अगर आप अपने बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें नहीं जानेंगे, तो lifetime जरूर पछताएंगे।

अगर आप अपने बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें नहीं जानेंगे, तो lifetime जरूर पछताएंगे।


Parents के लिए है जरूरी बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें

बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें
बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें


हर Parents को  लगता है कि अपने बच्चे अनुशाषित और समझदार हो ।हमारे बच्चों को अच्छे तौर तरीकों का विकास हो। हर parents अपने बच्चों को अच्छी चीजें या बातें सिखाना चाहते है ताकि उनका बच्चा आगे चलकर एक अच्छा इंसान बने। अपने विचारों और प्रयत्नों से काबिल बने। हर parents अपने बच्चों को life में success होते हुए ही देखना चाहते है। तो इस की बुनियाद हर parents को आज से ही रखना जरूरी है। बच्चों को अनुशासन के साथ साथ उसकी काबिलियत और कल्पनाओं को विस्तार देना हर parents का कर्तव्य है।

लेकिन अपने बच्चों को अच्छा अनुशाषित कैसे करें? कैसे उस को अच्छी बातें सिखाएं और उसे बेहतर इन्सान बनाने की कैसे कोशिश करें? यह नही जान पातें। मां बाप बच्चों के खुशी के लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाते है इसलिए बच्चे थोड़े जिद्दी हो जाते है। इस कारण बच्चों में किस तरह से बदलाव लाया जा सकें और कैसे बच्चों को अनुशासन (discipline) सिखाया जाए यह सवाल हर एक मातापिता के सामने रहता है।

हम इस आर्टिकल में आपको 10 ऐसी बातें बताएंगे जो आप अपने बच्चों पर aply कर सकते हो। या बच्चों को अनुशासन सीखाने के लिए जरूरी है। जो आप को पढ़नी चाहिए।

अपने बच्चों को अनुशासन कैसे सिखाएं।

बच्चों को अनुशासन सीखना एक जटिल काम होता है। इस के लिए parents को काफ़ी कुछ बातों को समझने की जरूरत होती है। बच्चों को अनुशासन कैसे सिखाएं? बच्चे कैसे सीखते है? किन बातों का बच्चों पर गहरा असर हो सकता है? बच्चों को कब डांटना चाहिए? बच्चों को किस तरह से समझने की और समझाने की जरूरत होती है? हमें बच्चों को किन बातों के लिए और कैसे प्रेरित करना चाहिए?

लेकिन इन बातों को हमें जानना आवश्यक है जिसे हम अपने बच्चों को एक अच्छा discipline लगा सकते है। जो उनके भविष्य के लिए भी दिशा दर्शक हो सकता है।

बच्चों को अनुशासन की 10 बातें। खुद के तौर तरीकों को बदलना है जरूरी

बच्चे हम से ही सीखते है। अगर आप अपने बच्चे को अनुशासित करना चाहते हो। अपने बच्चों को discipline लगाना चाहते हो तो पहले आप को खुदे के तौर तरीको में बदलाव लाना होगा। अपनी जीवनशैली को थोड़ा बदलना होगा। जब बच्चे छोटे होते है तो वह घर के वातावरण को समझने की कोशिश करते है। घर के सदस्यों की, अपने parents की activity को analysis करते है। आप क्या कर रहे है? आप कैसे कर रहे है? किसी चीज के बारे में आपका behavior क्या है?

लेकिन बच्चे तब सही और गलत में फर्क नहीं कर पाते। अगर आप बच्चों के सामने गलतियां कर रहे है तो बच्चे उसी activity को accept करते है। चाहे वह सही हो या गलत और वैसे ही behave करने की कोशिश करते है।

अगर आप को अपने बच्चों को अनुशासन लगाने की सोच रहे हो तो पहले खुद अनुशासित हों जाए। जब आप सही तरह से अनुशासित होकर कार्य करेंगे तब बच्चे उसी एक्टिविटी को बार बार देखेंगे, समझेंगे और दोहराने कि कोशिश करेंगे। जैसे सुबह उठना, ब्रश करना, नित्यकर्म करना, योगाभ्यास करना, शारीरिक स्वास्थ के प्रति जागरूक रहना, किसी कार्य को पूरी लगन से करना, जोर जोर से बाते ना करना, बड़ों का आदर करना, nature से लगाव रखना ऐसी कई बातें हम खुद में विकसित करनी होगी। जो बच्चे देखते है, समझते है और दोहराते है। इस तरह से बच्चे हमसे ही काफ़ी कुछ बातें सीखते है।

