बच्चों के दिमागी विकास का रखें खयाल। जानिए, बच्चों से जुड़ी 7 Important बातें।

बच्चों के दिमागी विकास का रखें खयाल। जानिए, बच्चों से जुड़ी 7 Important बातें।

बच्चों के दिमागी विकास का रखें खयाल। जानिए, बच्चों से जुड़ी 7 Important बातें।

हर मां बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा दिमागी तौर पर सक्षम हो। आज के इस compitetive जमाने में उनका बच्चा पिछे न रह जाए। हर मां बाप को अपने बच्चे के भविष्य के बारे में चिंता करना स्वाभाविक भी है। इसलिए हर मां बाप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर ध्यान भी देते है। और यह जरूरी भी है।

आज के इस topic में हम बच्चों के दिमागी विकास ( brain development) के बारे में जानेंगे। बच्चों के दिमागी विकास के तरीकों को समझेंगे। कुछ tips भी इस article में सांझा करेंगे। ताकि वह tips आप fallow कर सके। कुछ पोषक आहार की भी बात करेंगे जिसे बच्चों के दिमागी विकास में मदद मिल सके।

बच्चों के दिमागी विकास की प्रक्रिया का आरंभ जन्म से पूर्व याने मां के पेट से ही शुरू हो जाती है। इसलिए हर मां को pregnency के दौरान कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है। जिसे उनके बच्चे का दिमागी विकास सही तरीकों से हो पाए। और कुछ बातों का ध्यान बच्चे के जन्म के बाद रखना होता है। जिसे बच्चों के दिमाग विकास प्रक्रिया को सही दिशा मिल सकें।

बच्चों के दिमागी विकास का रखें खयाल
बच्चों के दिमागी विकास का रखें खयाल


Pregnancy के दौरान रखे इन बातों का खयाल।

Pregnancy के दौरान हर मां को लगता है कि उनका बच्चा शारीरिक और दिमागी तौर पर सक्षम हो। उनके लिए यह जानना अति आवश्यक है कि गर्भ में कब बच्चों के दिमागी विकास प्रक्रिया का आरंभ होता है? और उस दौरान उन्हें कौन कौन से पोषक आहार को अपनाना चाहिए? जिसे मानसिक तौर पर सक्षम बच्चे को वह जन्म दे सकें।

गर्भ में शिशु का मानसिक विकास।

गर्भ में पल रहे शिशु का दिमागी विकास सातवें और आठवें सप्ताह के बीच शुरू हो जाता है। गर्भावस्था के शुरवात के तीन महीनों मे शिशु में nervous system (तंत्रिका तंत्र) का बनाना शुरू हो जाता है। जिस मे करोड़ों की संख्या में neurons जुड़ने लगते है। (जो अलग अलग संवेदनाएं मस्तिष्क की ओर भेजते है) और इसका काफ़ी तेजी से विकास होना शुरू हो जाता है। इस तरह से जैसे जैसे आपकी गर्भावस्था आगे बढ़ती है। वैसे गर्भ में शिशु के शारीरिक विकास के साथ साथ बच्चों के दिमागी विकास का भी आरंभ जाता है।

जब आप pregnancy के सोलवें सप्ताह में पहुंच जाते है याने गर्भावस्था के चौथे महीने में पहुंच जाते है तब गर्भ के भीतर आपका शिशु हल्का फुल्का movment भी शुरू कर देता है। लेकिन यह movment इतना ज्यादा हल्का होता है कि जो महिलाएं पहीली बार pregnent हुई है वह इस मूवमेंट को नहीं समझ सकती।

और जब आप बीसवें सप्ताह में पहुंच जाती है याने गर्भावस्था के पांचवें महीने में पहुंच जाती हैं तब शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास ज्यादा हो जाता है। गर्भावस्था के पांचवें महीने में शिशु का दिमागी विकास बाहरी बातों को ग्रहण करने में सक्षम हो जाता है। इसलिए बाहरी बातों से react होकर गर्भ में शिशु cick भी करता है जो एक मां अच्छे से महसूस कर सकती है।

