बच्चों में अस्थमा, लक्षण और घरेलू उपचार | How to treat asthma in babies

बच्चों में अस्थमा, लक्षण और घरेलू उपचार | How to treat asthma in babies

 

बच्चों में अस्थमा, लक्षण और घरेलू उपचार | How to treat asthma in babies

बच्चों में अस्थमा, लक्षण और घरेलू उपचार
बच्चों में अस्थमा, लक्षण और घरेलू उपचार

बच्चों में अस्थमा, लक्षण और घरेलू उपचार | How to treat asthma in babies. वैसे तो हम जानते ही है की, अस्थमा एक श्वास की सबसे आम बीमारियों में से एक है और यह बीमारी बड़ों के साथ-साथ शिशुओं व बच्चों में भी देखि जा सकती है। लेकिन, उचित देखभाल, डॉक्टर्स की सलाह और उपचार से हम अस्थमा जैसी बीमारी का इलाज कर सकते हैं।

 जब एक शिशु नई दुनिया में कदम रखता है। तो उसकी प्रतिकार शक्ति किसी वयस्क से कम होती है। जिस के कारण एक  baby  अनेकों असामान्यताओं से गुजरता है। कई तरह से मौसमी बदलाव को एक दम से स्वीकार नही कर सकता। इस लिए कई तरह की viral infection, बैक्टीरियल इन्फेक्शन से परेशानी में आता है। जो किसी भी माता-पिता के लिए परेशानी का कारण होता है।  


क्या आपने कभी चेक किया कि बच्चे को सांस लेने में कोई दिक्कत तो नहीं है? अगर किसी बच्चे को घरघराहट, खांसी या सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो यह अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।


आप जानते है की, शिशुओं में बड़े बच्चों और वयस्कों की तुलना में श्वसन-नलिकाएं छोटी होती हैं। जिस से वायरल संक्रमण, बलगम या श्वास लेने में होनेवाली परेशानी हम शिशुओं में देख सकते हैं। इसलिए, 12 महीने से कम उम्र के शिशुओं में अस्थमा अत्यधिक मुश्किल का सामना करना है।

अस्थमा क्या है?

अस्थमा एक ऐसी सांस संबंधी समस्या है, जिसमें एयरवे (airways) याने श्वसन नलिका जो हवा को फेफड़े तक पहुंचाता और निकालता है, उसमें सूजन आ जाती है। इस कारण सांस लेने में तकलीफ और अन्य कई परेशानियां होने लगती है। बच्चों और यहां तक कि बड़ों में भी अस्थमा काफी आम समस्या हो चुकी है।

बच्चों में अस्थमा कितना आम है?

अस्थमा 10 से 12 प्रतिशत बच्चों को प्रभावित कर सकता है और यह आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं। आमतौर पर बच्चों को 5 वर्ष की आयु में अस्थमा होने की शुरुआत होती है। हालांकि, इसका निदान बाद में नहीं हो सकता है। अस्थमा बच्चों में एक क्रोनिक बीमारी का कारण बन चुका है।


क्या आपके बच्चे को अस्थमा है?

बच्चों में श्वसन दर

श्वसन दर एक मिनट की समय सीमा के भीतर एक व्यक्ति द्वारा ली गई सांसों की औसतन संख्या है। यदि उसमें कोई असामान्यता दिखाई देती है, तो बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाने की आवश्यकता होती है।  इस के लिए बच्चो के श्वसन दर  के बारें में जानना आप के लिए आवश्यक है। हम ने नीचे बच्चों के सामान्य श्वसन का table दिया है जिस से आप एक शिशु के सामान्य श्वसन दर को जान सकते है।


अनु.
क्र.
 बच्चों की आयु   बच्चों में श्वसन दर 
1. नवजात शिशु 30-60प्रति मिनट
2. 1-12 महीने 30-60 प्रति मिनट
3. 1-2 वर्ष 24-40 प्रति मिनट
4. 3-5वर्ष 22-34 प्रति मिनट
5. 6-12 वर्ष 18 -30 प्रति मिनट
6. 13-17 वर्ष 12-16 प्रति मिनट

बच्चों में अस्थमा के लक्षण

 शिशु के असामान्य श्वसन दर से हम शिशु के अस्थमा के बारे में जान सकते है ,इस के अलावा, अन्य लक्षण भी हैं, जो अस्थमा से पीड़ित शिशु की स्पष्टता कर सकते हैं। वे क्या हैं? यहां आपके अवलोकन के लिए उसी की एक सूची दी गई है।

बच्चों में अस्थमा के लक्षण


  • अगर बच्चे को खांसी-जुकाम के दौरान बार-बार खांसी हो रही हो।

  • यदि आप अपने बच्चे की सांसों में सीटी की आवाज देखते हैं।

  • अगर बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होती है। विशेष रूप से, यदि उसे सांस फूलने या भारी सांस लेने का सामना करना पड़ता है।

  • अगर बच्चे को सीने में जकड़न है।

  • अगर बच्चे को खाने या निगलने में परेशानी होती है।

  • यदि आप हल्के नीले रंग के नाखूनों को नोटिस करते हैं।

क्या कोई शिशु अस्थमा के साथ जन्म ले सकता है?


ऐसे कुछ लक्षण हैं जो यह बता सकते हैं कि बच्चे को अस्थमा है। एक सवाल यह भी उठता है कि क्या अस्थमा के साथ कोई बच्चा पैदा हो सकता है? तो हम भलीभांति यह समझ सकते है की सामान्य तौर पर कोई शिशु अस्थमा के साथ जन्म नही लेता लेकिन, यदि कोई बच्चा समय से पहले पैदा हुआ है, या मां को गर्भावस्था के दौरान कोई एलर्जी हो गई है, तो जन्म लेने वाले बच्चे को अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है।


साथ ही अगर गर्भावस्था के दौरान मां को धूम्रपान की आदत है या खुद अस्थमा से पीड़ित है तो इससे पैदा होने वाले बच्चे को अस्थमा हो सकता है। लेकिन क्या सांस लेने की समस्या के अलावा अस्थमा बच्चे के जीवन को प्रभावित करता है? आइए थोड़ा और गहरा करते हैं।

अस्थमा के प्रभाव

अस्थमा बच्चे के स्वास्थ्य और मानसिक विकास को प्रभावित करता है। हाँ ऐसा होता है। कल्पना कीजिए कि एक बच्चा हँसी की सामान्य खुराक के बाद अचानक से लगातार खाँस रहा है। साधारण हँसी जो आमतौर पर खुशी का स्रोत होती है, अस्थमा के बच्चे के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। यह स्पष्ट हो जाता है कि अस्थमा फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन यह प्रतिरक्षा प्रणाली और तंत्रिका तंत्र पर भी भारी पड़ता है।


