगा या आप को आप के डॉक्टर्स ने भी इस बात से सूचित किया होगा की एक माँ के लिए जरुरी है की वजह अपने सेहत और खान-पान का भी ख़याल रखें जिस से शिशु को एक माँ से मिलने वाले आहार में सभी प्रोटीन्स, nutrients मिल सकें। 


साथ ही आप का शिशु कई तरह की एक्टिविटीज को करने की कोशिश करता है तो आप के लिए जरुरी है की उसकी सुरक्षा का भी ध्यान आप को रखना होगा। इस के लिए आप को शिशु जहाँ सोता है , आराम करता है, खेलता है उस जगह को आप को बेबी-प्रूफ बनाने की आवश्यकता होती है। जो सुरक्षा की दृष्टी से महत्वपूर्ण है।


बच्चों के सामने खिलौने रखते वक्त आप को ध्यान रखना है की कोई भी खिलौना धारवाला या नुकीला ना हो जिस से बच्चे को चोट लगने की सम्भावना हो। और जो भी खिलौने आप अपने शिशु के सामने रख रहे हो वह किसी भी तरह से कीटाणु विरहित हो, जिसे शिशु को दस्त या अन्य बिमारियों से बचाया जा सकें।


आज कई माँ-बाप अपने बच्चों को मोबाइल खेलने के लिए दे देते है। 3 month के baby को भी कई parents मोबाइल दिखाते है। यह आप के शिशु के लिए काफी गंभीर हो सकता है। अगर कोई माँ-बाप अपने शिशु को इस तरह से मोबाइल दिखाते है तो उन्हें यह तुरंत बंद कर देना चाहियें। बच्चों को मोबाइल से होनेवाली गंभीर खतरों को जानने के लिए निचे दिए गये लिंक पर क्लिक कर हमारा यह आर्टिकल पढ़ सकते है।


यह 5 बातें जानने के बाद आप अपने बच्चों को मोबाइल देने की हिम्मत नहीं करेंगे।


यदि आप  या आप के घर कोई भी धुम्रपान करता हो तो आप कभी भी घर में या शिशु के आसपडोस धुम्रपान ना करें। 3 month का आप का शिशु  अब भी शारीरिक और मानसिक तौर पर विकास की पहली पायदान पर है। ऐसे में शिशु के फेफड़े या ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता को काफी हानि हो सकती है या आप का शिशु कई गंभीर बिमारियों के चपेट में आ सकता है।


शिशु के टीकाकरण का हमे क्या जानना आवश्यक है?


शिशु के टीकाकरण की जानकारी सभी parents को रखने की आवश्यकता होती है। क्यों की समय पर टीकाकरण आप के शिशु के शरीर में रोग प्रतिरोध क्षमता के साथ  कई एंटी बॉडीज को विकासित करता है जो आप के शिशु के जीवन के लिए काफी जरुरी है। शिशु के टीकाकरण की जरुरी जानकारी के लिए आप निचे दिए गये लिंक पर जाकर टीकाकरण के सभी जानकारी को प्राप्त कर सकते है।


vaccination for babies में जानें शिशु के टीकाकरण की जानकारी


वैसे तो शिशु के जन्म के बाद पहले और दुसरे महीने में जरुरी टीकाकरण हो जाता है जिस से शिशु के तीसरे महीने में आप का शिशु टीकाकरण से free रहता है। इसलिए इस महीने में आप को टीकाकरण की चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती। फिर भी आप को नियमित तौर पर अपने डॉक्टर्स से अपने शिशु का चेक-अप करते रहना चाहियें। 


पहले दों महीनों के मुकाबले शिशु की नींद में क्या बदलाव आता है?


आप को पता है की शिशु के जन्म के बाद पहले दों महीने एक माँ के लिए काफी परेशानी वाले होते है, जिस में शिशु का दिन में सोना और रात रात भर जागना, रोना भी शामिल होता है। 3 month के उपरांत आप के शिशु की नींद में भी थोडा बदलाव आता है जो आप के लिए भी थोडा सुकून भरा हो सकता है। 

3 month में आप के शिशु की नींद में भी एक स्थिरता आती है। जहाँ पहलें दों महीने आप में शिशु रात को जागता था उस में थोडा बदलाव होता है और रात के समय शिशु ज्यादा सोने लगता है जो आप के लिए राहत भरा होता है। आप को आप के शिशु से जुड़ें नींद के बारें में दी गयी जानकारी को अवश्य पढना चाहिए जो आप को अपने शिशु के नींद से जुडी सभी बातों को बताती है। इस के लिए आप निचे दिए गये लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते है।


अपने शिशु की नींद का कैसे रखें खयाल, जानिए 5 important बातें आप के बच्चों के नींद से जुडी हुई


हो सकता है की आप का शिशु भूक लगने पर एक या दों बार नींद से जाग जाएँ लेकिन एक बार feeding करने के उपरांत आप का शिशु कम से कम 4 या 5 घंटे की नींद लेना शुरू कर देता है। बच्चों में नींद आने के कुछ संकेतों को भी हम समझ सकते है जैसे, नींद आते ही बच्चोमें चिड़चिड़ा पण हम देख सकते है, रोना या आँखें मलना, अपना अंगूठा चुसना जैसी एक्टिविटीज हम बच्चोमें देख कर समझ सकते है की अब शायद शिशु को नींद आ रही है।


इस के तुरंत बाद हम कमरें में कम रौशनी कर और हल्का music चला सकते है जिस से शिशु को जल्दी नींद आने की संभावनाएं बढ़ जाती है।



3 महीने के शिशु के लिए किस तरह के खिलौने हमें खरीदने चाहियें?