Pregnancy के दौरान महिलाओं को पौष्टिक आहार लेना जरूरी है।

जिसे उनके शरीर में folic acid, calcium vitamins, irons, minerals की कमी न हो जो गर्भ में पल रहे शिशु शारीरिक और मानसिक विकास के लिए काफ़ी जरूरी है।

वैसे तो गर्भ में पल रहे शिशु का विकास सातवें से आठवें सप्ताह के भीतर ही शुरू हो जाता है। किन्तु दौरान महिलाओं को harmer changing से गुजरना पड़ता है। ज्यादा ometing की वजह से मुंह का स्वाद चला जाता है। कुछ खाने की इच्छा नहीं रहती। लेकिन तीन महीनों के बाद इन चीज़ोसे काफ़ी हदतक आपको छुटकारा मिल जाता है। इसलिए आपको चाहिए कि तीन माह के उपरांत आप अपने आहार में folic acid, calcium, irons, विटामिन्स, minerals का इस्तेमाल करें। जिसे आप के पेट में पल रहे आप के शिशु के दिमागी विकास को बढ़ावा मिल सकें।

गर्भावस्था के तीसरे महीने से आप अपने भोजन में प्रोटीन युक्त पदार्थो को शामिल करें।


  • इस दौरान आप को चाहिए कि रोजाना कम से कम दो मौसमी फलों का सेवन करें।

  • रोजाना थोड़े dry foods लें जिस में बादाम और अक्रोड को जरूर शामिल करें।(इस से शिशु का brain development काफी तेज़ी से होता है)

  • रोजाना सुबह शाम एक ग्लास दूध अवश्य लें।

  • इसके अलावा हरी साग सब्जी, मछली, अंडा, डाल, दही, लस्सी, पनीर अपने आहार मे जरूर शामिल करें।

  • अंकुरित अनाज और ताजे फलों का रस भी अपने दैनंदिन आहार में शामिल करें।

  • किसी भी प्रकार के ड्रग्स, अल्कोहल और स्मोकिंग का सेवन नहीं करना चाहिए। जिस से बच्चों के दिमागी विकास में बाधाए उत्पन्न होती है। या शायद आप विकलांग शिशु को जन्म दे सकती है।

बच्चों के दिमागी विकास की प्रक्रिया

Pregnancy के पहले ही जब बच्चा पेट मे होता है, उसकी दिमागी विकास की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सुनना, महसूस करना उसपर react होना ऐसी काफी चीजें बच्चे मि जन्म के पूर्व ही विकसित होना शुरू हो जाती है। बच्चे के जन्म के बाद बच्चे की nervous system काफी एक्टिव हो जाती है। जिस मे आवाजें सुनना और उसपर react होना। स्पर्श का एहसास होना। चेहरों को पहचानना। भुक लगने पर रोना। ऐसे कई बाते बच्चे सीखते है। बस हमें सही तरीकों से बच्चे के साथ react होना होता है। जिसे बच्चे का दिमागी विकास अच्छे से हो सकें। और बच्चे एक एक चीज को सही ढंग से सीख सके।

जन्म्मसे 6 माह के बच्चे कहीं तरह से चीज़ो को समझने की कोशिश करते है। और हमें भी उनकी समझने की कोशिश को बढ़ावा देना होता है। जैसे बच्चे के सामने खिलौनों को move on करना। कई parents ऐसे बच्चों को बढ़ावा देते भी है लेकिन उन्हें यह पता ही नहीं होता की वास्तव में बच्चों के दिमागी विकास से जुड़ी है। अगर माता पिता को सही तरह से पता हो की क्या क्या बातें या चीजें है जो बच्चों के दिमागी विकास से जुड़ी है तो हर parents उन चीजों में ज्यादा intrest ले सकते है। इसलिए parents को यह जानना आवश्यक है।

7 ऐसी बातें जो बच्चों के दिमागी विकास से है जुड़ी।


  1. बच्चों को गाना सुनाए :– या हल्का music सुनाए। Music के rydm को बच्चे का brain जल्दी एडॉप्ट करता है और उसे respond करता है।। जिस से उसका brain strong होने में काफी मदद मिलती है। कई सारे parents ऐसा करते भी है। लेकिन इस से बच्चे का brain develop हो रहा है इस बात को वह नहीं जानते।

