नवजात शिशु को डायपर पहनाएं या नहीं। Important information about baby diapers

नवजात शिशु को डायपर पहनाएं या नहीं। Important information about baby diapers

नवजात शिशु को डायपर पहनाएं या नहीं।

नवजात शिशु को डायपर
 नवजात शिशु को डायपर


आजकल नवजात शिशु को डायपर पहनना एक आम बात ह गई है। बच्चों के बार बार बेड गीला करने के समस्या से आसानी से छुटकारा पाने के लिए आजकल लगभग हर parents अपने बच्चों को डायपर पहनाते है। लेकिन सभी को डायपर के बारे में सही से जानकारी नहीं होती। लेकिन आसान से लगनेवाली इस बात की कोई सही जानकारी लेना भी बहुत जरूरी है। अगर सही जानकारी के बिना आप अपने बच्चों के लिए डायपर पहनाती है तो वह चीज आप के बच्चों के लिए harmful भी हो सकती है।

नवजात शिशु के लिए घर के बुजुर्ग हमेशा cotton का कपड़े को Priority देते हैं।और वह हमेशा नवजात शिशु को डायपर पहनाने के खिलाफ होते है। घर के बुजुर्ग हमेशा बोलते है कि newborn बेबी को डायपर नहीं पहनाना चाहिए। यह बात पूरी तरह myth नहीं हो सकती उनकी बातों में थोड़ा logic तो जरूर होता है। लेकिन newborn बेबी को डायपर बिल्कुल ही पहनाने नहीं चाहिए यह बात भी पूरी तरह से सही नहीं है। 

हम नवजात शिशु को डायपर पहना सकते है। इस में कोई परेशानी वाली बात नहीं होती बस हमें कुछ बातों का ध्यान रखना होता है

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इस आर्टिकल में जानेंगे...

नवजात शिशु को डायपर पहनाने के पहले हमें काफ़ी care की जरूरत होती है। इस आर्टिकल में हम डायपर से जुड़ी सारी जाणकारी आप तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। जैसे newborn baby के डायपर के केयर के बारे में जानेंगे। बच्चों को डायपर से होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में जानेंगे। बच्चों के डायपर पहनाने के तरीकों को समझेंगे। इस आर्टिकल में हम जानेंगे बच्चों के लिए सही डायपर का चुनाव कैसे करें? क्या सर्दियों के मौसम में बच्चों को डायपर पहनाना safe होता है? और क्या बच्चों को रोज डायपर पहनाना सही है?

नवजात शिशु को डायपर को नकारने के कारण।

जन्म के बाद नवजात शिशु को skin काफ़ी नाजुक होती है। जिस की हमें काफी care करनी पड़ती है। डायपर के वजह से बच्चे को राशेस हो सकतें। इसलिए कई लोगों का मानना यह है कि नवजात शिशु को डायपर के बदले cotton की लंगोट ज्यादा अच्छी और सूटेबल होती है। जिसे बच्चों को रैशेज का खतरा नहीं होता और जब लंगोट गीली या पीली है जाती है तब उसे तुरंत बदलाया जा सकता है। घर में ज्यादा तर बड़े और बुजुर्ग नवजात शिशु के लिए लंगोट को ही priority देते है।

लंगोट से होने वाले फायदे और नुकसान।

पहले हम लंगोट से होनेवाले फायदे और नुकसान के बारे में जान लेते है। लंगोट एक पारंपारिक वस्त्र है जो ऐसा त्रिकोणीय cotton का कपड़ा होता है जिसे बेबी के bumb को cover किया जाता है। जब बच्चे सूसू या पॉटी करते है तब लंगोट में वह आसानी से दिख जाता है और हम तुरंत लंगोट को बदला सकते है। जिसे बच्चे के private part में rashes होने का खतरा नहीं होता। लंगोट air tight नहीं होती इसलिए बच्चे के को आरामदेह लगती है।