अच्छी सांस लेने की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत नहीं होने देती है। यह निश्चित रूप से एक बच्चे के दैनिक जीवन को प्रभावित करता है जब उसके लिए कोई गतिविधि सांस लेने की समस्या के कारण एक चुनौती के रूप में सामने आती है। और एक तरह से बच्चे के आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाती है। लेकिन कोई अपने बच्चे को अपने जीवन के शुरुआती वर्षों में इस तरह की आलोचना का सामना करते नहीं देख सकता। और उस स्थिति में, अस्थमा से लड़ने की जरूरत है। पर कैसे? आइए उपचार, इलाज और कुछ प्राकृतिक घरेलू उपचारों की जाँच करें।

घरेलू नुस्खों से अस्थमा का इलाज

अस्थमा एक बच्चे के विकास के लिए एक झटके के रूप में कार्य करता है और बच्चे के लिए ऐसी चिकित्सा स्थितियों का सामना करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि बच्चे को अस्थमा का निदान किया जाता है तो चिकित्सक को देखने की सलाह दी जाती है। लेकिन बताई गई दवाओं के साथ निम्नलिखित घरेलू उपाय भी इस विकार को शांत कर सकते हैं। ये कुछ प्राकृतिक घरेलू उपचार हैं जिन्हें अस्थमा के बच्चे की राहत के लिए आजमाना चाहिए।


लहसुन- लहसुन अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के साथ दमा की स्थिति में राहत दिला सकता है।


अदरक- छाती में जकड़न और जकड़न के लिए अदरक फिर से फायदेमंद होता है। 1 चम्मच पानी के साथ 1 ग्राम अदरक का का रस लेने से अस्थमा और श्वास सम्बन्धी रोगों का इलाज आसान है।


हल्दी-  हल्दी में एंटी-एलर्जी गुण होते हैं और यह अस्थमा से पीड़ित बच्चों के लिए सुरक्षित मानी जाती है।सालों से हल्दी का इस्तेमाल एक कारगर आयुर्वेदिक दवा के रूप में किया जा रहा है। शरीर के लिए हल्दी-दूध के फायदे लगभग हर किसी को पता हैं। अस्थमा में हल्दी-दूध का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।


शहद - अस्थमा से बचाव करने के लिए शहद एक गुणकारी उपाय हो सकता है। यह तो सभी जानते हैं कि शहद स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है और दमा के मरीज को अगर शहद सुंघाया जाए, तो यह उनके लिए लाभकारी हो सकता है। शहद सूजन और अस्थमा के लक्षण को कम करने में मदद कर सकता है शहद गले में जलन को शांत करता है। दमा के बच्चे राहत के लिए शहद और गर्म पानी के मिश्रण का सेवन कर सकते हैं।

बच्चों में अस्थमा के लक्षणों को कम करने के सुझाव


एक माता-पिता के रूप में आपको हमेशा एक चिंता रहती होगी कि अस्थमा के प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है या आप बच्चों में अस्थमा के लक्षणों को कम करने के लिए क्या उपाय अपना सकती हैं। चिंता न करें, यहाँ आपकी समस्या के कुछ संभावित समाधान हैं:

  • बच्चे को अस्थमा का प्रभाव छोड़ने वाली चीजों से दूर रखें, जैसे धुंआ, धूल, गंदगी और इत्यादि।

  • बच्चे के कमरे को साफ और धूल रहित रखें।

  • बच्चे को ऐसे खिलौने दें, जिन्हें आप नियमित रूप से धो सकें और उन्हें सप्ताह में एक बार जरूर धोएं।

  • अपने बच्चे को पालतू जानवरों से दूर रखें।

  • आवश्यक होने पर एयर प्यूरीफायर और ह्यूमिडिफायर का प्रयोग करें।

  • बच्चे को ऐसा भोजन न दें जिससे एलर्जी हो सकती है।


ऊपर दिए हुए सभी सुझाव आपके बच्चे की मदद कर सकते हैं। हालांकि यदि आप अपने बच्चे में अस्थमा के लक्षण देखते हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए

अगर आपको नीचे बताए गए लक्षण अपने बच्चे में दिखें, तो बिना देर करते हुए डॉक्टर से संपर्क करें।

  • बच्चे को सांस लेने में तकलीफ।

  • चेहरे और होंठ का रंग बदलना या नीला पड़ना।

  • लगातार पसीना आना।

  • अगर आपका बच्चा इनहेलर या तुरंत असर करने वाली दवाइयों पर प्रतिक्रिया न दे पा रहा हो।

  • दवाइयां असर न कर रही हों।

  • अगर आपका बच्चा ठीक से कुछ बोल नहीं पा रहा हो।

  • अगर आपके बच्चे को सांस लेते वक्त लगातार घरघराहट हो रही हो।

संबोधन 

दोस्तों,  इस आर्टिकल में आपको बच्चों में अस्थमा के लक्षण और उन्हें रोकने की सभी जरुरी जानकारी दी गयी है, जो आप के शिशु के लिए और उसे अस्थमा जैसी बिमारियों । अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप ऊपर बताई गई जानकारी पर कितना ध्यान देते हैं। अपने बच्चे को अस्थमा होने से या उसके जोखिम को कम करने के लिए पहले से ही सावधानियां बरतें, क्योंकि वक्त रहते ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर यह आपके शिशु के लिए मुसीबत बन सकता है।


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बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं ।

बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं
बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं



आज कल ज्यादा तर सभी मां बाप की शिकायत यही होती है। की हमारे बच्चे का वजन कम है? बच्चा ठीक से खा नहीं रहा है। और हम अपने बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं ? उसके लिए हमें क्या करना चाहिए? कैसे हम अपने बच्चे का वजन बढ़ा सकते है? ऐसे कई सवाल ज्यादा तर मां बाप के मन में आते है।आज हम बच्चे के weight gain के बारे में जानेंगे।


पहले तो हमे यह देखना जरूरी है। की हमारे बच्चे के वजन न बढने के क्या कारण हो सकते है? उसमे क्या चीजे है जो हम आसानी से ठीक कर सकते हैं? उसके लिए हमें क्या क्या सावधानियां रखनी चाहिए? और कब इसके बारे में हमें डॉक्टर्स से संपर्क करना चाहिए? और बच्चे के खुराक के अलावा भी और कौन से ऐसे कारणों हमें ध्यान रखना चाहिए ? यह सब हम इस आर्टिकल में discuss करेंगे।

बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं ? क्या है तरीक़े।


बच्चे के वजन बढ़ाने के तरीकों को जान ने से पहले हमें यह देखना होगा की उम्र के हिसाब से उसका weight कितना है। क्या उम्र के हिसाब से हमारे बच्चे का weight normal है? अगर नॉर्मल है तो उसकी उम्र के हिसाब से नॉर्मल weight कितना होता है? इसके लिए हमने बच्चे की उम्र और उसके हिसाब से उसका normal weight का chart दिया है। उसकी मदत से आप अपने बच्चे के उम्र के हिसाब से उसका normal weight जान सकते हैं।


अनु.
क्र.
उम्र (Age) वजन (weight)
१.newborn 3.2kg to 3.4kg
२. 3 to 5 month 5.4kg to 6 kg
३. 6 to 8 month 7.2 kg to 7.8 kg
4. 9 to 11 month 8.6 kg to 9.2kg
5. 1 year 9.5 kg to 10.2kg
6. 2 years 11.8kg to 12.8kg
7. 3 years 14.1kg to 14.8kg
8. 4 years 16kg to 16.8kg
9. 5 years 17.7kg to 18.7kg

बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं


दूसरी चीज यह हो सकती है कि, आप के बच्चे का weight पहले अच्छा gain हो रहा था। और अभी अभी कुछ एक महीनों में उसका weight बढ़ नहीं पा रहा है। यह भी एक ध्यान देने वाली बात होती है।


इसमें क्या होता है जो बच्चे के मां बाप होते है। उन्हे सही से यह पता ही नहीं होता की उनके बच्चे को वह सही से खुराक दे रहे हैं कि नहीं? बच्चे के age के हिसाब से उस कितनी खुराक मिलनी चाहिए ? यह बातें मां बाप के लिए जानना बेहद जरूरी होती है।

0 से 6 महीने के बच्चे के लिए। बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं


0 से 6 महीने का जो period होता है। उस period में बच्चा पूरी तरह से मां के दूध पर ही depend होता है। इस period में बच्चे को जो भी खुराक मिल रही है वह अपने मां के दूध से ही मिल रही है। इसलिए हमें मां की खुराक पर ही ध्यान देने की जरूरत होती है। मां को इस बात का ध्यान रखना है की आप जो खुराक ले रहे हो वह आप अपने लिए और अपने बच्चे दोनों के लिए के रहे हो।


इसलिए आप खुद को डेढ़ गुना खुराक खाने की जरूरत है। जिस से आप के द्वारा बच्चे की खुराक पूरी हो सकें। इस से बच्चे की दूध की जो nutrition value है वह बढ़ेगी और बच्चे का वजन बढ़ेगा। जन्म के वक्त बच्चे का जितना वजन था उस से double 5 से 6 महीने होना चाहिए। उस बात का हमें ध्यान रखना है। और मां को यह भी ध्यान रखना है अपने बच्चे को 2 से 3 घंटे बाद feed करना है। जिस से बच्चे का पेट भर सके और वह अच्छी नींद लें सकें।


इस में ध्यान रखने वाली और एक बात यह की आप बच्चे को दिन में feed करा रहे हो वैसे ही रात में भी बच्चे को feed करनी ही चाहिए। दूध अगर बच्चे को अच्छे से मिलेगा तो यकीनन उसका वजन बढ़ेगा ही बढ़ेगा।


6 से 12 महीने के बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं


अब हम जानते है कि 6 से 12 महीने में बच्चे को दूध के अलावा हमें क्या क्या complimentary feeding देनी होती है। जिस से बच्चे को weight अच्छे से gain हो पाए।


6 महीने तक मां के दूध ही बच्चा पी रहा था। अब उसे जरूरत होती है ऊपर के खाने की । अब जानते है 6 माह के उपरांत बच्चे को ऊपर के खाने की कैसे शुरवात करनी है? बच्चे को क्या क्या देना चाहिए ? कितनी मात्रा में देना चाहिए? और खाने की मात्रा को किस तरह से बढ़ाना चाहिए?


सब से पहले बच्चे को ऊपरी खाने के लिए किस चीज़ से शुरवात करनी चाहिए? तो इसके लिए बेहतर रहता है कि बच्चे को गेंहू या चावल के शिरे से शुरवात करें। या दलिया या सुजी की खीर बनाकर भी आप बच्चे को खिला सकते हो। लेकीन उसमे मीठे की मात्रा कम रखनी चाहिए। शुरवात के 3 से 4 दिनों तक एक या दो चम्मच दीजिए। बाद में उसकी मात्रा बढ़ा दीजिए। 6 से 8 महीने तक आप आधी से एक कटोरी तक बढ़ा सकती है।


इसके अलावा rise की खीर, पोहे की खीर, पालक का साग, mash किया हुआ aaple , mash किया हुआ चीकू, mash किया हुआ केला भी आप दे सकते है। ध्यान रखें 6 से 8 महीने में जो भी खाना आप बच्चे को दे रहे हो वह अच्छे से mash किया हुआ होना चाहिए। आप को एक बात जरूर याद रखनी है। इस बीच में आप को बच्चे को मां का दूध पिलाना नहीं छोड़ना है क्यों कि वह अभी भी बच्चे के लिए बहुत जरूरी और आवश्यक है।


बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं । ध्यान रखने वाली बातें।


इस दौरान हमें कुछ बातों का ध्यान रखना है जैसे बच्चे का digestion ठीक हो रहा है या नहीं, बच्चा अच्छे से laterin कर रहा है कि नहीं, किसी चीज़ से allergy तो नहीं हो रही है?, ज्यादा उल्टियां तो नहीं कर रहा है? और खाने से उसे फंदा तो नहीं लग रहा है? इन सब बातों का हमें ध्यान रखना है।


8 से 10 महीने में आप बच्चे की खाने की मात्रा को बढ़ाए। इस दौरान आप मां का दूध कम कर के ऊपर का दूध दे सकते है।

10 से 12 month में हम बच्चे को थोडी solid चीजें बच्चे को से सकते है जैसे उबला हुआ eggs, पनीर या बिस्किट भी से सकते है।


1 साल के बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं


1 साल के ऊपर जब बच्चा हो जाता है तो उसके काफ़ी सारे दात आ जाते है। बच्चा चबा चबाकर खा सकता है। साथ ही बच्चे का energy lavel भी increase हो जाता है। सहारे से खड़ा होना , घुटनों पर चलना जैसी activity बच्चे की बढ़ जाती है। इसलिए उस की callery requirement भी बढ़ जाती है। आप को लगेगा कि आपका बच्चा एक दो महने पहले भी इतना खा रहा था अब थोड़ा बहुत बढ़ गया है लेकिन उसका weight gain नहीं हो पा रहा है।