  2. बच्चों के साथ खेलें:– दूसरी बात बच्चों के साथ उनकी toy से खेलना। जो लगभग सभी parents करते ही है पर उन्हे शायद यह पता नहीं होता कि इस बात से बच्चों के दिमागी विकास को बढ़ावा मिलता है। लेकिन यकीनन इस बात से बच्चे का brain develop होने में मदद मिलती है। जब हम बच्चे के साथ उसके toy से खेलते है तब बच्चा toy की movment और colours पर ध्यान देता है। (जन्म के वक्त बच्चा सिर्फ black and white कलर्स ही समझता है। जन्म के बाद बच्चा black और white के अलावा red कलर्स को जल्दी और अच्छे से समझता है।)

  3. बच्चों के साथ खिलखिला कर हंसिए:– तीसरी जो बात है वह है बच्चे के साथ खिलखिलाने हसना। जाभी हम smile करते है या हंसते है तब हमारे अंदर की खुशी महसूस होती है। और smile करना बच्चों को सीखना नहीं पड़ता। Smile करना एक human being एक nature है। जो अपने आप develope होता है। जब बच्चा पेट मे होता है। तब भी वह smile करता है। बच्चों के दिमागी विकास प्रक्रिया की यह एक महत्वपूर्ण बात है । जब बच्चा या हम खिलखिलाकर हसते है तब हमारे nervous system में जो endorphins secrete होते है वह brain को develope करने में काफ़ी ज्यादा help करते है।

  4. बच्चे को स्पर्श का ज्ञान कराए :– Body touch therepy का काफी ज्यादा महत्व बच्चों के दिमागी विकास के लिए ही नहीं बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए भी अनिवार्य है। मां का स्पर्श बच्चा भलीभांति जनता है और पहचानता भी है। जिसे उसे अहसास होता है। जिसे बच्चे के brain को विकसित होने में मदद मिलती है। जब भी बच्चे की मालिश करें तो यह ध्यान रखें कि बच्चे की मां ही बच्चे की मालिश करें। जिसे बच्चे को अहसास और भावनाओं को पहचानने में आसानी होती है।

  5. बच्चों के साथ dance करें। :– पांचवा तारिका है बच्चों के साथ मस्ती भरे अंदाज में dance करें। कितना भी छोटा baby हो या थोड़ा बड़ा आप गोदी में उठाकर भी बच्चे के साथ मस्ती भरे अंदाज में बच्चे को हिला डुला कर dance कर सकते हो। जब हम बच्चे को गोदी में उठाकर dance करते है। उस वक्त बच्चा अंदरुनी खुशी को महसूस करता है। जिस से उसके nervous system में जो endorphins secrete होते है वह active होते है जिसे बच्चों के दिमागी विकास पर काफी अच्छा असर पड़ता है।

  6. बच्चे के nutrition पर ध्यान रखें :– बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पोषण की आवश्यकता होती है। जिसे बच्चे की health अच्छी रहती है और बच्चों के दिमागी विकास पर भी उसका काफी अच्छा असर पड़ता है। चाहे बच्चा breast feeding कर रहा हो या ऊपर का खाना खा रहा हो। हमें बच्चों के nutrition पर ध्यान जरूर देना है।

  7. बच्चे को tummy time देना है जरूरी :– आप सोचेंगे tummy time और बच्चों के दिमागी विकास में क्या जुड़ाव हो सकता है? तो आप यह समझ लीजिए। यह शारीरिक विकास के लिए जितना जरूरी है उतना ही मानसिक विकास के लिए भी जरूरी है। बच्चे को tummy time देने से बच्चे की strength बढ़ती है। उसका vision develope होता है। जी से मानसिक तौर पर भी बच्चा विकसित होता है। इसलिए बच्चे को tummy time देना जरूरी है।

बच्चों के दिमागी विकास के लिए जरूरी है पोषक आहार।

जन्म से लेकर 5 वर्ष तक बच्चे का brain पूरी तरह विकसित हो जाता है। बच्चे के दिमाग को तेज बनाने के लिए बच्चे को सही तरह से पोषक तत्व मिलना जरूरी है। इसलिए बच्चों के दिमागी विकास के लिए बच्चे के लिए पोषक आहार का होना जरूरी है।

