बच्चे क्यों हकलाते है? जानिए और बदलिए अपने बच्चे की हकलाने की आदत को। हकलाने से छुटकारा पाने के most important tips
हकलाने से छुटकारा पाने के most important tips
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| बच्चे क्यों हकलाते है |
बच्चे क्यों हकलाते है? बहुत ही common सा लगने वाला यह टॉपिक आप के बच्चे के लिए, उस के भविष्य के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है। जिस के कारण आपका बच्चा जीवन भर के लिए अपना आत्मविश्वास गवां सकता है क्यों की हकलाने के कारण आप के बच्चे जीवन भर के लिए समाज में मजाक बन जाते है। इसलिए बच्चे क्यों हकलाते है? यह जानना उन सभी parents के लिए जरूरी है जिन के बच्चे हकलाते है या बोलने में अटक जाते है।
बच्चे क्यों हकलाते है?
बचपन में जब बच्चे बोलना शुरू करते है। तब बच्चों को हकलाना या तुतलना एक नॉर्मल बात होती है। क्यों की उस वक्त बच्चे शब्दों को जानकर समझने की और उसी rythm में बोलने की कोशिश करते है। लेकिन बच्चों की tongh उन शब्दों का उच्चारण सही से कर नहीं पाती इस वजह से बच्चे normally हकलाते या तुतलाते है। इस के बावजूद बच्चे के हकलाने कई अन्य कारण हो सकते है। उन कारणों की समीक्षा करते है।
- बच्चे क्यों हकलाते है? इसका reason सामान्य तौर पर यह है बच्चे बड़ों की copy करने की कोशिश करते है। वह बड़ों के शब्द उच्चारण और ओठों की हलचल को निहारते है। और जब बच्चे बोलने की कोशिश करते है तब वह शब्दों के शुरवात में या अंत में शब्द पर जोर देते है। जिसे वह अपनी आदत बना लेते है और उसी वजह से बच्चे शब्दों पर जोर देकर अटक अटक के बोलते है। जिसे हम हकलाना कहते हैं।
- बच्चों के बोलने के शुरवात के दौर में बड़ों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कभी कभी बच्चे अटक कर बोलने जैसी क्रिया करते है को बाद में उनकी आदतों में शुमार हो जाता है।
- बच्चों का हकलाना एक मानसिक विकार हो सकता है जो अनुवाशिंकता के कारण बच्चों मै भी देखा जा सकता है।
बच्चों के हकलाने सम्बन्धी कुछ गलत धारणाएं।
बच्चे अगर हकलाकर बोलते है तो अमूमन लोगों की यह धारणा रहती की बच्चे के गले में कुछ ऐसा problem है जिस के कारण बच्चा शब्दों को बोल नहीं पाता। या किसी शब्द पर अटक जाता है।
कुछ लोग यह भी मानते है कि हकलाने और तुतलाने वाले बच्चों के tongh की thikness नॉर्मल बोलनेवाले बच्चों से ज्यादा होती है।
कुछ लोग यह मानते है कि स्वर तंत्र की परेशानियों की वजह से बच्चे शब्द को पूरा बोल नहीं पाते उस वजह से बच्चे हकलाते है।
लेकिन यह पूरी तरह से गलत धारणाएं है। जो भी बच्चे हकलाते है उनका ना ही स्वर तंत्र खराब होता है और ना ही उनके tongh की thikness ज्यादा होती है। यदि इन गलत धारणाओं को हम समझ लें तो हम अपने बच्चे के हकलाने की समस्या को हल करने के ठोस उपायों पर ध्यान दे सकते है।
हकलाने के कारण आत्मविश्वास में कमी।
बच्चों के हकलाने की वजह से भविष्य में उन्हे कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। क्यों की बात करते समय हकलाना इस वजह से समाज में उनका मजाक बनाया जाता है जिस से वह खुद का आत्म विश्वास खो बैठते है। काफ़ी बुद्धिमान और हुशार हो कर भी डर के कारण वह अपने talent को निखार नहीं पाते।
बच्चे क्यों हकलाते है? इसपर वैज्ञानिकों का शोध क्या कहता है।
बच्चे क्यों हकलाते है? इस पर वैज्ञानिकों के शोध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए है। जिसे जानना बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण हो जाता है।
बच्चों के हकलाने के संबध में किए गए शोध में पाया गया है कि normal बात करने वाले बच्चों के मुकाबले हकलाने वाले बच्चों के दिमाग में speech production केंद्र में blood circulation पूरी तरह नहीं हो पाता। जिस के कारण दिमाग में मौजूद speech production केंद्र गले में मौजूद वोकल केंद्र को पूरी तरह से support नहीं कर पाता। इसलिए गले ने मौजूद वोकल केंद्र शब्दों के कंपन बनाने ने असमर्थ हो जाता है इसलिए हकलाने जैसी समस्या उत्पन्न होती है।
अगर बच्चों के speech production केंद्र में सुचारू और नियमित रूप से खून का बहाव (blood circulation) हो तो बच्चों के हकलाने जैसी समस्या का समाधान हो सकता है।
बच्चे क्यों हकलाते है? क्या इसपर कुछ उपाय हैं?