तो उसका कारण यही है कि को वह खाना खा रहा है वह energy तो खेलने कूदने ने निकाल जाता है।इसलिए आपको उसके खाने पर ध्यान देना है। जिसे बच्चे की calleries बढ़े।


Callaries dence food आपको बच्चे को खिलाना है जिस से उसकी calleries बढ़ सके। जैसे 1 साल का बच्चा minimum 250ml खाना खाता है। मतलब एक कटोरी खाना बच्चा खाता ही खाता है। आपको क्या करना है कि उस खाने में घी या चीनी मिलाकर बच्चे के खिलाना है। या कभी eggs या vegitables मिलाकर खिलाए जिस से बच्चेके पर्याप्त मात्रा में callaries और fats मिल सके। हमें यही ध्यान देना है की हमें बच्चे की callaries को increase करना है। और उस से बच्चे का weight gain हो पाए।


1 साल के ऊपर के बच्चे को हम क्या क्या खिला सकते है जिस से उसे योग्य मात्रा में protien , fats मिले और उसकी callaries भी increase हो। आओ जानते है ऐसी कुछ चीजें जो हम 1 साल के ऊपर के बच्चे को से सकते है। जिसे उसका weight भी gain हो और बच्चे की भूख भी बढ़ सके।

Full cream milk

बच्चे का वजन अगर कम है तो बच्चे को full cream milk देना चाहिए। और यह सही माना जाता है। अगर बच्चा दूध पीने से मना करें तो आप उसे shake, smoothy या choclate पाउडर mix कर के भी दे सकते हैं।

Egges


अंडे protein से भरे होते है। जिसे बच्चे का weight अच्छे से gain होने में मदद मिलती है। अगर आपका बच्चा एक साल के ऊपर है तो आप बच्चे को full egg भी से सकती है।

Potato


आलू वजन बढ़ाने के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद होते है। यह carbohydrates और energy का काफ़ी अच्छा स्त्रोत माना जाता है। आप इसे बच्चे को आलू पनीर या चीज़ mash के रूप में भी खिला सकते है।

Sweet potato (शकरकंदी)


शकरकंदी potassium , vitamin A , B और C से युक्त होते है। जिस से वजन भी बढ़ता है। आप इसे दूध में mash के के बच्चे को खिला सकते है।

Nuts


सभी प्रकार के dryfoods विशेष कर nuts vitamin से भरपूर होते है। इनका पाउडर बनाकर दूध में बच्चे को पिलाया जा सकता है।

Banana


केला energy का बेहतरीन स्त्रोत होता है। दूध में mash कर बच्चे को देने से इस से बच्चे के वजन में काफ़ी वृद्धि होती है। 1 साल के उपरके बच्चे के लिए केले का shake भी एक अच्छा विकल्प है।

Daale (दाल)


दालों में protien की मात्रा सब से अधिक होती है। जो बच्चों का weight gain करने में काफी मददगार साबित होती है। बच्चों को दालों का पानी अवश्य पिलाना चाहिए।

Curd


Cream का दही भी weight बढ़ाने का काफी अच्छा विकल्प है। बाजार में मिलने वाला cream का दही बच्चों को खिलाने से बचना चाहिए। क्यों कि उस में ज्यादा मात्रा में शक्कर मिलाई जाती हैं। घर पर बनाया श्रीखंड दही बच्चों को दिया जा सकता है।

Paneer


बच्चे को नाश्ते में चीज़ पनीर का टुकड़ा आप दे सकते है। या पनीर की अलग अलग recipe बनाकर आप बच्चे को खिला सकती है।

Ragi


घी और गुड़ के साथ रागी का प्रयोग बच्चे का वजन बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है।

Butter


अगर आप अपने बच्चे को रोटी देती है तो आप रोटी को घी लगाकर बच्चे को से सकती हो।

Peanut butter


मूंगफली का घी भी वजन बढ़ाने का एक अच्छा स्त्रोत है। अगर आपका बच्चा 1 साल के ऊपर है तो आप बच्चे को रोज ब्रेड पर एक चम्मच peanut butter लगाकर दे सकती है।

Green vegetables


बच्चों को हरी सब्जियां खिलाने की आदत जरूर डालनी चाहिए। हरी सब्जियों में भरपूर पोषण के साथ पाचन तंत्र को भी साफ रखने की क्षमता होती है।

Zinc


बच्चों के विकास के लिए zinc एक बेहद जरूरी पोषक तत्व होता है। Zinc के कमी के कारण बच्चों को भूख कम लगती है। कोशिश करे के बच्चों को zinc से भरपूर भोजन दे। जैसे तरबूज के बीज, मूंगफली, बीन्स, पालक, मशरूम आदि जिस में zinc की मात्रा अधिक होती है।

Protein and carbohydrates


वजन बढ़ाने के लिए protein का सेवन जरूरी है। इसलिए अपने आहार में chicken, मछली, अंडा, दूध, बादाम और मूंगफली आदि को शामिल करें। Carbohydrates भी वजन बढ़ाने के लिए मददगार साबित होता है। जैसे पास्ता, brown rise, ओटमील आदि।

Milk and honey


शहद हमेशा वजन को संतुलित करने का काम करता है। यदि आप का वजन ज्यादा है तो शहद उसे कम करता है। और यदि आपका वजन कम है तो आपका वजन बढ़ाने में भी शहद काफी मददगार साबित होता है। रोज सोने के पहले दूध में शहद लेने से आप के बच्चे का वजन बढ़ सकता है।

Olive oil (जैतून का तेल)


जैतून के तेल में good fats होता है। अगर आप बच्चे के लिए भोजन बना रही है तो उस में जैतून के तेल का प्रयोग ज्यादा करें।

Avocado


यह एक फल है जिस में good fats होता है। जो वजन बढ़ाने के लिए काफी अच्छा माना जाता है। दूध में या फिर साधे तरीक़े से भी इसे अच्छे से mash कर के आप बच्चे को से सकते है।

Soup , खीर और हलवा


सब्जियों का टोमैटो का सूप बच्चे के लिए काफ़ी फायदेमंद होता है। इस के साथ सुजी का हलवा भी पौष्टिक और वजन बढ़ाने में मददगार होता है।

Chiku


चीकू वजन बढ़ाने के लिए अच्छा माना जाता है। आप बच्चे को चीकू shake भी से सकते है।


यह है कुछ आहार जो हम बच्चे को दे सकते है। जो बच्चे को weight gain करने में काफी मददगार साबित होते हैं।


लेकीन फिर भी आप को लग रहा है कि बच्चे का weight नहीं बढ़ रहा है। और उसके साथ बच्चा और भी problems को face कर रहा है। जैसे काफी समय बच्चा बीमार रह रहा है, या उसे हमेशा हमेशा fever रहता है, या उस कुछ भी खाने से loose motion हो जाता है, या ज्यादा चिड़चिड़ा हो गया है, या ऐसे कई कारण हो सकते है। तो हमें ध्यान देना होगा शायद बच्चे के अंदर कोई ऐसी cronic बीमारी चल रही हो या कोई ऐसा कारण हो जो हम नहीं पकड़ पा रहे हो कि बच्चा ठीक से खा रहा है फिर भी वजन नहीं बढ़ रहा है?