अमेरिका में एक शोध में पाया गया है कि बच्चे के दिमागी विकास के लिए pregnency के दौरान मां का आहार काफी हद तक जिम्मेदार होता है। इसलिए pregnency में मां के आहार को हमने article में सबसे पहला स्थान दिया है।

आइए जानते है ऐसे कौन से खाद्य पदार्थ है जिस से आपके बच्चों के दिमागी विकास को बढ़ावा मिलता है।

हरी सब्जियां

बच्चों के दिमागी विकास के लिए बच्चों को हरी और पत्तीदार सब्जियां खिलाएं। बच्चे के जन्म के 6 माह के उपरांत आप बच्चे को ऊपरी खाना और ठोस आहार दे सकते है। इसलिए बच्चे को आप 6 माह के उपरांत हरी सब्जियां खिला सकते है। हरी और पत्तीदार सब्जियों में omega 3 fatty acid पाया जाता है। जो बच्चों के दिमागी विकास के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अक्रोड़ और अन्य dry foods

अक्रोड खाने से दिमाग तेज होता है। इसे आप सुबह के नाश्ते के तौर पर अपने बच्चे को खिला सकते है। अक्रोडमें omega 3 fatty acid के साथ साथ फायबर, vitamin B, magnesium के साथ antioxidant अधिक मात्रा में होते है। अक्रोड के साथ आप बच्चे को अन्य dry foods भी दे सकते है जैसे बादाम, किसमिस भी आप बच्चे को दे सकते है।

Fish (मछली)

अगर आप चाहते है तो बच्चे के 9 माह के उपरांत बच्चे को समुद्री fish (मछली) खिला सकतें हैं। बच्चे के दिमाग के पूर्ण विकास के लिए समुद्री मछली का सेवन अच्छा माना जाता है। समुद्री मछली में omega 3 fatty acid प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। Pregnancy के दौरान मां के समुद्री मछली सेवन करने से बच्चों के दिमागी विकास को काफ़ी हद तक मदद मिलती है।

दूध और दही

बच्चों के दिमागी विकास के लिए दूध और दही भी बहुत जरूरी है। दही दिमाग के cells को काफ़ी लचीला बनाता है और nervous system की क्षमता को बढ़ाता है। fats free दूध और दही में protein, vitamin D और phosphorus काफी अधिक मात्रा मे पाया जाता है। जो दिमाग केे लिए जरूरी है। इसलिए अपने बच्चे को दूध और दही ज्यादा से ज्यादा खिलाएं।

तिल और तिल का तेल

तिल काफ़ी गुणकारी होता है। बच्चों के लिए ही नहीं तो बड़ों के लिए भी तिल का सेवन काफी फायदेमंद होता है। तिल में proteins, calcium और B complex की मात्रा अधिक होती है। जो मानसिक स्थिति को नियंत्रित रख कर दिमाग को तेज बनाने में काफी मददगार साबित होता है। तिल का तेल बुद्धि वर्धक होता है। तिल का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

बच्चों को क्या नहीं खिलाना चाहिए।

बच्चों को क्या नहीं खिलाना चाहिए इस बात को भी जानना जरूरी है। क्यों की ज्यादा तर parents अपने बच्चों को ऐसी चीजे या आहार दे देते जो बच्चों के लिए , उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए काफ़ी harmful साबित हो सकता है।

Fast foods और junk foods

बच्चों को fast food और junk food कभी भी मत दीजिए। यह शारीरिक तथा मानसिक विकास के लिए harmful साबित हो सकते हैं। इसमें दिमागी विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व नहीं होते।

यह भी पढ़े :– baby care tips in hindi (रखें अपने बच्चों का खयाल)।

सभी parents अपने बच्चों के प्रती जागरूक होते है। इसलिए अपने बच्चों के दिमागी विकास और शारीरिक विकास पन ध्यान देना जरूरी समझते हैं। और यह सही भी है। इस compitetive दुनिया में अपना बच्चा कहीं पिछे न रह जाए। इस की फिक्र हर मां बाप को होती है। और रहनी भी चाहिए। इसलिए बच्चों के दिमागी विकास पर हमारा यह article आपके लिए यकीनन मददगार साबित हो सकता है।