लंगोट के नुकसान कि बात करते हैं। जिसे हम नुकसान तो नहीं लेकिन परेशानी कह सकते है। अगर लंगोट में बच्चे ने सूसू पॉटी के दी और हमारा ध्यान नहीं रहा और काफी देर तक बच्चे की कंगित गीली या पीली है तो बच्चे को सर्दी लगने के chances बढ़ जाते हैं। बच्चे को rashes होने का खतरा बढ़ जाता है। बच्चा अगर बेड पर सोया है तो हमें 3-4 लेयर्स के कपड़े बिछने पड़ते है या प्लास्टिक कवर से बेड को कवर करना पड़ता है। ये कही न कहीं परेशानी का सबब बनता है।

नवजात शिशु को डायपर पहनाने के फायदे।

अगर आप effort कर सकते हो तो आप नवजात शिशु को डायपर पहना सकते हो। नवजात शिशु बार बार सुसू और पॉटी करते है। यदि बच्चे लंगोट में है तो हमें बार बार उनकी लंगोट को बदलना पड़ता है जिस से बच्चे की नींद तुड़ जाती है। उसकी नींद पूरी नहीं हो पाती। डायपर में बच्चा आराम से सो सकता है।

लंगोट में जब बच्चा सूसू करता है तो उस समय वह अपने आसपास के बेड को भी गीला करता है जिस से बच्चे को सर्दी जुकाम होने का खतरा रहता है। डायपर में यह खतरा नहीं होता कुछ देर तक डायपर बच्चे की सूसू या गीलापन सोक लेता है जो हम कुछ घंटों बाद बदल सकते है। जब हम अपने बच्चे को कहीं बाहर लेकर जाते है तब डायपर हमारे लिए काफी मददगार साबित होता है।

बच्चों के डायपर से जुड़ी कुछ बातों का ध्यान रखना है जरूरी।

नवजात शिशु को डायपर पहनाना safe होता है। बशर्ते हमें कुछ बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए। जिसे की हमारा baby डायपर में comfortable रहें और उसे डायपर से rashes या अन्य कोई समस्या ना हो।

  • Right quality of diapers :– जब भी आप अपने बच्चों के लिए डायपर खरीदनेेेेेेेे जाओ तो वह अच्छेेेेेेेेेेेेेेेे quality और अच्छे ब्रांड का ही हो। अच्छे quality और अच्छे ब्रांड का डायपर baby के skin के लिए अच्छा रहेगा जिस पर हम भरोसा कर सकते है।

  • gelbase diapers :– अगर आप affort कर सकते है तो अपने शिशु के लिए gelbase diapers खरीदें। Gelbase diapers जो होते है उनकी absorbing capacity ज्यादा होती है।और वह बच्चों के skin के लिए भी काफ़ी अच्छे होते है।

  • Right size diapers :– नवजात शिशु को डायपर पहनाते वक्त जरूरी बातों का हमेशा ध्यान रखिए। जब भी आप अपने शिशु के लिए diapers खरीदे तब उसपर baby का weight और age mention होता है वह जरूर देखें। आप के शिशु के weight और age के according ही आपको diapers खरीदना चाहिए।

  • Tight और loose diapers का ध्यान :– जब भी आप अपने शिशु के लिए daipers खरीदें तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि वह आप के शिशु को ज्यादा tight या फिर ज्यादा loose ना हो। अगर नवजात शिशु को डायपर tight होंगे तो वह uncomfortable रहेगा। उसे अपने पैरों की movment करते वक्त परेशानी हो सकती है। और यदि diapers loose हो तो उस से लीकेज problem हो सकती है। इसलिए आपके शिशु के डायपर correct size केे होना जरूरी है।

  • सही तरीक़े से पहनाए डायपर :– नवजात शिशु को डायपर लगाते वक्त जरूर ध्यान रखें कि डायपर middle area में हो (diper area) ।अगर diaper सही तरीके से ना लगे तो उस से लीकेज problem हो सकती है। जिस कारण बच्चे के गीले होने के chances बढ़ जाएंगे।