बच्चों के सामने नकारात्मक बातों को टाले।

नकारात्मक बातें बच्चों के मन पर काफ़ी गहरा असर करती है। जिसे बच्चे कभी नहीं उभरते बल्कि उनके जीवन में नकारात्मकता का प्रभाव बढ़ता जाता है। जिस से वह अनुशासित नहीं हो पाते। जैसे हम बच्चों को किसी बात का डर दिखाते है या फिर घर में किसी कारण वश तनाव का माहौल रहता है यह चीजे बच्चों के मन में काफी गहरा प्रभाव छोड़ जाती है।

माता पिता में हमेशा अनबन बने रहने की स्थिति बच्चों को प्रभावित करती है। इसलिए हमें बच्चों को अनुशासन सीखाने के लिए इन बातों से बचना चाहिए। घर में प्यार भरा माहौल काफी जरूरी है। और आप बच्चों को हर किसी से प्यार से रहने की बड़ों और छोटों के प्रति आदर और प्रेम की शिक्षा दे सकते है।

गलत बातों को बच्चों के सामने ना दोहराए। जैसे आप शराब, सिगरेट, तम्बाकू का सेवन करते हो तो इसे बच्चों के सामने ना दोहराए। ऐसी चीजें बच्चों के सामने करने से बच्चों पर काफी बुरा असर पड़ता है।

गलतियां करने पर बच्चों को ना दांटें।

बच्चे सही और गलत का फर्क नहीं जानते। इसलिए बच्चे कई बार गलतियां करते है। जिस पर हमें काफी गुस्सा भी आता है। लेकिन बच्चों की गलतियों पर किया गया आपका गुस्सा बच्चों को वहीं बातें दोहराने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए बच्चों को गलतियों पर डांटने की भूल कभी ना करें। और यदि आप ने गुस्से में बच्चों को डांट भी दिया तो भी थोड़ी देर में आप बच्चे को प्यार से गले लगाकर उसे सही तरीके से समझाएं।

बच्चों को गलत और सही का फर्क बड़े प्यार से समझाएं। एक बार नहीं बल्कि बार बार आप अपने बच्चों को उस चीज या किसी बात का सही और गलत फर्क समझाने की आवश्यकता होती है। जिसे बच्चों के मन में उस बात के प्रती सटीक जानकारी बिंबित होती है।और वह सही और गलत को समझने लगता है।

अगर आप बच्चो को बार बार की गलतियों पर डांटना शुरू करेंगे तो बच्चों के मन में इसका बुरा असर पड़ता है। डांटने से बच्चे के मन में एक डर का माहौल तैयार हो जाता है। जिसे बच्चा किसी चीज या बात को सीखने की चाह को खो सकता है। और ऐसा भी हो सकता है कि डांटने के डर से बच्चा अपनी गलतियों को छिपा कर रखें।

लेकिन इस बात का अर्थ यह भी नहीं है कि आप अपने बच्चों की गलतियों पर पर्दा डाले। बच्चों को हमेशा गलतियां स्वीकार करने के लिए प्रेरित करे।

बच्चों की हर जिद को पूरा ना करें।

बच्चों को अनुशासन लगाने के लिए जरूरी है कि बच्चों की हर जिद पूरी ना करें। अगर बच्चे जिद पर अड़ें है रों रहे है तो उन्हें रोने दे। जो बच्चों के लिए एक सबक होने की आवश्यकता है। जिसे हम बच्चों में धैर्य और समझदारी को विकसित कर सकते है। और बच्चों के मन को भी संयमित कर सकते है।

यदि हम बच्चों की गर जिद को पूरा करते गए तो इस बात की मान लेते है की जिद करने से उन्हे सब कुछ मिल सकता है। और आगे चलकर वह हर किसी बात के लिए जिद करना सीखेंगे और इस के लिए बच्चे गलत रास्ता अपनाने के लिए भी नहीं हिचकिचाएंगे। यह बात हमें आज समझनी होगी।

अक्सर बच्चे आसपड़ोस की चीजे देखकर या साथी बच्चों का behaviour देख कर कुछ बातों या चीजों के लिए जिद कर सकते हैं। ज़िद करने पर आप बच्चों को सौम्य दंडित कर सकते है। लेकिन उन्हें प्यार से समझाने से बच्चे समझ भी सकते है।

आक्रामक रवैैये के लिए दंडित अवश्य करें

घर के अंदर या घर के बाहर यदि बच्चा आक्रामक हो जाता है। तो बच्चे को अवश्य दंडित करें। किसी को पीड़ा या दुख पहुंचाने पर उसे अवश्य शिक्षा का पात्र होना पड़ेगा इस बात को बच्चे के मन में बिंबित होने की आवश्यकता है। बच्चों को अनुशासन के लिए यह जरूरी है। यदि वह किस को किसी तरह हानि पहुंचता है तो अपने बच्चों की side लेकर ना बोले। यदि आप ऐसा करते है तो बच्चा यह समझता है कि वह किसी को हानि पहुंचने पर या किसी के साथ गलत करने पर भी बच सकता है। और यह बात आप के बच्चे को बिगाड़ने के लिए काफ़ी है।