तो ऐसे समय हमें अपने डॉक्टर्स के पास जाकर बच्चे का checkup जरूर करना चाहिए। या अपने डॉक्टर्स की सलाह जरूर लेनी चाहिए।


बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं
बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं

छोटे बच्चों के लिए हिंग कितना है फायदेमंद?

छोटे बच्चों के लिए हिंग कितना है फायदेमंद?


छोटे बच्चों के लिए हिंग कितना है फायदेमंद?

छोटे बच्चों के लिए हिंग
छोटे बच्चों के लिए हिंग

हिंग भारतीय खाद्य पदार्थों में सब से ज्यादा औषधीय तत्व पाए जानेवाला और सब से अधिक गुणकारी पदार्थ है। खासकर नवजात शिशु और छोटे बच्चों के लिए हिंग कई तरह से काम करता है। इस आर्टिकल में हम छोटे बच्चों के लिए हिंग के लाभों को जानेंगे। और छोटे बच्चों के परेशानियों में हिंग कैसे मदद कर सकता है यह भी जानेंगे।

Ferulla एक तरह का हर्बल पौधा है जिस से हिंग तैयार होता है। जिस में कई गुना एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल तत्व पायें जाते है। जिस का प्रयोग कई सारी हर्बल दवाइयों तथा हर्बल प्रोडक्ट्स में किया जाता है। जो कई तरह की पेट तथा आँतों की समस्या के लिए एक रामबाण उपाय साबित होती है।

छोटे बच्चों के लिए हिंग


नवजात शिशु तथा छोटे बच्चों के लिए हिंग कई तरह से लाभकारी है। बच्चों के पेटदर्द में हिंग का इस्तेमाल एक बेहतरीन और सब से असरदार घरेलू उपचार साबित होता है। साथ ही छोटे बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बना ने के लिए भी हिंग एक महत्वपूर्ण पदार्थ साबित होता है। बच्चोमें उठने वाला दांत क दर्द और मुख दुर्गंधी जैसे समस्याओं में भी हिंग एक असरदार औषधि के रूप में काम करती है। हिंग से बच्चों का पाचनतंत्र भी ठीक करता है जिस से बच्चों का पेट साफ़ रहने में काफी मदद होती है। साथ ही बच्चों की भूक बढाने का कार्य करता है।

ऐसे बहुउपयोगी हिंग को हमें बच्चो को कैसे देना है यह जानना भी हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। सब से पहले आप को एक बात को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए की नवजात शिशु से लेकर शिशु के 10 माह की आयु तक के छोटे बच्चों के लिए हिंग का प्रयोग खाने में ना करें। शिशुओं में अविकसित इम्युनिटी सिस्टम होने के कारण शिशुओं को हिंग खिलाने से उनके इम्युनिटी सिस्टम पर काफी बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए नवजात शिशु से लेकर 10 माह की उम्र तक के छोटे बच्चों के लिए हिंग की पेस्ट कर के ही शिशु के शरीर पर लगायें। इस लिए घर के बड़े-बुजुर्ग भी आप को शिशु के 10 माह के उपरांत ही शिशु को हिंग खिलाने की सलाह देते होंगे।

शिशु के उम्र के 10-11 महीनों के बाद आप शिशु को हिंग खिला सकते है। तब तक शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली ( immunity system) काफी मजबूत हो जाती है। और हिंग से और बढती है।

छोटे बच्चों में पेटदर्द एक आम समस्या


छोटे बच्चों में पेटदर्द एक आम समस्या होती है। क्यों की शिशु के शरीर का पूर्ण विकास अभी हुआ नही है। और ऐसे में पेट की अन्तालियों में एठन और दर्द उठता है। डॉक्टर्स का कहना है की जब एक शिशु स्तनपान करता है तब उस feeding के साथ साथ शिशु के शरीर के भीतर हवा भी जाती है। अगर शिशु को दूध पिलाने के बाद अच्छे से डकार नही दिलाई तो हवा आँतों में पहुँच कर समस्या उत्पन्न करती है जो बच्चे के पेटदर्द का कारण होती है। जिस से शिशु काफी रोने लगता है। और अक्सर माता-पिता अपने शिशु का रोना देख काफी परेशान हो जाते है। खास कर एक माँ अपने बच्चे का रोना बर्दाश्त नही कर पाती।

ऐसे में आप के घरके किचन में मौजूद हिंग आप के शिशु के पेटदर्द को आसानी से ठीक कर सकता है। और आप की परेशानी को जल्द ही समाप्त कर सकता है।

छोटे बच्चों तथा नवजात शिशुओं को हिंग कैसे दें?

  • यदि आप के नवजात शिशु को जोरों से पेटदर्द हो रहा है और आप का शिशु दर्द से काफी रो रहा है औ आप बहुत परेशान है तो आप को परेशान होने की बिलकुल जरूरत नही है। बस आप को आधा चम्मच हिंग लेकर उसे थोड़े गुनगुने पानी में मिलाना है। और उस की अच्छे से पेस्ट बना लेनी है। यदि आप के पास मस्टर्ड आयल या ओलिव आयल मौजूद है तो आप उसे भी हिंग की पेस्ट बनाने के लिए लें सकती है।
  • अच्छी रथ से पेस्ट बना लेनर के बाद आप को यह पेस्ट अपने शिशु के पेट पर clockwise डायरेक्शन में हथेली को घुमा करअच्छे से लगानी है लेकिन ध्यान रहे आप के शिशु के नाभि की जगह आप को इस पेस्ट को नही लगाना है।
  • इस के लिए आप शिशु के नाभि की जगह मुलायम रुई से ढंक कर नाभि के चरों तरफ हिंग की पेस्ट लगा देनी है। और इसे अच्छे से सूखने के लिए छोड़ दें।
  • हिंग की पेस्ट लगाने के तुरंत बाद ही पेटदर्द कम नही होगा इस के लिए आप को थोडा इन्तजार करना पड़ता है। जो अमूमन कुछ देर बाद कम होकर ठीक हो जाता है।
  • पेस्ट के सुख जाने के बाद आप शिशु को पीठ के बल कंधे पर उठाकर उसे डकार देने की अवश्य कोशिश करें। जिस से शिशु के शरीरमें मौजूद अतिरिक्त हवा बहर की और निकल जायेगी।
  • फिर कुछ देर बाद आप शिशु के शरीर पर लगी सुखी हिंग की पेस्ट को अच्छे मुलायम कपडें को थोडा गीला कर पोंछ लें।
  • ऐसे ही अगर आप का शिशु सर्दी-खांसी से परेशान है तो आप हिंग की पेस्ट शिशु के छाती पर लगा सकती है। जो सूखने के बाद तुरंत कार्य करती है।

छोटे बच्चों के लिए हिंग से जुड़ें कुछ सवाल


छोटे बच्चे का पेट फूल जाए तो क्या करना चाहिए?