  • Change diapers regularly :– सब से महत्वपूर्ण बात की शिशु के डायपर 2 से 3 घंटे में बदल दें। यदि आप इस बात को ध्यान रखेंगे तो आप के नवजात शिशु को डायपर से कभी भी कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन यदि आप ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया तो आप के शिशु को कई problems का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों को सब से ज्यादा rashes की problem इसी बात से होती है। Parents समय पर बच्चों के डायपर change नहीं करते।

  • diapers area की सफाई जरूरी :– जब भी आप डायपर change करें बच्चे के diaper area की अच्छे से सफाई जरूर करें।

अगर नवजात शिशु को डायपर पहनाते वक्त आप ऊपरी जरूरी बातों का ध्यान रखें तो आप के शिशु को कभी भी डायपर से कोई परेशानी नहीं होगी।

बच्चों के लिए सही डायपर का चुनाव कैसे करें?

indian मार्केट में कई तरह के diapers ब्रांड available है। जिन के अलग अलग features है। जो आप के बच्चे के according आप खरीद सकते है। हर बच्चे की एक unic identity होती है। जिस कारण उन में अलग अलग comfortable zone हो सकते है। जिस भी features में आप का बच्चा ज्यादा comfortable महसूस करें आप को उसी brand के diapers purchase करने चाहिए।

Indian मार्केट के कुछ diapers ब्रांड और उन के features

Huggies dry taped diapers :– over night dryness इसे आप बच्चे को पूरी night डायपर पहना सकते हो। Air fresh materials जिस से diaper area की स्कीन को पर्याप्त air मिल सके। quick lock system जिसेे लीकेज की problem नहीं होती। Blue speed dry layers जो weightness को sock करता है। इसके एक pack का मूल्य है 70rs. जिस मे 5 diapers होते है।

Pampers baby dry :– magic gel जिस की वजह से यह डायपर 10 घंटे तक dry रहता है। Baby lotion जो आप के शिशु के skin को protect करता है। Baby के skin को rashes से बचाता है। Soft like cotton जो डायपर को soft और काफ़ी मुलायम बनाता है। Reusable tape जिस की वजह से आप tape को attached और ditached बार बार कर सकते हैं। इस के एक पैक का मूल्य है 75rs. जिस मे 5 diapers होते है।

Huggies wonder pant :– over night dryness इसे आप बच्चे को पूरी night डायपर पहना सकते हो। Air fresh materials जिस से diaper area की स्कीन को पर्याप्त air मिल सके। quick lock system जिसेे लीकेज की problem नहीं होती। Blue speed dry layers जो weightness को sock करता है। Comfortable fit यह diaper बच्चों के लिए काफी comfortable होता है। इसके एक पैक का मूल्य है 60rs. जिस में 5 diapers available होते है।

Pampers baby dry pant :– 3 absorbing channels यह इस diapers का एक महत्वपूर्ण features है जो इसे सभी diapers से अलग बनाता है। जो liquid को equally spread करता है। Liquid को एक जगह नहीं जमने देता। इसलिए diaper एक जगह heavy नहीं होता है। जो parents नवजात शिशु को डायपर पहनाते है उनके लिए यह best feature है। Magic gel जिस की वजह से यह डायपर 12 घंटे तक dry रहता है। Breathable soft breath and cups जिस से बेबी की skin काफी fresh रहती है। Baby lotion जिस से बच्चे को skin rashes की problem नहीं होती।

Himalaya total care baby pants :– Anti rash shield जो skin rashes के problems से बच्चों को protect करता है। Elovera and yashoda bhasm जो बच्चों के skin को irritation और infection से बचाता है। Rapid absorption इस डायपर की absorption capacity बाकी के बाद से काफ़ी अच्छी है। Leakproof होने के वजह से लीकेज की problem बिल्कुल नहीं होती। Silky soft inner layer जो बच्चों के skin के लिए बहुत soft होता है। Breathable fabric जो air circulation के लिए काफी helpful होता है।