3 month के शिशु लेटे रहते है। इस तरह के बच्चों के लिए खिलौने खरीदते वक्त हमें ध्यान रखना होता है ऐसी बातों का जो हमारे 3 month के शिशु के लिए भी जरुरी और सुरक्षित हो।  जन्म  से 3 month के उपरांत बच्चों के पाँचों भी ज्ञानेन्द्रिय (जैसे त्वचा, कान, नाक, आंखें और जीभ) develope स्टेज में होते है। अगर आप को बच्चों के खिलौनों के चयन में कोई दिक्कत आ रही है तो आप निचे दिए गये लिंक पर क्लिक कर शिशु के उम्र के हिसाब से खिलौनों का कैसे चयन कर सकते है यह जान सकते है।

क्या आप अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीद रहें है? बच्चों के खिलौने और उस से जुड़ी 10important बातें जान लीजिए।


इस के लिए Playmats and baby gyms 3 month के शिशु के लिए एक बढ़िया और atractive खिलौना साबित होता है। जिस मे अलग अलग कलर्स और shape के खिलौने लटके होते है। बच्चे के ऊपर लटके होने के कारण बच्चे इसे अच्छी तरह देख पाते है।

3 month के बच्चों को colours की अच्छी पहचान कराने के लिए भी यह toy काफी helpful साबित होता है। जिस मे कई तरह के atravtive colours और अलग अलग तरह के shape में toys लटके हुए होते है। जिसे बच्चे आराम से लेटे लेटे खेल सकते है। बच्चे उन toys की तरफ़ हाथों और पैरों को बढ़ाते है। जिस मे बच्चों की अच्छी activity हो जाती है। साथ ही बच्चों की मानसिक और शारीरक क्षमता को भी बढाने में खिलौने बेहतर साबित होते है।


3 month baby care in hindi में आप के लिए विशेष सलाह

3 month baby care in hindi के इस आर्टिकल में हम ने आप को आप के शिशु के 3 month के उपरांत होनेवाली एक्टिविटीज के साथ साथ सभी पैलुओं को पर पूर्ण रूप से बताने की कोशिश की है। फिर भी कभी कभी मौसम के बदलावों से फैलनेवाले बैक्टीरिया और कई तरह के जीवाणु एवं विषाणुओं से संक्रमण का खतरा आप के शिशु पर बना रहता है। इस लिए आप को जरुरी है की आप अपने शिशु की आप के फॅमिली डॉक्टर्स एवं चिकित्सक से नियमित रूप से जांच कराएँ ताकि किसी भी संभावनाओं से अपने शिशु को बचाया जा सकें।


3 month baby care in hindi
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baby malish tips in hindi जाने बच्चों के मालिश से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

baby malish tips in hindi जाने बच्चों के मालिश से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

 baby malish tips in hindi

बच्चे की मालिश सबसे ज्यादा important होती है। बच्चे की अच्छी growth के लिए, उनके बौद्धिक तथा मानसिक विकास के लिए भी मालिश बहुत ज्यादा important होती है। जब एक मां या parents अपने बच्चे की मालिश करते है, मालिश करते करते बच्चे से बातें करते है, उन बातों से और उनके touch से बच्चे और parents में काफ़ी अच्छी bonding बनती है। इसलिए हमें बच्चे की मालिश करते वक्त पूरे उत्साह और positive thinking से मालिश करनी चाहिए। आज हम baby malish tips in hindi (बेबी मालिश टिप्स इन हिंदी) के इस आर्टिकल में बच्चों के मालिश से जुड़े कुछ बातों को जानेंगे।

बच्चों के जन्म के बाद parents के दिमाग में कई सवाल आते है। जिस मे से एक है बच्चों की बॉडी मसाज। बच्चों के मालिश को लेकर भी parents के दिमाग में कई सवाल आते है। जिन सवालों को हमने baby malish tips in hindi (बेबी मालिश टिप्स इन हिंदी) के इस article में cover करने का प्रयास किया है। और इन सवालों केे जवाब ढूंढ़ने।

baby malish tips in hindi
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  • बच्चों की मालिश करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए?
  • बच्चों की मालिश कब से शुरू करनी चाहिए?
  • कौन से समय बच्चों की मालिश करनी चाहिए?
  • बच्चों के मालिश कौन से तेल से करनी चाहिए?
  • बच्चों की मालिश कितनी देर तक करनी चाहिए?
  • कब हमें बच्चों की मालिश नहीं करनी चाहिए?
  • किस तरह से बच्चों की मालिश की जाती है?
  • बच्चों की मालिश कब बंद कर देनी चाहिए?

यह भी पढ़े :– रखें अपने शिशु का खयाल।

benefits of baby malish tips in hindi

इस baby malish tips in hindi के article में हम आपको बताएंगे की बच्चों में मालिश के क्या क्या benefits होते है। बच्चों की mental, social और physical development में बच्चों की मालिश सबसे ज्यादा helpful होती है। पहले तो यह समझना होगा कि मालिश से बॉडी को relief मिलती है। और skin relax और फ्रेश होती है। मांसपेशियों को आराम मिलता है।

अगर parents सोंचते है कि छोटे बच्चे तो as it is relax होते है। उनकी activity तो इतनी होती नहीं तो फिर उन्हें आराम की क्या जरूरत? तो आपको बता दे कि relaxation की सबसे ज्यादा जरूरत छोटे बच्चों को ही होती है। वह इसलिए कि इस age में बच्चे अपना maximum time लेटे हुए spend करते है इस वजह से उनकी back दर्द करती है। बच्चों की थोड़ी activity भी उनके लिए बहुत ज्यादा होती है।

इसलिए उनकी body को strength होने की जरूरत होती है। उनकी पूरी body में blood circulation की जरूरत होती है। और इन सब reason के वजह से बच्चों को सबसे ज्यादा relax होना जरूरी होता है और मालिश उसमें बहुत मददगार साबित होती है।

बच्चों को मालिश से दूसरा फायदा यह होता है जब आप बच्चे के पर मालिश करते है और tummy exercise बच्चे को कराते है मालिश के दौरान तब उस के digestion पर बहुत फरक पड़ता है। क्यों कि बच्चे सबसे ज्यादा digestion के वज़ह से ही रोते है। बच्चे दूध पीते है वह ठीक से digest नहीं हो पाता और gas ज्यादा होती हैं तो उसके लिए भी मालिश बहुत उपयोगी साबित होती है।मालिश से बच्चों को नींद बहुत अच्छी तरह से आती है।