अब हम यह तो जान गए है कि बच्चे क्यों हकलाते है? और अब यह भी जानना आवश्यक है कि हम बच्चे का हकलाना किस तरह से ठीक कर सकते है। किन बातों का हम ध्यान रखना है? और ऐसे कौन से उपाय हमें करने चाहिए जिसे हमारा बच्चा हकलाने की समस्या से बाहर आ सकें? आओ जानते है।
बच्चे को pressurized ना करें।
बच्चे क्यों हकलाते है? या हकलाने के आदि हो जाते है इस का सबसे बड़ा reason यह है कि परिवार के सदस्यों द्वारा बच्चों को ठीक से बोलने के लिए pressurised करना होता है। आप को एक बात समझनी होगी। 1 से 5 साल के बच्चों का हकलाना एक नॉर्मल बात होती है वह समय रहते ठीक होने के chances होते है। लेकिन पारिवारिक सदस्य इस बात को गंभीरता से लेकर बच्चों को डांटते है, सही बोलने के लिए pressurised करते है जिस से बच्चे का डर ज्यादा बढ़ जाता है और उस में खुद के प्रती विश्वास की कमी आ जाती है।
आप को बच्चे को बिल्कुल ही pressurised नहीं करना है। उस के साथ नॉर्मल बातें करनी है। और बच्चेको यह विश्वास दिलाना है कि एह जैसे बोल रहा है वह एक नॉर्मल बात है। आप के द्वारा बच्चे को दिया गया विश्वास बच्चे में confidance build करता है। धीरे धीरे बच्चों का ध्यान उस एक बात से हटने लगेगा और उसकी हकलाने की आदत बंद हो जाएगी।
बच्चों के साथ बोलते समय शब्दों को repeat करें।
बच्चों के बोलने के शुरवात के दिनों में बच्चों के साथ बात करते वक्त धीरे बोलें और शब्दों को repeat करें। शब्दों को repeat करने से बच्चों को शब्द को जानने और समझने के लिए वक्त मिल पाएगा। और शब्द के उच्चारण पर बच्चा अच्छे से ध्यान दे पायेगा।
बच्चे को rythmic words में बोलना सिखाएं।
बच्चे क्यों हकलाते है? इस का एक reason यह भी है कि बच्चे बोलते वक्त सांस लेना भूल जाते है और out of ऑक्सीजन हो जाते है जिस के कारण शब्दों मै और सांस लेने में अंतर पड़ जाता है। इस के लिए आप बच्चे को rythm में बात करना सीखा सकते है। जिस से हकलाने की problem से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है।
बच्चे को आंवले को सेवन कराएं।
बच्चों का तुतलाना और हकलाना हमारे दिमागी तौर पर होता है।इसलिए बच्चों को आंवले जा सेवन अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। आंवले में कई औषधिय तत्व मौजूद है। Vitamins, minerals और प्रोटीन से भरपूर आंवले का सेवन लाभदायि होता है।
बच्चे को दें speech therapy
अगर आपी का बच्चा 5 साल के ऊपर हो गया है और फिर भी उस की हकलाने की समस्या दूर नहीं हुई है तो आप speech therapist के पास जाकर अपने बच्चे को speech therapy दे सकते है। या speech therapy का अभ्यास अपने घर पर भी के सकते है। आज इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो मौजूद है जिस से आप अपने घर पर अपने बच्चों को speech therapy जा आभास करा सकते हैं।
बच्चों को योगासनों कि आदत डालें।
वैज्ञानिकों की माने तो हकलाने की समस्या हमारे दिमाग से जुड़ी है। दिमाग के speech प्रोडक्शन केंद्र में खून की कमी से हकलाने जैसी समस्या आ सकती है।यदि हम अपने बच्चों को नियमित योगाभ्यास और व्यायाम की शिक्षा दें तो शरीर में सुचारू रूप से blood circulation होने में काफी मदद मिलती है।
अगर हम बच्चे की हकलाने के ओर ध्यान दें। और सही समय पर उचित कदम उठाए तो इस समस्या का समाधान काफ़ी आसान है। लेकिन हमें पहले बच्चों मै यह विश्वास जगाना होगा कि हकलाना एक आम बात है जो समय रहते ठीक हो सकती है।
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