इस diaper में और एक feature है जो हमें costly diapers में दिखाई देता है। Wetness indicator जिस के कारण बार बार डायपर check करने की जरूरत नहीं होती। इस diaper के बीचोबीच एक yellow line होती है जो green होने पर diaper change करने का सिग्नल देती है। Price देखी जाए तो 130 rs में 9 diapers मिलते है।

Mamy poko pants (extra absorb diapers) :– crisscross absorption sheet जो liquid को equally spread करता है। Liquid को एक जगह नहीं जमने देता। Prevents thai gaps के वजह से लीकेज की problem बिल्कुल नहीं होती और Baby के skin को rashes से बचाता है। Cotton like outer cover air circulation के लिए काफी helpful होता है। इसके एक pack जा मूल्य है 48 rs. जिस मे हमें 4 डायपर मिलते है।

क्या सर्दियों के मौसम में बच्चों को डायपर पहनाना safe होता है?

कई सारे parents के मन में यह सवाल आता है कि सर्दियों के मौसम में जब बच्चे ज्यादा सुसु करते है तो क्या डायपर पहनाना ठीक होगा या नहीं? तो इसका जबाव यह है कि आप सर्दियों के मौसम में बेझिजक नवजात शिशु को डायपर पहना सकती है। बशर्ते आप को थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की आवश्यकता होती हैं। आपको डायपर को 2 से 3 घंटे के बाद डायपर को जरूर change करना है। गीले डायपर में बच्चों को rashes का खतरा बना रहता है।

बच्चे को डायपर पहनाने से पहले आपको बच्चे के डायपर area को अच्छे से cotton के कपड़े से साफ करना है और नारियल का तेल या rashes cream को अच्छे से लगाना है। जिस से डायपर और बच्चे के skin में friction को कम किया जा सकें।

क्या बच्चों को रोज डायपर पहनाना सही है?

यह एक महत्वपूर्ण सवाल है जो लगभग हर parents के मन में आता है। क्यों की डायपर से जुड़ी कुछ बातें हम कई दिनों से सुनते आते है। जैसे कि नवजात शिशु को डायपर नहीं पहनना चाहिए, बच्चों को यदि रोज डियापर पहनाए तो उसे आदत हो जाएगी जी कारण चलना शुरू करते वक्त उसकी चाल बदल जाएगी। ऐसी काफी बातें हमें डायपर के बारे में सुनने को मिलती है। जिस कारण हर parents के मन में डायपर के बारे में कहीं न कहीं एक डर सा लगा रहता है।

लेकिन यह सब गलत बातें है। जो कई वर्षो से समाज में फैली हुई है। लेकिन हमें डायपर के लिए काफी कुछ चीजों का ध्यान रखना होता है। जो कई parents नहीं रख पाते। जैसे

बच्चों के according डायपर का सही चुनाव करना। आप के बच्चे को कौनसा डायपर suit करता है। किस मे वह ज्यादा comfortable महसूस करता है। बच्चे को observe कर आपको यह सुनिश्चित करना होगा।

जब भी आप अपने शिशु के लिए डायपर खरीदें तो एक नंबर ज्यादा वाला ही डायपर खरीदे। अगर आप अपने बच्चे के exact नंबर का डायपर खरीदते है तो वह उसे थोड़ा tide होगा जिस से rashes होने का खतरा बढ़ जाएगा। और आप का शिशु भी उस में comfortable महसूस नहीं करेगा।

बच्चे का डायपर 2 से 3 घण्टों में जरूर change करना चाहिए यह काफी महत्वपूर्ण है। इस लिए हम इस बात को article में कई बार दोहरा चुकें है।

यदि आप इन बातों का ध्यान रखें तो आप हर रोज बच्चे को डायपर पहना सकते हो।


नवजात शिशु को डायपर
 नवजात शिशु को डायपर

क्या आप जानते है बच्चों को सेरेलक कब खिलाना चाहिए। जानिए सेरेलक से जुड़ी Most important tips