मालिश के बाद गुनगुने पानी से नहाने के बाद बच्चा काफ़ी relax महसूस करता है। मालिश से बच्चों के जोड़ों में को दर्द होता है उस से बच्चों को आराम मिलता है। मालिश से बच्चों की स्किन को भी आराम मिलता है। Skin glow करती है।

और सबसे ज्यादा मालिश का फायदा यह है कि जब हम बच्चे की मालिश करते है तब बच्चे हमारा टच महसूस करते है। हम baby malish tips in hindi के इस articles के माध्यम से आपको बताना चाहेंगे कि Parents और बच्चे के बीच में बहुत अच्छी bonding बनाने का काम मालिश करती है।इसलिए जब भी आप बच्चे की मालिश करेंगे तो free of mind से और positive thinking के साथ करें।


बच्चों की मालिश कब से शुरू करनी चाहिए। baby malish tips in hindi

Baby malish tips in hindi के इस आर्टिकल में बच्चों की मालिश जब शुरू करनी चाहिए इस बात को रखना जरूरी लगता है। क्यो कि कई गलत धारणा और रीतिरिवाज़ों से कई ऐसे गलत बातें सामने आती है। कोई कोई perents जन्म के 2-3 दिन बाद ही मालिश शुरू कर देते है जो की गलत बात है।

हमें बच्चों की मालिश के लिए कोई जल्दी नहीं करनी है। Parents के लिए यह जानना बहुत आवश्यक है कि अपने नवजात शिशु की मालिश कब से start करें। देखिए normally 9 महीने में बच्चा पैदा होता है वह healthy होता है। बच्चे का weight भी 3.5kg के आसपास होता है।तब जन्म से 10 से 12 दिनों के बाद बच्चे की मालिश शुरू करनी चाहिए।

अगर बच्चा कम दिनों में पैदा हुए है। 9 month के पहले ही पैदा हुआ है।जिसका weight 3kg ता उस से कम है।बच्चा unhealthy है तो भी हमें बच्चे की मालिश start करने के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। ऐसे वक्त महीने डेढ़ महीने बाद जब बच्चा थोड़ा healthy हो जाए तब मालिश शुरू करनी चाहिए।

कौन से समय बच्चों की मालिश करनी चाहिए। Baby malish tips in hindi

देखिए यह भी एक सवाल काफ़ी parents के मन में आता है। या कोई parents समझ नहीं पाते कि बच्चे को दिन में कितनी बार मालिश करनी है। या कुछ parents को लगता है दिन में दो तीन बार मालिश करना अच्छा नहीं है। ऐसे काफी सवाल parents के मन में आता है। हम baby malish tips in hindi के इस आर्टिकल्स के माध्यम से सभी parents को सूचित करना चाहते है कि मालिश के कोई side effect नहीं है।

आप को एन में दो या तीन बार भी मालिश कर सकते है। लेकीन normally जो बच्चे के लिए भी sufficient है दिन में दो बार मालिश करनी चाहिए। पहले सुबह के वक्त और दूसरी रात के वक्त बच्चे को मालिश कर के सुला सकते है। जिसे हम sleeping massage भी कहते है।

बच्चों के मालिश कौन से तेल से करनी चाहिए। Baby malish tips in hindi

काफ़ी महत्वपूर्ण प्रश्न है इसलिए हमने हमारे baby malish tips in hindi के इस article में इसे शामिल किया है। कई parents को पता ही नहीं होता की किस oil से baby की मालिश करनी है। पहले तो हमें यह समझना होगा कि नया नया बच्चा इस दुनिया मे आया हैं। उसकी skin एकदम कोमल और काफ़ी sensetive है। हमें यह देखना होगा कि जो चीज़ हम बच्चे की skin को लगा रहे है। जिस से बच्चे की मालिश कर रहे है वह बच्चे के skin के लिए harmful तो नहीं है।

आज भी कई लोग जो पुराने खयालातों के होते है वह बच्चे की मालिश के लिए सरसों का तेल इस्तेमाल करते है। जो कि सब से गलत बात है। सरसों के तेल में sulphur नाम के content की मात्रा अधिक होती है जिस से बच्चों में rashes होने के chanchage होते है।

Mustered oil (सरसों का तेल) बच्चों के skin के लिए काफ़ी harmful होता है। सरसों का तेल जिसे हिंदी में “कड़वा तेल” भी बोलते है जो बच्चों की skin के लिए सचमुच कड़वा होता है।

तो यकीनन यह सवाल आता है कि की हम बच्चों की मालिश के लिए कौन सा तेल इस्तेमाल करें? देखिए मार्केट में बच्चों के मालिश के कई तरह के तेल आसानी से उपलब्ध हो जाते है। अगर आप वी नहीं effort कर सकते तो आप coconut oil का भी इस्तेमाल कर सकते है जो बच्चों की skin के लिए काफ़ी अच्छा माना जाता है। गर्मियों के दिनों में हम Coconut oil का इस्तेमाल कर सकते है। और सर्दियों में हम olive oil और बादाम के तेल का इस्तेमाल कर सकते है।Olive oil से भी कभी कभी rashes आ सकते है। लेकीन इस से कोई फ़िक्र की बात नहीं।

बच्चों की मालिश कितने देर तक करनी चाहिए?