धन्यवाद


यह 10 आदतें अपने बच्चों को अभी से लगाना शुरू करें। good habits for kids in hindi

यह 10 आदतें अपने बच्चों को अभी से लगाना शुरू करें। good habits for kids in hindi


माँ बाप का पहला काम है बच्चों को अच्छी आदतें सिखाना good habits for kids in hindi


good habits for kids in hindi
good habits for kids in hindi

अपने बच्चों को सीख देना हर parents का पहिले काम होता है। ताकि आगे चलकर वह अपने जीवन को बेहतर ढंग से जी सकें। लेकिन कई parents यह मानते है कि आगे चलकर बच्चों के समझदारी आती है तो वह अपने आप खुद को बदलाव की क्षमता को विकसित करने की ओर सही तरह से बढ़ते हैं। इसलिए हर parents का अपने बच्चों को अच्छी आदतें लगाना, बच्चों में शिष्टाचार विकसित करना और बच्चों को सही मायने में भविष्य के जीवन के लिए तैयार करना कर्तव्य होता है।

बच्चे हमेशा अपने parents को देखकर, अपने family members को देखकर, आसपड़ोस से काफी कुछ सीखते है। अपने आजूबाजू की हर activity को बच्चे analysis करते है और उसको अपनाते है। और इसी उम्र में बच्चे जो सीखते है वो शायद ही किसी उम्र में सिख पाते है। इसलिए हमे कुछ बातें अपने आचरण से और कुछ बातें बच्चों को समझाने से सीखानी चाहिए। जिसे बच्चों को अच्छी आदतें भी लग सकेगी और बुरी आदतों से बच्चों को हम दुर भी रख सकते है।

good habits for kids in hindi

हम good habits for kids in hindi इस आर्टिकल में बच्चों की 10 अच्छी आदतें parents को बताना चाहते है जिसे वह अपने बच्चों पर aply कर सकते है। जिसे बच्चों को एक अनुशासित जीवन जीने की शिक्षा parents द्वारा दी जा सकती है।

बच्चों को सच बोलना सिखाए।

good habits for kids in hindi के इस आर्टिकल में आप को हम ने बताया है कि बच्चों के अच्छी आदतें विकसित करने के लिए parents को भी उन आदतों को ही अपनाने की जरूरत होती है। क्यों की बच्चे सीखाने से ज्यादा देखकर बहुत जल्दी सीख जाते है। इसलिए parents को यह जरूरी है की को भी बच्चों को सिखा रहे है वह अपने जीवन में पहले उतार लें।

अगर आपको लगता है कि आप का बच्चा हमेशा सच बोले तो बच्चों के सामने आप हमेशा सच बोलें। और बच्चों को भी सच बोलने के लिए प्रेरित करे। अगर बच्चे कुछ गलतियां कर के सच बोलते है तो उनकी हमेशा प्रशंसा करें। उन पर गुस्सा बिल्कुल ना करें। यह बात बच्चों को सच बोलने के लिए हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

बच्चों को हमेशा यह बताए कि झूठ बोलना एक बुरी आदत है जिस से काफी परेशानियां खड़ी हो सकती है या वह किसी दण्ड के पात्र भी बन सकते है।

बच्चों को अपनी चीजें share करना सिखाएं।

good habits for kids in hindi के इस आर्टिकल का यह एक महत्वपूर्ण point है जो आप को अपने बच्चे को जरूर सीखना चाहिए। बच्चे अपनी चीजों से काफ़ी agressive होते है। वह अपनी चीजे किसी को देना नहीं चाहते और उस के लिए वह लड़ते भी है। इसलिए यह जरूरी है कि घर का माहौल ऐसा हो जहां सभी एक दूसरे के साथ चीजों को share करते हो। जैसे खाना या कोई वस्तु। यह देखकर बच्चे share करना सीखते है।