क्या आप जानते है बच्चों को सेरेलक कब खिलाना चाहिए। जानिए सेरेलक से जुड़ी Most important tips

बच्चों को सेरेलक

बच्चों को सेरेलक
बच्चों को सेरेलक

वैसे से तो 6 month के बाद से बच्चों को सेरेलक देना start कर देते है। फिर भी कई सारे सवाल parents के मन में रहते है। जैसे बच्चों को सेरेलक कब देना शुरू करें? क्या सेरेलक के कोई side effects होते हैं? बच्चों को सेरेलक किस तरह से खिलाते है? क्या हम home made सेरेलक बना सकते है? सेरेलक घर पर कैसे बनते है? उसका विधि क्या है? ऐसे कई सारे सवाल parents के मन में जरुर आते है। हम इस article में सेरेलक से जुड़ी सारी बातों को जानेंगे। जिस से parents के मन के doubts को clear किया जा सकें।

इस article में हम जानेंगे बच्चों को सेरेलक कब, कौन सा और कितना दे? सेरेलक देते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना है? बच्चों को सेरेलक के क्या फायदे और क्या नुकसान होते है? घर पर सेरेलक कैसे बनाए? सेरेलक बनाने की क्या विधि होती है? ऐसे सेरेलक से जुड़े कई सारे सवालों को हम जानेंगे।

क्या होता है सेरेलक?

सेरेलक को हम बच्चे का पहला food भी कह सकते है। जन्म से 6 माह तक बच्चा पूरी तरह से मां के दूध पर ही निर्भर रहता है। और यह बच्चे के लिए जरूरी भी है। बच्चे के लिए मां का दूध ही अमृत होता है। 6 माह के उपरांत जब हम बच्चे को solid food देने के लिए सोचते है तो सब से पहले सेरेलक का ही नाम आता है।क्यो कि सेरेलक में fiber rich nutrition होते है। फाइबर की अधिक मात्रा होने से बच्चे को constripition का सामना नहीं करना पड़ता है। और वह आसानी से consume कर के digest कर सकता है।

बच्चों को सेरेलक कब, कौन सा और कितना दे?

parentsके सबसे ज्यादा सवाल इसी categery में आते हैं। 6 माह के उपरांत कब सेरेलक शुरू करें? मार्केट में मिलने वाले सेरेलक दे या घर पर बना सेरेलेक हम बच्चों को दे? मार्केट में कई तरह के सेरेलेक avilable है उस में से कौन सा सेरेलेक सब से पहले बच्चे को दे? सेरेलक देते समय उसकी कितनी quantity होनी चाहिए? और हम जब सेरेलेक बनाते है तो दूध में डालकर बनाना चाहिए या पानी में डालकर बनाना चाहिए? ऐसे कई सवाल होते है जो नए parents होते है उनके मन के आते है।

बच्चों को सेरेलेक कब से शुरू करें।

6 माह के उपरांत बच्चों को solid food देना चाहिए। यह normally कहां जाता है। कुछ parents थोड़ी जल्दबाजी करते है हुए बच्चे को चौथे या पांचवे महीने से ही सॉलिड foods जैसे सेरेलेक देना शुरू कर देते है। लेकिन parents को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए normally 6 माह के बाद पहले या दूसरे week में आपको बच्चे को solid foods जैसे सेरेलेक देना शुरू करना चाहिए।

यदि आपका बच्चा farmulla milk पिता हो तो आप 5 माह के दूसरे या तीसरे week से भी बच्चे को सेरेलेक देना शुरू कर सकते हो। लेकिन चौथे महीने से बच्चे को solid food देना बच्चे के लिए harmful हो सकता है।