बच्चे की मालिश करते वक्त हमें time limit रखना चाहिए। 15 से 20 मि तक हमें बच्चे की मालिश करनी चाहिए। लेकीन आप के पास यदि time की कमी है तो आप को कम से कम 10 मि. तक बच्चे की मालिश करनी ही चाहिए। इस दौरान अगर मालिश करते वक्त बच्चा थक जाए या रोने लगे या फिर चिड़चिड़ा है जाए तब जबरदस्ती मालिश नहीं करनी चाहिए। उसे एक बार अपना feed कराइए। और जब बच्चा फिर comfortable हो जाए तब आप मालिश continue कर सकते है।

कब हमें बच्चों की मालिश नहीं करनी चाहिए।

बच्चे के जन्म के साथ ही जिस नाल से baby और मां attach होते है वह नाल डॉक्टर्स कुछ दूरी से काट देते है। और जो नाल का हिस्सा बच्चे से जुड़ा होता है वह भी 7 से 10 दिनों में गिर जाता है। इसलिए शुरवात के 10 से 12 दिन हमें बच्चे की मालिश नहीं करनी है। क्यों कि नाल किडनी सेजुदी होती है और अगर उसमें कुछ infection आ जाता है तो वह बच्चे के किडनी को affect कर सकता है।

दूसरी बात यह कि जब बच्चा बीमार हो या कोई viral feaver से ग्रस्त हो तो हमें बच्चे की मालिश नहीं करनी है। मालिश body को rise करती है। जिस से body में गर्मी आती है। Feaver में बॉडी पहले से बी गर्म होती है। इसलिए feaver के दौरान हमें बच्चे की मालिश नहीं करनी चाहिए।

किस तरह से बच्चों की मालिश की जाती है। baby malish tips in hindi

पहले करें सिर पर मालिश।

सबसे पहले हमें अपने हाथ पर oil लगा लेना है। जिस से कोई friction नहीं होगा और बच्चे के body पर आप smoothly मालिश कर सकते हो जिस से बच्चे को भी काफ़ी अच्छा लगेगा।सबसे पहले हमें बच्चे के सिर पर मालिश करनी है। सिर का area और skin बहुत ही soft होती है। इसलिए carelly हमें हल्के हाथों से circullar motion में oil को अच्छे तरीके से scalp पर spread करके softly मसाज करना है। बहुत important है कि आप सिर पर बिल्कुल ही pressure ना लगाए। सिर पर ऑयल को अच्छी मालिश करने से बच्चा काफ़ी relax महेसुस करता है। और सिर पर मालिश करने से बच्चे के बालों को भी पोषण मिलता है।

चेहरे पर करें हल्की मालिश।

इसके बाद हम बच्चे के चेहरे का area cover करना है। अंदर से बाहर की तरफ़ circullar motion में हमें मसाज करना है। दोनों हाथों के अंगूठे से बच्चे के आइब्रो से हमें circullar motion में धीरे धीरे soft हाथों से मसाज करना है। फिर नाक के सेंटर point से धीरे धीरे गालों की तरफ मसाज करना है। उसके बाद बच्चे के lip area को भी अच्छे से मसाज करना है। और फिर हल्के हाथों से कानों को भी अच्छे से मसाज करना है।

अप्पर body मलिश।

अगली जो स्टेप है वह है uppar body की मालिश जिसके लिए हमें अपने हाथों को फिर से तेल लगा लेना है। और हमें बच्चे के cheast पर, पेट पर और हाथों पर अच्छे से तेल लगा लेना है। पहले हमें cheast पर circullar motion में बच्चे के गर्दन तक अच्छे से मसाज करना है।

उसके बाद हमें बच्चे के पेट पर हल्के हाथों से पेट की ऊपर से नीचे तक अच्छे से मसाज करे। उसके बाद अपनी उंगलियों से बच्चे के पेट पर circullar motion में हल्के से push करें जी से बच्चे के पेट मे बन रही gases realise होती है वह निकलने मे काफी मदद मिलती है और बच्चों को बहुत आराम feel होता है। पेट की मसाज को बच्चे काफी enjoy करते है।

हाथ और पैरों की मालिश।

और अब हमें बच्चे के टांगों कि मसाज करने की लिए अपने हाथों पर तेल लगा लेना है। फिर बच्चे के टांगों को अच्छे से लगाकर अन्दर से बाहर की तरफ circullar motion में एक के बाद एक ऐसे दोनों भी टांगों को अच्छे से मसाज करना है। इसी तरह बच्चे के हाथों को भी मसाज करना है।

हल्के हाथों से करें back को मालिश।

अब और एक बार अपने हाथों में अच्छे से तेल लगाकर बच्चे के back को मसाज करना है। इसलिए बच्चे को पेट के बल लिटाकर उसकी back को अच्छे से तेल लगाए। अब बिल्कुल हल्के हाथों से बच्चे के nack से लेकर bottom तक ऊपर से नीचे तक मालिश करनी है। बच्चे के spine (रिड की हड्डी) के दोनों तरह circullar motion में मसाज करना है। याद रहे हमें बच्चे के spine को टच नहीं करना है।

अब उसके बाद हमें हल्के हाथों से बच्चे को exercise कराना है। cycling या padeling करना है। जिस से बच्चे की पेट की gases realise हो जाए।

बच्चों की मालिश कब बंद कर देनी चाहिए।

मालिश करने के कोई भी side effect नहीं होते इसलिए आप जब तक कर सकती है। तब तक वह एक अच्छी बात है। लेकीन आमतौर पर बच्चे के दो साल की उम्र तक मालिश करना काफ़ी फायदेमंद होता है।

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रखें अपने बच्चों का ख्याल | baby care tips in hindi

रखें अपने बच्चों का ख्याल | baby care tips in hindi

रखें अपने बच्चों का ख्याल | baby care tips in hindi


जो भी perents हाल ही में perents हुए है। आप सभी को शुभकमनाएं। Perents होना एक सुखद अनुभव होता है। Specially एक मां के लिए जो अपने baby को नौ महीने अपने पेट में पालती है। नौ महीने उस baby की care करती है। और जब वह अपने baby को जन्म देती है। इस से special movment लाइफ में कोई भी नहीं हो सकती। जन्म देने के बाद newborn baby care कैसे करनी है (baby care tips in hindi ) अपने शिशु का कैसे खयाल रखना है। यह आज के इस टॉपिक में जानते है।

baby care tips in hindi
baby care tips in hindi


आज हम इस(baby care tips in hindi) के आर्टिकल में newborn baby care के टॉपिक को दो हिस्सों में समझेंगे। एक तो यह कि जो baby बिल्कुल normal तरीकों से पैदा हुए है। जो healthy है, अच्छे weight के है। जिन्हे पैदा होने के बाद कोई complication नहीं हुआ उनकी किस तरह से हमें care करनी है। और दूसरा यह कि जो baby adnormal तरीकों से critical condition में , कम दिनों में पैदा हुए है जीने हम premature babies कह सकते है। जिनकी उनके parents को ज्यादा care करनी पड़ती है।

newborn baby care (baby care tips in hindi)