हमें बच्चों को हर चीज बड़े प्यार से share करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जिसे बच्चे अपनी चीज़ share करते वक्त खुशी महसूस कर सकें। जब बच्चे किसी भी चीज को एक दूसरे से share करना सीखते है उसी से वह community से जुड़ना भी सीखते है। जिसे वह दूसरों के साथ अच्छी तरह से bonding बना सकते है। और जल्दी ही घूलमिल सकते है।

बच्चों को योगाभ्यास और व्यायाम जरूर सिखाएं।

बच्चों के मानसिक तथा शारीरिक विकास के लिए जरूरी विषयों को हम ने good habits for kids in hindi के इस आर्टिकल में शामिल किया है। जो आज की व्यस्त life में बच्चों को सीखना आवश्यक हो गया है।

अगर आप चाहते। किआप के बच्चे व्यायाम (exercise) , योगाभ्यास का नियमित अभ्यास करें तो पहले आप को इस का रूटीन बना लेना चाहिए। और अपने साथ साथ अपने बच्चों को भी सीखना चाहिए। अगर आप को बच्चे exercise या योगाभ्यास करते देखते है तो बच्चों में भी इस बात को हम intrest बढ़ता है।

Exercise या योभाभ्यास अपने बच्चों को सिखाते समय आप बच्चों को योगाभ्यास के फायदों के बारे में भी नियमित बताते रहना चाहिए जिसे योगाभ्यास तथा व्यायाम का उनके जीवन में प्रभाव बढ़ सकें।

बच्चों को लगाएं पढ़ने कि आदत।

आज के दौर में बच्चे इन्टरनेट, मोबाइल के साथ ज्यादा attached रहते है। जो सिर्फ एक information देने का काम करता है। जिस से बच्चों को सीखने अथवा उनकी बौद्धिक क्षमता को नहीं बढ़ाया जा सकता। इस लिए हम ने good habits for kids in hindi के किस आर्टिकल में reading के महत्व को बताया है। जिसे हम यदि बच्चों को अच्छी तरह से reading की habbit लगते है तो बच्चों के बौद्धिक क्षमता के साथ साथ मानसिक विकास की प्रक्रिया को भी तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

लेकिन इस के लिए आप को खुद को मोबाइल, कंप्यूटर जैसी चीजों से थोड़ा दूर रख कर बच्चों के साथ कथा कहानियों के किताबों से बच्चों को पढ़ाना चाहिए। जिसे बच्चों का reading में intrest बढ़ सकें।

आप के बच्चे reading के साथ बातों को analysis करना भी सीखते है। जिस से उनके बौद्धिक क्षमता को बढ़ावा मिलता है। और बच्चों में reading करने से सोच का निर्माण होना स्वाभाविक होता है।

माता पिता के साथ बड़ों का आदर करना सिखाएं।

बच्चों के गुणों और स्वभाव को विकसित करने के लिए यह एक जरूरी बात है जो हम ने good habits for kids in hindi के इस आर्टिकल में शामिल की है। यह बात आप पर ज्यादा depend करती है कि आप का behaviour दूसरों के साथ कैसा है। यदि आप का brhaviour दूसरों के साथ अच्छा नहीं हो पाता तो आप से आप के बच्चे भी वही चीज सीखने वाले है। इसलिए जरूरी यह है की बड़ों के प्रती आदर और छोटों के प्रति प्यार की भावना का विकास आप में होना जरूरी है। जो आप को देख कर आप के बच्चों में विकसित होने की संभावना ज्यादा होती है।

माता पिता, घर के बड़े सदस्य के प्रति आदर भाव बच्चे बड़ों के behaviour को देख कर ही सीखते है।बाहर से घर में आनेवाले व्यक्ति किस तरह से आदर के पात्र है यह आप को अपने बच्चों को बार बार बताना पड़ेगा जो बच्चों के मन में बिंबित हो जाता है।

बच्चों को समय पर खाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खाना जरूरी है। कई बच्चे अपने parents को खाना खाने के लिए काफी परेशान करते है। इसलिए हमने good habits for kids in hindi के इस आर्टिकल में इस बात को शामिल करना जरूरी समझा है।