जवाब :- अगर छोटे बच्चे का पेट फुल रहा है या पेट काफी दर्द कर रहा है जिस से बच्चा काफी रो रहा है .तो ऐसे में हमें घी, जैतून का तेल या सरसों के तेल में ( जो भी आसानी से उपलब्ध हो) हिंग को मिलकर उसका गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लेना चाहिए। यह तीनों चीजें ना मिलने पर गुनगुने पानी में भी मिलाकर आप हिंग की पेस्ट तैयार कर सकते है। पेस्ट तैयार हो जाने के बाद आप अपने शिशु के नाभि केंद्र को मुलायम रुई से अच्छे से ढक लें और नाभि की चारों ओर clockwise हथेली घुमा कर हिंग के पेस्ट को अच्छे से लगा लें। हिंग की पेस्ट के सूखने के बाद शिशु की गैस अच्छे से पास हो जाती है जिस से उस का पेटदर्द भी कम हो जाता है।

हींग का पेस्ट कैसे बनाएं?

जवाब :- आधा चम्मच हिंग लेकर उसे गुनगुने पानी में मिलाएं या आप इसे जैतून के तेल, सरसों के तेल अथवा घी में भी मिला सकते है। अच्छे से मिलाने क बाद आप के सामने हिंग का गाढ़ा पेस्ट तैयार हो जायेगा।

क्या छोटे बच्चों को हिंग खिलानी चाहिए?

जवाब :- जीं हाँ, आप छोटे बच्चे को हिंग खिला सकते हो, बशर्ते आप का बच्चा 10 माह के ऊपर की आयु का हों। नवजात शिशु तथा 8 माह के निचे बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम अपरिपक्व होती है। लेकिन आप 10 माह के ऊपर के बच्चों को आहार में चुटकीभर हिंग डालकर खिला सकते हो। जिस से हिंग में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण बच्चे के शरीर में पाचन तंत्र को ठीक भी करता है और साथ ही अन्तालियों को साफ़ कर पाचनतंत्र के अवरोधों को भी हटाता है जिस से बच्चे की भूख भी बढती है।

अगर हिंग की पेस्ट लगाने के बावजूद आप के शिशु के पेटदर्द में आराम नही हो रहा है तो शायद शिशु के पेटदर्द का कई अन्य गंभीर कारण हो सकता है। ऐसे में आप को अपने फॅमिली डॉक्टर्स को सूचित करना चाहिए या आप किसी नजदीकी बालरोगतज्ञ से भी संपर्क कर सकते है।


विश्लेषण


हिंग हमारे लिए प्रकृति का एक वरदान है जो छोटे बच्चों के पेटदर्द, खांसी, पोटशुलकी,दांत की समस्या, और अन्य कई बिमारियों में चमत्कारिक तौर पर फायदेमंद साबित होते आया है। खास कर छोटे बच्चों के लिए हिंग काफी फायदेमंद साबित होते आया है। यह एक घरेलु उपचार पद्धति है जो अप के शिशु को पेटदर्द की पीड़ा से आसानी से छुटकारा दिला सकती है।h

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छोटे बच्चों के लिए हिंग
छोटे बच्चों के लिए हिंग

newborn baby ko sardi jukam in hindi।

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क्या आपके घर मे क्या आप भी परेशान है अपने नवजात शिशु की सर्दी जुकाम से (newborn baby ko sardi jukam) तो जरूर पढ़िए हमारा यह article।

सदियों से चला आ रहा है यह myth।

जो हाल ही में मां बनी है , जिस ने अभी अभी शिशु को जन्म दिया है। उन्होंने एक बात ऐसी सुनी होगी अपने घर के बड़े बुजुर्गों से, या अपने relative से , या अपने friend circle से जिस से उनको कभी कभी gulty भी फील होता होगा।

newborn baby ko sardi jukam in hindi
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एक ऐसा मिथ जो सदियों से नवजात बेबी के जन्म के साथ बोलना शुरू हो जाता है। ” मां को ठंडी चीजें नहीं खानी चाहिए, बच्चे को जुकाम हो जायेगा।” या “मां को ठंडे पानी से नहीं नहाना चाहिए बच्चे को सर्दी या जुकाम हो जायेगा।” ऐसे कई बातें आप में से ज्यादातर महिलाओं ने अपने pregnency के दौरान जरूर सुनी होगी। जिस से कई बार महिलाओं को खुद के प्रती gulty feel होता है।

लेकीन यह बात कभी scientifically prove नहीं हो पाई है कि newborn baby ko sardi jukam का reason मां होती है। इसका scientific reason यह है की Pregnency के दौरान एक मां के शरीर से काफ़ी blood loss हुआ होता है। इसलिए उसके शरीर को गर्मी की जरूरत होती है। यदि वह कोई ठंडी चीज़ खाती है या ठंडे पानी से नहाती है तो chances होते की उसको सर्दी या जुकाम हो जायेगा।


Newborn baby ko sardi jukam मां के trough हो सकता है।

एक शिशु अपने मां के है संपर्क में ज्यादा रहता है जिस के कारण मां की सर्दी जुकाम से infected हो सकता है। लेकीन “मां के कुछ ठंडे खाने से या ठंडे पानी से नहाने से बच्चे को सर्दी जुकाम हो जायेगा यह एक myth है।” लेकीन आपको यह जरूर खयाल रखना है कि आप को सर्दी या जुकाम ना हो।

नवजात शिशु जुकाम के घरेलू उपाय।

मौसम के बदलने को सबसे ज्यादा असर नवजात शिशुओं पर होता है। क्यों कि उनकी immunity काफ़ी कमजोर week होती है इसलिए बदलते मौसम में बच्चों का शरीर जल्दी adjust नहीं हो पाता इसलिए सर्दी जुकाम खासी कफ जैसी समस्याओं से बच्चे घिर जाते है। किसी किसी बच्चे के cheast में कफ जम जाने के कारण निमोनिया भी हो सकता है।