Baby जब पैदा होता है तब हमें baby की किस तरह से care करनी है शुरवात के दो चार दिन हमें किन बातों का खयाल रखना होता है। Baby की कौन सी बातें normal होती हैं और कौन सी बातें critical हो सकती है इसे जानना भी जरूरी है। इन सभी बातों को हम baby care tips in hindi के इस आर्टिकल में जानेंगे। जिसे आप को काफ़ी help मिल सकती है।

वैसे hospitals में डॉक्टर्स सभी तरह का खयाल रखते है। इसलिए हमें डरने की कोई बात नहीं रहती। फिर भी हमें अपनी ओर से खयाल रखना जरूरी है।Baby एकदम normal तरीकों से born हुआ may be cezerin भी हुआ तो कोई बात नहीं लेकिन baby अगर एकदम normal है, healthy है। पैदा होते ही तुरन्त baby रो दिया है। डॉक्टर्स ने भी आपको आकर कह दिया है कि baby normal है। Weight भी एकदम सही है। तो अब baby को feed करा सकते हो।

डॉक्टर्स से पूछे यह जरूरी बातें ( baby care tips in hindi )


तब पहले तो हमें डॉक्टर्स से जानकारी हासिल करनी है। वजन ठीक किया गया या नहीं, baby तुरंत रोया या नहीं, baby ने सूसू, पॉटी ठीक से किया या नहीं यह बात जानना बहुत जरूरी होता है। Normally बच्चे को पैदा होते ही 24घंटे के अन्दर पॉटी कर देनी चाहिए। जिस का रंग काला या हरा है सकता है जिसे miconium बोलते है। इसमें थोड़ा confusion है कि कोई कोई बोलते है कि born होते ही सूसू करना important होता है पॉटी एक दो दिन में भी हो सकती है।लेकिन पॉटी baby के आंतों से related होती है और सूसू kidny से।

अगर baby नार्मल है तो पैदा होते ही 24 घंटों के अंदर पॉटी कर देगा। Baby की किडनी anmature होने के वजह से सूसू करने के लिए एक दो दिन भी लग सकते है। लेकीन 99% cases में baby 24 घंटे के अंदर ही सूसू भी कर देते है। और baby का रोना भी काफ़ी important है। normal baby पैदा होते ही तुरन्त रों देते है। नहीं तो डॉक्टर्स सफाई करते वक्त उन्हें हिलाते डुलाते है तब normally baby रोते देते हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आपको बच्चे (baby) का काफ़ी खयाल रखना है। और डॉक्टर्स के rules को fallow करना जरूरी है।

बच्चे को पिलाएं मां का दूध। (baby care tips in hindi )


यह सब बातें आपको डॉक्टर्स को अच्छे तरह से पूछ लेनी है। डॉक्टर्स आपको कहेंगे की आप baby को feed दे सकते हो baby को दूध पिला सकते हो तब हमें पहला खयाल रखना है कि हमें baby को मां का ही दूध पिलाना है। शुरू का एक दो बूंद जो गाढ़ा वाला वहीं हमें baby को पिलाना है। उस हमें छोड़ना नहीं है। मां के दूध के अलावा हमें baby को कुछ भी नहीं देना है। अक्सर लोग या माएं अपने निजी परेशानी की वजह से बच्चे को गाय का दूध पिलाती है जो एक नवजात शिशु के लिए काफी harmful साबित हो सकता है।

अगर कोई सोचता है कि इतने जल्दी दूध आयेगा ता नहीं और बाहर की चीजें जैसे गुड का पानी, चाय, पानी या बाहर का दूध दे देते है। यह बिल्कुल ही wrong है। ऐसा कतई ना करे।

बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां का ही दूध देना है। जो baby के लिए अमृत के समान है। मां के दूध में बहुत सारी anti bodies होती है जो बच्चे को बड़ी बड़ी बीमारियों से बचाती है। उसकी immunity को strong बनाती है।

शुरू के तीन चार दिनों में बच्चा थोड़ा सुस्त रहता है। ज्यादा सोता है। तो शायद भूक के लिए ना रोए लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना है की बच्चे को 2-2 घंटे में मां का दूध पिलाना ही पिलाना है। अगर बच्चा बार बार दूध मांगता है तो इसकी वजह यह है कि बच्चा काफ़ी healthy है। इसलिए घबराना नहीं है बच्चे को बार बार दूध पिलाए। किन्हीं कारणों से मां को दूध नहीं आ रहा है तो ही हमें डॉक्टर्स की advise से ही डॉक्टर्स जो recomend करेंगे वहीं दूध पिलाना है।

पीलिया का रखना है खयाल। (baby care tips in hindi )


अगर आप delevary के तुरंत बाद ही घर आ जाते हो तो एक बात रह जाती है वह है पीलिया। हर बच्चे को थोड़ा बहुत ज्यादा पीलिया होता ही है। तो पीलिया के बारें में हमें कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। सबसे important जो इसमें होता है वह है मां का blood group। आप को मां का blood group पता होना जरूरी है।

अगर मां का blood group A+ ,B+ या AB+ है तो कोई problem नहीं है। लेकीन अगर मां का blood group O, O-, A-, B- या AB- है तो हमें डॉक्टर्स को जरूर पूछना है कि बच्चे का blood group क्या है।

अगर O blood group या negative blood group के साथ कुछ भी miss match होता है तो इस condition में बच्चे को पीलिया होने के chanches बहुत ज्यादा होते है। Normally अगर आप hospital में है तो डॉक्टर्स खुद ही इस बात को बहुत ध्यान रखते है। पीलिया के लिए जो phototheropy जरूरी होती है वह को जाती हैऔर पीलिया कि जांच को जाती है।

अगर आप घर पर है तो आप को जन्म के 2-4 दिन में पीलिया पर ध्यान देना होता है। जैसे बच्चे की आंखों में पीलापन देख सकते है, या बच्चे का शरीर पीला पड़ सकता है। Normally यह होता है तो ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। हां लेकिन डॉक्टर्स को जरूर दिखाना है।