बच्चों को सेरेलेक देते समय शुरवात में कितना देना चाहिए।

जब हम बच्चे को कोई भी solid foods स्टार्ट करते है तब उसकी quantity हमें काफी कम रखनी है। क्यो कि अभी तक बच्चा पूरी तरह से मां के दूध पर ही depend था। जब हम बच्चे को सेरेलक देना शुरू करते है तो एक या दो चम्मच ही हमें उस खिलाना है। और देखना है उसका कैसा मन हो रहा है। बच्चा और भी मांग रहा है ऐसा आप को लगे तो बच्चे के according धीरे धीरे आपको उसकी quantity को बढ़ाना है।

मार्केट में मिलने वाले सेरेलक दे या घर पर बना सेरेलेक हम बच्चों को दे।

वैसे तो घर की बनी हुई चीज़ बाहरवाले चीज़ से हमेशा ज्यादा better होती है। घर की fresh चीजें हमेशा बाहर की पैक चीजों से बेहतर पाई जाती है। सेरेलक के साथ भी इस बात को हम जोड़ सकते है। मार्केट में को पैक बना बनाया सेरेलेक मिल रहा है उस से better घर पर बनाया सेरेलेक होता है क्यो की घर के बने हुए सेरेलेक में ऐसा कोई भी preservative नहीं होता जितना की बाहर के पैक सेरेलेक में होता है।इसलिए मार्केट ने मिलनेवाले सेरेलेक से ज्यादा benefit घर पर बने सेरेलेक से हो सकता है।

बच्चों को कौन सा सेरेलेक हम दे सकते है।

किसी reason के वजह से हम घर पर सेरेलेक नहीं बना सकते। मार्केट में कई तरह के अलग अलग कंपनियों के सेरेलेक available होते हैं तो हमें इनमें से कौन सा बच्चों को सेरेलेक देना चाहिए यह आम सवाल कई parents के मन में आता है। तो आपको nestle का सेरेलेक लेना चाहिए। क्यो कि nestle का सेरेलेक बच्चों के month vise available होता है। जिसे आप बच्चे के month के हिसाब से बच्चे को दे सकते है।

बच्चों को सेरेलक दूध से देना चाहिए या पानी से देना चाहिए।

बच्चों को सेरेलक दूध से देना चाहिए या पानी से देना चाहिए तो यह जानना भी आपके लिए आवश्यक है। शुरवात में बच्चे को पानी से ही सेरेलेक देना चाहिए। क्यों की 6 महीने से बच्चा मां के है दूध पर निर्भर है। बाहरी दूध बच्चा diegest कर नहीं पाएगा। शुरू में आपको बच्चे को पानी से ही सेरेलेक देना है। फिर आगे एक या दो चम्मच दूध मिलाकर देखना है कि बच्चा अच्छे से diegest कर पा रहा है या नहीं। अगर बच्चा अच्छे से diegest कर पा रहा है तो आपको धीरे धीरे पानी की जगह दूध का इस्तेमाल करना चाहिए।

बच्चों को सेरेलक देते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना है?

बच्चों को सेरेलेक देते समय कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें। कभी कभी हम कुछ बातों पर ध्यान नहीं देते और वह हमारे बच्चे के लिए काफ़ी harmful हो सकता है।

  • जब भी मार्केट से सेरेलेक purchase करें तो हमें उस pack पर expiry date देख कर ही purchase करना है। इस बात जा जरूर ध्यान रखें।

  • सेरेलक देने की शुरवात करने के बाद भी हमें बच्चे को मां का दूध पिलाना ही है। मां का दूध बच्चे के लिए अमृत होता है। और बच्चे को कम से कम 2 साल तो मां का दूध मिलना आवश्यक है।

  • बच्चे को feeding करते समय आप first priority मां के दूध को दे। second priority घर का खाना जैसे डाल का पानी, चावल का पानी इसे दे। और third priority सेरेलेक को दे। पूरी तरह से सेरेलेक पर निर्भर ना रहें।

  • सेरेलक के pack से एकबार सेरेलेक इस्तेमाल करने पर उस पैक को अच्छे से cover करने रखना ना भूलें। अगर आप उसे अच्छे से cover नहीं करेंगे तो pack के अंदर का सेरेलेक नमिं पकड़ लेगा। और उसका nutrition खत्म हो जाएगा।