बच्चों की कल्पनाओं को विस्तार दें।

बच्चे अगर कुछ अच्छा करने की चाह रखते हो तो हमेशा बच्चों को प्रेरित करना उनकी प्रशंसा करना उनके कार्य के लिए प्रोत्साहन पर उन्हे पारितोषिक देना बच्चों मै नई उमिद को जगाता है। जैसे बच्चा किसी अच्छे और भले कामों में दिलचस्पी दिखता हो तो हमें चाहिए कि बच्चों को हमेशा प्रेरित करे। उनके कार्य की प्रशंसा करें। उन के मन की कल्पनाओं का विस्तार करें। जो आगे चलकर बच्चों में विश्वास की भावना को जगाता है। उनकी आंतरिक शक्ति को बढ़ाता है। और उनकी सोच को और निखारने के लिए जरूरी होता है।

बच्चों के मन के सवालों का समाधान होना जरूरी।

बच्चों को अनुशासन सिखाते वक्त हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के मन में उठ रहे सवालों को हम सही तरह से बच्चों को समझाने की कोशिश करें। बच्चे की मन की हर शंका कुशंका का हल होना जरूरी है। जिसे बच्चों मै गलत धारणाओं का विचार समाप्त होने में काफी मदद मिल सकती हैं।

बच्चे हमारे आसपास घटनेवाली बातों को देखकर उस पर सही या गलत राय बना सकते है जो उनकी धारणा बन जाती है। यदि हम बच्चों को सही तरह से ना समझा सके या उनकी धारणाओं को सही दिशानिर्देशित नहीं कर सकें। तो भविष्य में बच्चे गलत धारणाओं को आधार बनाकर जीवन को बर्बाद कर सकते है। इस लिए बच्चों के मन मे उठ रहे सवालों को हल होना जरूरी है।

बच्चों के लाड़ प्यार कि होनी चाहिए सीमाएं।

बच्चों को अनुशासन के लिए जरूरी है कि घर के सदस्यों द्वारा बच्चों के लाड़ प्यार को सीमाएं होनी चाहिए। जैसे अगर बच्चा किसी कारणवश अपने मातापिता से दंडित होता है तो घर के सदस्य बच्चों की side लेकर ना बोले। और बच्चे को अहेसास होने दे की किसी गलत काम के लिए मिलने वाले दण्ड में उसका कोई साथ नहीं देगा। यह भावना बच्चों को गलत काम करने से रोकती है। जो उस के भविष्य के लिए और बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए भी जरूरी है।

बच्चों के लिए घर में समय के नियम जरूरी।

अपने बच्चों के लिए घर में नियम अवश्य बनाए। जैसे खाने संबंधी, पढ़ाई संबंधी, खेलने कूदने संबंधी, मोबाइल, टीवी जैसे गैजेट्स के इस्तेमाल के सम्बन्धी बच्चों के लिए नियमों का होना काफी अनिवार्य है। जिसे बच्चों को सही वक्त पर सही कार्य करने की शिक्षा दी जा सकती है। जब नियमों के अधीन बच्चों का रूटीन develope होता है तो आगे चलकर यह उसकी आदत बन जाती है। और वह किसी चीज का आदि नहीं होता। बच्चा समय के महत्व को समझना सीखता है। और भविष्य में यह बात उसके सफलता के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।

बच्चों को साहसी बनाएं।

बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते वक्त बच्चों को साहसी बनाएं। जब खेल कूद के दौरान बच्चे गिर जाते है। तब उन्हे खुद ही संभालने का मौका दें। आप उसे उठाने ना जाए। अपवादात्मक स्थिति में यदि चोट गंभीर हो तो आप को जरूर दौड़कर जाना चाहिए। किन्तु अगर बच्चा गिरता है तो उसे स्वयं ही उठने के लिए प्रेरित करें। उस का ढांढस बढ़ाएं। जिस से बच्चों में सहनशक्ति का विकास होता है।

कुछ बातें...

उपरोक्त 10 बातें यदि आप ध्यान से पढे और अपने बच्चों को अनुशासन का सही पाठ पढ़ाए तो यकीनन आप का बच्चा उस के जीवन में नई ऊंचाइयों और बुलंदियों को हासिल कर पाएगा।

चाणक्य नीति में स्पष्ट तौर पर बच्चों के परवरिश के लिए माता पिता द्वारा अपनाने के तौर तरीकों के बारे में लिखा है। चाणक्य नीति कहती है, " अपने बच्चों को पांच साल तक खुप प्यार करों... छह: साल से पंद्रह: साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दों.... और सोलह साल से उसके साथ मित्रता करों..... आप की संतान ही आप की सच्ची मित्र है।"

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बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें
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