Normal बातों पर भी रखें ध्यान। ( baby care tips in hindi )


शुरू के तीन चार दिन baby बहुत कम सूसू करता है। यह एक normal बात है। लेकीन तीन या चार दिन के बाद baby की इस frequency में बदलाव होना जरूरी है। जैसे baby जो सूसू है वह दिन में छह से सात बार दिन में और तीन से चार बार रात में baby को सूसू होनी चाहिए। शुरू के दिनों में तीन चार दिन के बाद baby ज्यादा पॉटी करने लगेगा जो की एक नॉर्मल बात हैं। यह मा की दूध के वजह से होता है । फिर भी आप डॉक्टर्स की सलाह ले सकते है।

और एक चीज़ जो normal होती है लेकिन parents इस बात पर थोड़े घबरा जाते है। जो है baby जा weight। शुरवात के 8-10 दिनों में healthy बच्चों में भी 10 to 15% body weight loss पाया जाता है।

Rashes पर ध्यान देना है जरूरी। (baby care tips in hindi )


शुरू के तीन चार दिनों में बच्चों में rashes भी develop होता है। तो इसमें हमें ध्यान देने की बात यह है कि यह rashes normal है या कोई infection है। अगर बच्चे के माथे पर, फेस पर या बॉडी पर लाल लाल colour के rashes दिखे तो घबराना नहीं है। लेकीन हा आप बच्चे को जो कपड़े पहना रहे हो वह अच्छे से धोकर साफ किए हुए हो। ध्यान रखें कि उन कपड़ों में धोते वक्त डिटर्जेंट न रह गया हो।

यदि आप नए कपड़े लाते हो तो वह भी धोकर ही पहनना चाहिए। उस के वजह से भी infection होकर rashes हो सकते है। rashes हो रहे है और वह पक रहे है या पीले पड़ गए है तो डॉक्टर्स को जरूर दिखाना चाहिए।वह नॉर्मल भी हो सकते है। और infection भी हो सकता है।

हो सकती है infection की समस्या। (baby care tips in hindi)


बच्चे की जो नाल होती है। मां के पेट मे जिस से बच्चे का connection होता है। Delivery के बाद डॉक्टर्स क्लिप लगाकर उस नाल को काट देते है। वह थोड़ा बचा होता है। हमें उस की भी care करनी जरूरी है। क्यों कि वह liver से connected होती है। अगर नाल में कोई infection होता है तो लीवर भी infected होने का डर रहता है। इसलिए baby care tips in hindi के इस article में हम ने इस बात को शामिल किया है। क्यों कि यह जरूरी है।

हमें यह खयाल रखना है कि उस में कोई infection ना हो। पहले तो हल्के गुनगुने पानी से उसे अच्छे से साफ कर लेना है। और dry के लेना है। और फिर antibiotics power उस में डाल देना है। अगर वह अच्छे से clean है anitibiotics powder की जरूरत नहीं है। बस हमें यह खयाल रखना है कि उस में कोई गंदगी ना हो।

अगर आपको उस में से पानी निकलता दिख रहा हो या कोई भी infection जैसा लग रहा है तो हमें उसे तुरंत डॉक्टर्स को जरूर दिखाना है।7 से 15 दिनों में baby की नाल गिर जाती है। उसके बाद भी हमें उस जगह को clean और dry रखनी है।


दूध पिलाते वक्त जरूरी है यह बातें। (baby care tips in hindi )


Baby को दूध पिलाते वक्त baby का सिर ऊंचा रख कर ही दूध पिलाना है। इस बात का भी खयाल रखना है। लेटे लेटे बच्चे को दूध नहीं पिलाना है। और दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार जरूर दिलानी है। बच्चे का बार बार दूध पलट देना या उल्टी के देने का यही reason है कि उसे अच्छे से डकार नहीं दिलाई गई। अक्सर ऐसा होता है रात में baby जागता है तो माताएं उन्हे लेटे लेटे ही दूध पिलाती हैं। आप को इस बात को ध्यान रखना है। आप उठकर बच्चे का सिर ऊंचा रखकर ही दूध पिलाए।

Baby के मसाज के लिए हमें बिल्कुल जल्दबाजी नहीं करनी है। एक दो या चौथे दिन से एकदम मालिश करना शुरू नहीं करना है। अगर baby healthy हो फिर भी। 10 से 12 दिन बाद ही हमें बच्चे का मसाज शुरू करना है।

देखिए बच्चा नया नया दुनिया में आया है। उसका बड़े प्यार से, positive तरीक़े से, बड़ी care के साथ welcome होना चाहिए।radiation वाली चीजें जैसे मोबाइल, टीवी या अन्य गाझेट्स बच्चों से दूर रखना चाहिए। Baby जब जग रहा है तब उसके साथ खेलिए, बातें करे touch करिए। Touch के जरिए बच्चे के brain में massage जाता है कि यह मेरे parents है। ऐसे तरीक़े बच्चे को positive feedback देते है।

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कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल। Premature baby care in hindi

कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल। Premature baby care in hindi

कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल। premature baby care in hindi


premature baby care in hindi

premature baby care in hindi

नवजात शिशु की देखभाल करते वक्त सब से पहले तो parents को यह मालूम होना चाहिए कि अपना baby prematuare है कमज़ोर है तो उन्हें बिल्कुल चिंता नहीं करनी और बिल्कुल भी घबराना नहीं है। बस उसकी अच्छे से care करना होता है। दुनिया में ऐसे कई example देखें जा सकते है जो birth के वक्त prematuare हो कर भी आगे चलकर उन्होंने अपना नाम कमाया।



Example के तौर पर आप The great scientist सर न्यूटन का ही example ले सकते है। जो बचपन में काफ़ी कमज़ोर थे। इसलिए parents को यह खयाल मन से निकाल देना चाहिए की अगर बच्चा कमज़ोर पैदा हुआ है तो lifetime वह कमज़ोर रहेगा। या दुनिया की रेस में आगे नहीं बढ़ पाएगा। ऐसा नहीं है। बस उसे सही पालन पोषण और आप के प्यार दुल्हार की ज्यादा जरूरत है। कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल Prematuare baby care in hindi के इस आर्टिकल में हम कमज़ोर, prematuare baby की देखभाल संबंधी जानकारी को जानेंगे।और उसे सही पोषण और उनकी handling और care के बारे में भी समझते है


कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल। Premature baby care in hindi


Prematuare या कमज़ोर शिशु किसे कहते है।जो baby 9 month में पैदा होते है, जिनका weight normally 3kg के ऊपर है और जिनके जन्म होते ही सूसू पौटी 24 घंटे के भीतर हो गई। जो अच्छे से दूध पी पा रहे है। जिन्हे भुक ज्यादा लग रही है। बार बार दूध की मांग करते है। उन्हे हम healthy baby कहते है। और जो समय के पूर्व जैसे एक week के पहले, या 15 days के पहले या 1 month के पहले ही पैदा हुए है। जिनका weight 2kg के अंदर है। जो ठीक से दूध नहीं पी पा रहे। उन्हे सूसू पॉटी करने में परेशानी हो रही है। ऐसे बच्चों को हम prematuare या कमज़ोर बच्चे कहते है।


कमज़ोर शिशु के जन्म के कारण। Premature baby care in hindi


जो baby 1 week पहले या पंद्रह दिन पहले या 1month पहले पैदा होते हैं। उनकी मां के पर में growth नहीं हो पाती। क्यों कि नौवें महीने में baby की growth सबसे तेजी से होती है। उसका weight बढ़ता है। उस वक्त baby को मां से सबसे ज्यादा fats, proteins, irons मिलते है। और immunity जो बच्चे को अपने मां से मिलती है। उस से बच्चा healthy पैदा होता है। लेकीन जब बच्चा 1 week पहले, या पंद्रह दिन पहले या एक या दो month पहले पैदा होता है उसे यह सब नहीं मिल पाता इसलिए बच्चा कमज़ोर और unmatuare पैदा होता है।


कमज़ोर शिशु के जन्म के दूसरे कारण। Premature baby care in hindi


Baby के जन्म के पूर्व हमें काफ़ी बातों का ध्यान रखना होता है। Pregnancy के दौरान हमें काफ़ी सतर्क भी रहना होता है। जब हम सतर्कता नहीं रखते तो prematuare baby के जन्म का खतरा बढ़ जाता है।


Pregnancyके दौरान कोई भी औषधि या tablets हम डॉक्टर्स के सलाह के बिना ना लें। इस बात का ध्यान रखना जरूरी होता है। कभी कभी हम Pregnancy के दौरान किसी pain killar का इस्तेमाल डॉक्टर्स को पूछे बिना करते है। जिस से हमारा दर्द तो ठीक हो जाता है किन्तु इस के side effects पेट मे पल रहे बच्चे पर होता है।जिस के कारण उसके अंग विकसित नहीं हो पाते।


कभी कभी मां के गर्भाशय के छोटे होने के कारण भी premature डिलीवरी की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।

यदि plecenta द्वारा baby को blood suply में कोई रुकावट या परेशानी हो रही हो तो इस case में भी premature डिलीवरी की संभावना अधिक होती है।


Pregnency के दौरान यदि मां के आहार में कमी आई हो या मां का weight कम हो तो भी कमज़ोर शिशु को जन्म देने की संभावना होती है। pregnency के दौरान कॉफी या चाय जैसे पेय की अधिकता और अनियमित दिनचर्या के कारण भी कमज़ोर शिशु के जन्म की संभावना हो सकती है। इसलिए आपको pregnency के दौरान अपने आहार जा विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।


यदि आपका पहले misscarrige या abortion हुआ हो तो premature डिलीवरी की संभावना रहती है। या यदि आप एक से ज्यादा शिशु की मां बनने जा रही हो जिसे हम multiple pregnency भी कहते है तो भी समय से पहले शिशु का जन्म होने की संभावना बढ़ जाती है।





NICU ट्रीटमेंट। Premature baby care in hindi


NICU में होती है कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल।


हमारे देश मे premature baby birth का प्रमाण लगभग 15% है। याने हर 100 baby के पिछे 15 premature baby पैदा होते है। और आज के दौर में लगभग 84% बच्चे hospital में पैदा होते है। इसलिए जो भी बच्चे premature होते है उन्हे NICU में रखा जाता है। हॉस्पिटल के डॉक्टर्स और नर्सेस baby की care करते है। NICU में बच्चों को categery के अनुसार रखा जाता है। जैसे


NICU के तीन लेवल होते है।

  1. Basic treatment NICU
  2. Middle level NICU
  3. Intencive care NICU


जो बच्चे 35 week के पहले जन्मे हैं और जिनका weight लगभग 1.8kg या उस से कम होता है। वह बच्चे Intencive care NICU में आते है।


जिन बच्चों को जन्म होने के बाद से ही सांस लेने में तकलीफ़ होती है। और शरीर को oxygen की कमी की वजह से जो बच्चे जन्म के बाद रोते नहीं है। वह बच्चे middle level NICU में आते है।


तीसरा जो basic reason होता है वह होता है बेसिक infection जिसकी वजह से बच्चे NICU में रखें जाते है वह basic treatment NICU में रखें जाते है। Jaundice के कारण भी बच्चे NICU में आते है।



मैक्सिमम ट्रीटमेंट पीरियड्स। Premature baby care in hindi


जो बच्चे Jaundice के NICU में जाते है वह बच्चे maximum 3 से 5 दिन में ठीक होते है।जिन बच्चों को सांस लेने में तकलीफ़ होती है। जिनकी शरीर में oxygen की कमी होती है। उन बच्चों को 10 से 15 दिन NICU में लग सकते है। जो बच्चे infection की वजह से NICU में आते है उन्हे 7 दिन से 3 week का टाइम लग सकता है।अभी हमारे देश में भी technology का इस्तेमाल होने लगा है और knowledge भी बढ़ गया है इसलिए हमारे दिश में NICU से 96% से उपर बच्चे survive होते है।