वैसे तो Newborn baby ko sardi jukam की समस्या आम होती है। आपको यह समझना होगा कि 0 से 12 month तक बच्चे को 8 से 10 बार सर्दी जुकाम होना यह आम बात है। लेकीन यह समस्या मां और बच्चे दोनों को काफ़ी परेशान करती है। पहले आप को यह समझना होगा कि वह ऐसे कौन से reason है जी से बच्चे को सर्दी जुखाम की समस्या होती है। आओ जानते है ऐसे reason जिस से बच्चे को सर्दी जुकाम वाली समस्याओं से जूझना पड़ता है।

Newborn baby ko sardi jukam के यह होते है reason।

  • किसी तरह बच्चे का गिला रहना।
  • किसी viral infected व्यक्ति के contact में आने से।
  • Second hand smoke यह भी एक प्रमुख reason हैं।
  • मौसम के बदलाव के कारण।

1. किसी तरह बच्चे का गिला रहना।

यह एक ऐसा reason है जिस को आमतौर पर सभी parents ignore कर देते है। या उस पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। वह ये है कि बच्चा किसी भी reason से थोड़ा गीला रह जाएं। तो बच्चे को सर्दी होने का chance रहता है। जैसे यदि हमने बच्चे को कोई cotton की napi पहनाई है जो काफी डरसे गीली हो गई है। इस से क्या होगा कि गीली napi बच्चे के body temprature को कम करती है। जिस से Newborn baby ko sardi jukam होने के chances होते है।

2. किसी viral infected व्यक्ति के contact में आने से।

दूसरा और महत्वपूर्ण reason है कि घर के किसी सदस्यों से भी बच्चे को infection होता है। जैसे घर में किसी व्यक्ति को सर्दी जुकाम है या किसी को viral infection है और वह बच्चे के संपर्क में आया है तो इस वजह से भी Newborn baby ko sardi jukam हो सकता है।

3. Second hand smoke यह भी एक प्रमुख reason हैं।

यदि आप के घर में कोई smoke करता है। और वह smoke कर के आकर यदि बच्चे को उठाता है या गोदी में लेता है तो उसके शरीर पर जो smoke particles होते है वह बच्चे को infect कर सकते है।

4. मौसम के बदलाव के कारण

मौसम के बदलाव के कारण भी नवजात शिशुओं में सर्दी जुकाम की समस्या देखी जा सकती है। या बच्चा घर पर AC या COOLAR में रह रहा है। और फिर हम किसी relative के यहां जाते है। जहा का temprature थोड़ा ज्यादा होता है। इस temprature के disbalance से भी बच्चों को सर्दी जुकाम की परेशानी होती हैं

अपनी study में national institute of health ने यह माना है कि आमतौर पर साल में 6 से 10 बार बच्चे सर्दी और जुकाम से infected हो सकते है। जो कि normal category में आता है। कई बच्चों को harmful bacteria के वजह से सर्दी जुकाम हो सकता है जिसका antibiotics से इलाज हो सकता है। लेकीन नवजात शिशुओं डॉक्टर्स ज्यादा दवाइयां recommend नहीं करते। और डॉक्टर्स के पर्चे के बिना दवाई देना बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं होता। इसलिए हम घरेलू नुख्सों से बच्चे की सर्दी जुकाम का इलाज कर सकते है। जो काफ़ी इफेक्टिव भी पाया गया है।

घरेलू उपाय के 7 easy steps।

मां का दूध ही है सबसे बड़ी दवा :– नवजात शिशु से 6 माह के शिशु तक खाने पीने मे कुछ ना दे। मां के दूध में ही पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी होती है जो बच्चे की immunity को बढ़ाती है।

लहेसुन और अजवायन :– Newborn baby ko sardi jukam के लिए आप लहसुन और अजवायन को तवे पर सेंक लें। और इसे tait कपड़े में बांध कर इसकी पोटली बना लें। इस पोटली को शिशु के पास रख दे। जिस से इसकी महक से शिशु को बंद नाक और सांस लेने के तकलीफ़ से राहत मिलेगी। ध्यान रखे शिशु इसे मुंह में ना ले।

सरसों का तेल और लेहसुन:– सबसे पहले सरसों के तेल में लहसुन को कददूकस कर के या कुचल के गर्म कर लें। और ठंडा होने पन यह तेल शिशु के गले पर, छाती पर और शिशु के पैरों के तलवे पर लगाए। इस से नवजात शिशु का जुकाम और खासी ठीक होकर शिशु को राहत मिल सकती है। या इस से शिशु को मालिश कर सकते है।

तुलसी के पत्ते और आजवायन:– तुलसी के पत्ते तोड़कर उस अच्छी तरह से कुचलकर पिसे हुए अजवाइन के साथ पानी में डालकर उबाल लें। इस पानी को बच्चे के सीने पर लगाए। इस पानी की एक या डी बूंदे आप अपने शिशु को पिला भी सकती है।

तुलसी के पत्ते:– तुलसी के पत्तों के रस की एक दो बूंदे आधा चम्मच मां के दूध में मिलाकर बच्चे को देने से बच्चे का जुकाम और कफ ठीक होता है। यह काफी असरदार उपाय है।

शहद और अदरक:– Newborn baby ko sardi jukam है तो मां को शहद में अदरक के रस को मिलाकर खाना चाहिए। या फिर येष्टिमधू का सेवन करना चाहिए। मां यदि यह सेवन करेगी तो उसके कुछ तत्व मां के दूध के साथ बच्चे को भी मिलेंगे। जिस से उसकी खासी और जुकाम ठीक हो सकता है।

शहद और हल्दी:– पानी में हल्दी और थोड़ा शहद मिलाकर उसका लेप तैयार कर लें और ठंडा होने के बाद बच्चे के गर्दन और सीने पर लगाए। उस से भी बच्चे को सर्दी खांसी और जुकाम से काफ़ी आराम मिलता है।

सर्दी से परेशान शिशु का सर, हमेशा थोड़ा सा ऊंचा या तिरछा रखें। जिस से वह आसानी से सांस ले सकें।

अगर गर्मियों के दिन बच्चे को सर्दी और जुकाम हो जाए तो आप यह कारगर उपाय कर सकते हो। एक छोटे बाउल में पानी लें और उसमें थोड़ा ginger powder (सूखे अदरक का पाउडर) और थोड़ी दालचीनी डालकर पानी को उबाल लें। फिर पानी को ठंडा कर के उसमे cotton का कपड़ा डुबोएं। और उसकी पट्टी बनाकर शिशु के नाक पर रखें। इसे दिन में दो से तीन बार करें। इस से नवजात शिशु को सर्दी और जुकाम से काफी जल्दी राहत मिलती है।