  • मार्केट से purchase किया हुआ सेरेलेक के पैक का इस्तेमाल maximum 20 से 25 दिन ही करें। उसके बाद उस पैक का बच्चों को सेरेलक ना दे।

  • मार्केट में month vise सेरेलेक मिलता है तो आप को जिस month का आपका baby है उसी month का सेरेलेक देना है। क्यों की वह उस month के बच्चे के deigst के हिसाब से ही बनाया जाता है।

बच्चों को सेरेलक के क्या फायदे और क्या नुकसान होते है।

अगर आप भी अपने बच्चों को सेरेलक खिलाते हो तो आपके लिए यह जानना आवश्यक है कि बच्चों को सेरेलक खिलाने के क्या क्या फ़ायदे होते है और उसके क्या नुकसान हो सकते है।

  • आज संशोधन में पाया गया है कि बच्चों को सेरेलक का स्वाद और उसकी महक काफ़ी पसंद आती है। और बच्चों को इसे deigst करने में कोई परेशानी नहीं होती।

  • बच्चों को सेरेलेक देने ने के बाद बार बार भूख नहीं लगती।

  • अगर सेरेलेक अच्छे से घोला न जाए तो उसमें गांठे बनती है जिस से कुछ बच्चों को कब्ज़, acidity, rashes का भी सामना करना पड़ सकता है।

  • बच्चों को सेरेलक देने के शुरवाती दौर में अक्सर बच्चों को पेट का दर्द होने की समस्या आती है। अगर बच्चे को यह खिलाने के बाद पेट मे दर्द हो तो उसके गाढ़ेपन पर विशेष ध्यान दें।

घर पर सेरेलक कैसे बनाए।

सेरेलेक एक आसान फ़ूड है। जिसे पकाना नहीं पड़ता। इसलिए हर मां को बच्चे को मार्केट में मिलनेवाला सेरेलेक लेकर बच्चों को खिलाना काफी easy लगता है। लेकिन जो parents सेरेलेक मार्केट से purchase नहीं कर सकते या बाहरी पैकेट food बच्चों को देना avoid करते है। वह अपने घर में भी अपने बच्चों को सेरेलक बनाकर खिला सकते हैं। घर पर सेरेलेक बनाना काफी आसान है। हम इसे पूरे ingredients और विधि के साथ समझते हैं।

सेरेलेक बनाने में लगने वाले ingredients

  1. आधी कटोरी मूंगफली के बिज़

  2. आधी कटोरी बादाम

  3. एक कटोरी rost किया हुआ चना

  4. एक कटोरी मुरमुरा

सेरेलक बनाने की विधि।

बच्चों को सेरेलेक घर पर बनाने की विधि अत्यंत सरल है। सबसे पहले हमें मूंगफली के बीजों को अच्छे से rost करना है।और उन्हे ठंडा करना है। फिर हमें बादाम को भी अच्छे से rost कर लेना है। ( अगर हम इन दोनों ingredients को एकसाथ rost करते है तो मूंगफली के बीज नीचे रह जाएंगे जिस कारण वह ज्यादा rost हो जाएंगे। इसलिए हमें इन दोनों ingredients को अलग अलग rost कर के ठंडा कर लेना है।

उस के बाद हमें सभी ingredients को एकसाथ मिलाकर मिक्सर में अच्छे से grind कर लेना है। और अब हमारा irons, vitamins, calcium, nutrition से भरपूर सेरेलेक बिल्कुल तैयार है। आप इसे अच्छे से पैक कर के रख सकते है और जब चाहे अपने बच्चों को सेरेलेक दे सकते हैं।

जो मार्केट में सेरेलक मौजूद होते है उन सब में एक्स्ट्रा चीनी add होती है। लेकिन घर पर बने सेरेलक में आप बच्चे के पसंद के according चीनी मिला सकती है।

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बच्चों को सेरेलक
बच्चों को सेरेलक