(after NICU) घर पर कैसे करें कमज़ोर शिशु की देखभाल। Premature baby care in hindi


हॉस्पिटल से घर आने के बाद भी हमें baby care करना जरूरी होता है। खास कर premature बच्चों के बारे में हमें सजग रहने की आवश्यकता होती है। आओ देखते है हमें अपने घर किस तरह से premature बच्चों का खयाल रखना है। किस तरह से उनकी care करनी है।


जब बच्चे हॉस्पिटल में होते है तब डॉक्टर्स और नर्सेस बच्चों की अच्छी देखभाल तो करती ही है। लेकीन हमें भी डॉक्टर्स से बात करती रहनी चाहिए। उनके introction को fallow करते रहना चाहिए।


जब हम बच्चे को घर पर लेकर आते है तो हमें काफ़ी carefull रहने की जरूरत होती है।


घर पर कैसे करें कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल। Premature baby care in hindi


Room treatment


  1. पहले तो जब हम अपने शिशु को घर पर लाते है तब उसे अच्छे से साफ-सुत्रे कमरे में ही रखना चाहिए। जहां हवा अच्छे से आती जाती हो।
  2. जिस बेड पर हमारा शिशु रह रहा है। उस बेड का disinfection करना जरूरी है। ताकि किसी भी वजह कोई infection ना हों। जो कपड़े हम बच्चे को पहना रहे है। वह रोज अच्छे से धोकर और अच्छी तरह से सुखाकर ही हमें पहनाने है।
  3. जहां बच्चा है उस room में जहा तक हो सकें out side visitors कम से कम आए ऐसा प्रोवीजन रखें। जब मां और बच्चा घर पर आते है तब काफ़ी relative और पड़ोसी बच्चे को देखने आते है। और बच्चे को टच करते है। उनके साथ harmful bacteriaes आ सकते है। आपका बच्चा अभी भी sensetive है। जिस की वजह से infection हो सकता है। इसलिए इस बात को ध्यान में रखना बहुत ज्यादा जरूरी है।
  4. बच्चे को ज्यादा से ज्यादा कमरे में ही ristrict रखें। उस ज्यादा बाहर बा घुमाएं। बाहर के atmosphere में बैक्टीरिया हो सकते है जिसे infection होने के chanches होते है।
  5. और एक महत्वपूर्ण बात यह है कि घर के सदस्य जैसे बच्चे के munmy pappa और दादा दादी , नाना-नानी, uncle या anty वगैरे सब hand wash किए बगैर बच्चे को handle नहीं करना है। और बच्चे को कम से कम handle करना है।


अगर घर में किसी भी सदस्य को सर्दी खांसी या किसी तरह का viral infection है तो कोशिश करें की वह बच्चे की संपर्क में ना आए।


Premature या कमज़ोर बच्चे खुद का temprature maintain नहीं के पाते। इसलिए जिस रूम में आपका बच्चा रह रहा है उस रूम का temprature जरूर maintain करें। रूम का temprature 20° से 25° C का होना चाहिए।


Feeding treatment


बच्चे के feeding पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। ध्यान रहें बच्चे को मां का ही दूध पिलाना है। मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वेतुपरी है। मां का दूध बच्चे के लिए अमृत समान है। बच्चे की सबसे ज्यादा immunity मां के दूध से ही बढ़ती है। इसलिए मां का दूध ही बच्चे को पिलाना चाहिए। अगर किसी कारण मां बच्चे को दूध नहीं पीला पा रही हो तो ही डॉक्टर्स की सलाह से formula feed देना चाहिए।


Feeding के बाद बच्चे को burping करना बहुत जरूरी होता है। जिसे हम डकार दिलाना भी बोलते है। जिस मे बच्चे को कंधे पर रख कर 2 से 3 मि. उसकी पीठ को थपथपाना होता है। Proper तरीक़े से burping कराना जरूरी होता है।

बच्चे की bathing का भी ध्यान हमें रखना होता है। वैसे तो जब तक बच्चे की नाल नहीं गिरती तब तक बच्चे की bathing avoid करनी चाहिए। इस दौरान बच्चे की week में एक या दो बार बच्चे की स्पांजिंग करनी चाहिए। Bathing करते वक्त हमें ध्यान रखना है खासकर सर्दियों के मौसम में कि बच्चे का temprature ड्रॉप नहीं होना चाहिए।



डॉक्टर्स को तुरंत दिखाएं।


( कमजोर नवजात शिशु की पहचान और देखभाल Premature baby care in hindi के इस article में हम आपको सुझाव देते है कि यदि नीचे दी गई समस्या आप अपने शिशु में पाते है तो तुरंत डॉक्टर्स को दिखाएं)


अगर आप के बच्चे के अन्दर आपको नीलापन दिखाई दे रहा है। या बच्चा तेज गति से सांस ले रहा है। या बच्चे को सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है। रुक रुक के बच्चा सांस ले रहा है तब हमें बच्चे को हॉस्पिटल जरूर लेके जाना है। इस में कोई भी ढिलाई नहीं बरतनी है।


बच्चे का रोना बढ़ गया है। या कई घण्टों से बच्चा रों रहा है । Proper तरीकों से feed नहीं कर पा रहा है। या बच्चे के पेट के अंदर बहुत ज्यादा आफ़रा आ गया है। बच्चा बहुत ज्यादा उल्टियां करने लग गया है। या अपनी आंखे उप्पर कर रहा है। या बच्चे की activity एकदम धीमी हो गई है। अगर इन में से कोई भी चीज आप बच्चे में पाते है तो आपको तुरंत डॉक्टर्स के पास बिना देरी किए जाना चाहिए।


Premature baby की केयर करने के किए देखभाल करने के लिए parents को hard working की आवश्यकता होती है। तो यह बात बहुत important है कि खुद parents अपने health का ध्यान रखें। समय पर खाना और पूरी नींद लें। और सबसे जरूरी है कि parents को mentally और physically strong रहना होगा। तभी वह अपने बच्चे की अच्छी तरह देखभाल कर सकेंगे।


यह भी पढ़े :- baby malish tips in hindi (बेबी मालिश टिप्स इन हिंदी)


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premature baby care in hindi
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