यह भी पढ़े :– कैसे करे नवजात शिशु की देखभाल।

Newborn baby ko sardi jukam नवजात शिशु के बंद नाक खोलने के उपाय

नवजात शिशु की नाक बंद होनानवजात शिशु को सर्दी जुकाम से नाक बंद हो जाने के बाद काफी परेशानी होती है। बच्चा काफी रोता भी है। बच्चे को दूध पीना तकलीफ़ होती है इसलिए वह अच्छे से feeding नहीं कर पाता। और बच्चे को देख कर parents को भी परेशानी होती है। और बच्चे को हम कुछ दे भी नहीं सकते। इस के लिए कुछ आसान लेकिन कारगर उपायों हम आजमा सकते है।

बंद नक खोलने के लिए भांप देना है कारगर उपाय।

बाथरूम मे गरम पानी का नल खोलकर आप बच्चे को लेकर 10 से 15 मि बैठ जाइए। या फिर एक बर्तन में गर्म पानी कर cotton के कपड़े को उसमे डाल दे। फिर कपड़े को बर्तन के बाहर निकालकर उसे अच्छे से निचोड़ लें। और वह कपड़े थोड़ी देर बच्चे के नाक पर रखें। ध्यान रहे कि कपड़ा ज्यादा गर्म ना हो। जिस से बच्चे की skin hurt हो सकती है।इस से यह होगा की बच्चे के नक में को mucles जमा हो गए है वह थोड़े ढीले हो जाएंगे। और बच्चा आसानी से सांस के पाएगा।

बच्चों के nose में 2 से 3 बूंद सरसों का तेल (mustered oil) आप डाल सकते हो। यह काफ़ी पुराना तरीका है जो काफी effective भी है। जिसे बच्चे को जल्दी आराम मिलता है।

आप डॉक्टर्स के recumend से saline drop या nasal drop का भी इस्तेमाल कर सकते है। या फिर आप डॉक्टर्स के पास जाकर nebulizer का भी इस्तेमाल कर सकते है।

Newborn baby ko sardi jukam हो सकता है निमोनिया।

यह एक महत्वपूर्ण विषय है। जिसकी समाज में जागरूकता होना अनिवार्य भी है। निमोनिया से पूरी दुनिया में करोड़ों बच्चे infected होते है। और लगभग 10 से 11 लाख बच्चे जागरूकता ना होने के कारण निमोनिया से expaired हो जाते है। हमारे देश मे प्रती 3मि में लगभग 1 बच्चा निमोनिया का शिकार हो जाता है।

यह भी पढ़े :– कैसे करे premature baby की देखभाल।

बच्चों में क्या होते है निमोनिया (pneumonia) के लक्षण।

निमोनिया के लक्षण जानकर यदि समय पर इस पर इलाज होना अनिवार्य होता है। निमोनिया के लक्षणों की अनदेखी कर देना हमारे बच्चे के लिए काफ़ी हानिकारक हो सकता है।

छोटे बच्चों को अक्सर निमोनिया हो जाता है। ज्यादातर सर्दियों के मौसम में निमोनिया होने के chances बढ़ जाते है। Otherwise निमोनिया किसी भी मौसम में हो सकता है।

अक्सर लोग सोचते है कि बच्चों को सर्दी जुकाम को ही निमोनिया समझते है। यह सही नहीं है। लेकीन आमतौर पर सर्दी जुकाम से निमोनिया की शुरवात हो सकती है।

निमोनिया(Pneumonia) क्या है।Lungs में होनेवाले infection को निमोनिया कहते है। जिस मे lungs में सुजन आ जाती है। जिस से बच्चे को खासी और जुकाम होता है और सांस लेने में भी तकलीफ़ होती है।

Normally निमोनिया सर्दी बुखार होने के बाद होता है।ज्यादा तर निमोनिया bacterial, fungal और viruses के infection से होता है।बच्चों को निमोनिया होना एक normal सी बात हो गई है।लेकिन समय रहते इसका सही इलाज नहीं किया जाय तो बच्चे के लिए काफी dangerous हो सकता है।

निमोनिया (pneumonia) के लक्षण।

जब बच्चे को तेज बुखार हो, जब बच्चे के ज्यादा ठंड लग रही हो, जब बच्चे को खांसी आती हो, जब बच्चे को भूख ना लग रही हो, जब बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होती हो, और जब बच्चे का सर्दी, खांसी, जुकाम 5-6 दिनों में ठीक ना हुआ हो तो यह सारे लक्षण निमोनिया के होते है।

निमोनिया (pneumonia) का इलाज

अगर हम निमोनिया के इलाज के बात करें तो लक्षण दिखते ही हमें बच्चे को तुरंत डॉक्टर्स के पास ले जाना चाहिए। इसमें डॉक्टर पहले check करते है फिर blood test करने को कह सकते है।अगर बच्चे को bacteria के through निमोनिया हुआ है तो डॉक्टर्स बच्चे को antibiotics देते है जिस से बच्चा 2 या 3 week के अंदर ठीक हो जाता है। लेकीन viral से होने वाले निमोनिया को ठीक होने में थोड़ा time लगता है। जिस मे डॉक्टर्स जरूरत पड़ने पर nebulizing के लिए बोल सकते है। जिस मे neubulize कर के कफ को निकाला जाता है।

बच्चों को निमोनिया (pneumonia) से बचाने के लिए हम क्या क्या कर सकते है।

बच्चों को निमोनिया से बचने के लिए सब से जरूरी है कि हम बच्चे का टीकाकरण समय समय पर जरूर करवाएं। PCV, HIB, diptheria और काली खांसी के टीके बच्चे को जरूर लगवाए। यह टिके बच्चे को बीमारियों से बचाने के लिए काफी important होते है।

बच्चे को निमोनिया और दूसरी बीमारियों से बचाने के लिए बच्चे को six month तक breast feed ही करवाए। मां का दूध बच्चे को कई तरह के रोगों से लड़ने की क्षमता देता है। और बच्चे की immunity को बढ़ाता है।

जो लोग सर्दी खासी जुकाम से घिरे है। बच्चे को उनके पास कभी नहीं ले जाना चाहिए। बच्चे की immunity कम होती है इसलिए वह बहुत जल्दी infected हो सकते है।अगर बच्चे में निमोनिया के लक्षण पाए जाते है तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर्स के पास ले जाए।

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