आज कल के बच्चे ज्यादा तर fast foods खाना पसंद करते है। जो उनकी सहद के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं होता। लेकिन बच्चे काफ़ी जिद करते है और इसलिए parents भी अपने बच्चों को fast foods जैसी चीजें दे देते है। को एक गलत बात है।

खाने के महत्व को बच्चों के सामने बार बार दोहराना चाहिए। और हर खाने की चीज से बच्चों को वाकिफ करना चाहिए। मौसम में आनेवाले फल अथवा सब्जियां सभी बच्चों को खिलाना चाहिए जिसे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी पोषण तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, कैल्शियम बच्चों को मिल सकें।

समय पर सोने और उठने की शिक्षा अपने बच्चों को दें।

अपने बच्चों को समय पर उठने और सोने की अवश्य शिक्षा दें। बच्चों के स्वास्थ के लिए 8 से 10 घण्टों की नींद जरूरी होती है। बच्चे जल्दी सोने के लिए परहेज करते है। रोते है इस लिए बच्चों को प्यार से नींद का महत्व समझाना चाहिए।

दूसरे बच्चों से अच्छा बर्ताव करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

अक्सर बच्चे दूसरे बच्चों से झगड़ा और मारपीट करते है। जो जाने अनजाने उनकी आदत बनती जाती है। जिस पर शायद ही कोई parents ध्यान दे पाते हो। इसलिए उस बात को हम ने good habits for kids in hindi के इस आर्टिकल में शामिल किया है।

अक्सर बच्चे खेलने के दौरान दूसरे बच्चों को करते है, चबाते है। बच्चों के ऐसे activity को हमें समय पर रोकना चाहिए। बच्चे को दूसरों से अच्छे बर्ताव करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। और उन्हे प्यार से खेलने या रहने के लिए बार बार समझाना चाहिए।

नियमित समय पर बच्चों की पढ़ाई आवश्यक।

अगर आप का बच्चा स्कूल जाता है तो parents को जरूरी है कि एक निश्चित समय पर बच्चों को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। अपितु बच्चों के साथ मिलकर बच्चों के पढ़ाई मे भी parents का योगदान आवश्यक होता है। जिसे बच्चों में पढ़ाई में intrest बढ़ने लगता है। जो बच्चों के आदत मे शुमार होता है।

अपने बच्चों को प्रकृति (nature) से, पशु पक्षियों से प्यार करना सिखाएं।

बच्चों को बचपन से nature से, पशु पक्षियों से प्यार करना सीखना चाहिए। ताकि बच्चे भविष्य में इस nature की रक्षा कर सकें। जिसे भविष्य में आनेवाले खतरों को हम टाल सकें। हमने इस nature को बुरी तरह हानि पहुंचाई है। इस क्षति को हम अपने जीवन में पूर्ववत नहीं कर सकते। इसलिए हमे भावी पीढ़ी को यह शिक्षा देना जरूरी है। जिसे हम इस असीमित नेचर के सौंदर्य को बरकरार रख सकें। और आनेवाली पीढ़ी द्वारा इंसानी भूल को सुधार सकें।

good habits for kids in hindi क्यों है जरूरी।

हमारा यह good habits for kids in hindi आर्टिकल इसलिए भी जरूरी है कि हम अपनी life में काफी गलतियां कर के ता बुनियादी चीज़ो के ज्ञान के बगैर हम ने कई चीजों को खो दिया। सफलता और असफलता के चक्र से संभलने के लिए कई मुश्किलों का सामना किया है। यदि हम सही तरह से अपने बच्चों को सिखा सकें तो उनकी life को better बना सकते है।

READ ALSO :– अगर आप अपने बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें नहीं जानेंगे, तो lifetime जरूर पछताएंगे।


good habits for kids in hindi
good habits for kids in hindi





अगर आप अपने बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें नहीं जानेंगे, तो lifetime जरूर पछताएंगे।

अगर आप अपने बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें नहीं जानेंगे, तो lifetime जरूर पछताएंगे।


Parents के लिए है जरूरी बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें

बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें
बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें


हर Parents को  लगता है कि अपने बच्चे अनुशाषित और समझदार हो ।हमारे बच्चों को अच्छे तौर तरीकों का विकास हो। हर parents अपने बच्चों को अच्छी चीजें या बातें सिखाना चाहते है ताकि उनका बच्चा आगे चलकर एक अच्छा इंसान बने। अपने विचारों और प्रयत्नों से काबिल बने। हर parents अपने बच्चों को life में success होते हुए ही देखना चाहते है। तो इस की बुनियाद हर parents को आज से ही रखना जरूरी है। बच्चों को अनुशासन के साथ साथ उसकी काबिलियत और कल्पनाओं को विस्तार देना हर parents का कर्तव्य है।

लेकिन अपने बच्चों को अच्छा अनुशाषित कैसे करें? कैसे उस को अच्छी बातें सिखाएं और उसे बेहतर इन्सान बनाने की कैसे कोशिश करें? यह नही जान पातें। मां बाप बच्चों के खुशी के लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाते है इसलिए बच्चे थोड़े जिद्दी हो जाते है। इस कारण बच्चों में किस तरह से बदलाव लाया जा सकें और कैसे बच्चों को अनुशासन (discipline) सिखाया जाए यह सवाल हर एक मातापिता के सामने रहता है।

हम इस आर्टिकल में आपको 10 ऐसी बातें बताएंगे जो आप अपने बच्चों पर aply कर सकते हो। या बच्चों को अनुशासन सीखाने के लिए जरूरी है। जो आप को पढ़नी चाहिए।

अपने बच्चों को अनुशासन कैसे सिखाएं।

बच्चों को अनुशासन सीखना एक जटिल काम होता है। इस के लिए parents को काफ़ी कुछ बातों को समझने की जरूरत होती है। बच्चों को अनुशासन कैसे सिखाएं? बच्चे कैसे सीखते है? किन बातों का बच्चों पर गहरा असर हो सकता है? बच्चों को कब डांटना चाहिए? बच्चों को किस तरह से समझने की और समझाने की जरूरत होती है? हमें बच्चों को किन बातों के लिए और कैसे प्रेरित करना चाहिए?

लेकिन इन बातों को हमें जानना आवश्यक है जिसे हम अपने बच्चों को एक अच्छा discipline लगा सकते है। जो उनके भविष्य के लिए भी दिशा दर्शक हो सकता है।

बच्चों को अनुशासन की 10 बातें। खुद के तौर तरीकों को बदलना है जरूरी

बच्चे हम से ही सीखते है। अगर आप अपने बच्चे को अनुशासित करना चाहते हो। अपने बच्चों को discipline लगाना चाहते हो तो पहले आप को खुदे के तौर तरीको में बदलाव लाना होगा। अपनी जीवनशैली को थोड़ा बदलना होगा। जब बच्चे छोटे होते है तो वह घर के वातावरण को समझने की कोशिश करते है। घर के सदस्यों की, अपने parents की activity को analysis करते है। आप क्या कर रहे है? आप कैसे कर रहे है? किसी चीज के बारे में आपका behavior क्या है?

लेकिन बच्चे तब सही और गलत में फर्क नहीं कर पाते। अगर आप बच्चों के सामने गलतियां कर रहे है तो बच्चे उसी activity को accept करते है। चाहे वह सही हो या गलत और वैसे ही behave करने की कोशिश करते है।

अगर आप को अपने बच्चों को अनुशासन लगाने की सोच रहे हो तो पहले खुद अनुशासित हों जाए। जब आप सही तरह से अनुशासित होकर कार्य करेंगे तब बच्चे उसी एक्टिविटी को बार बार देखेंगे, समझेंगे और दोहराने कि कोशिश करेंगे। जैसे सुबह उठना, ब्रश करना, नित्यकर्म करना, योगाभ्यास करना, शारीरिक स्वास्थ के प्रति जागरूक रहना, किसी कार्य को पूरी लगन से करना, जोर जोर से बाते ना करना, बड़ों का आदर करना, nature से लगाव रखना ऐसी कई बातें हम खुद में विकसित करनी होगी। जो बच्चे देखते है, समझते है और दोहराते है। इस तरह से बच्चे हमसे ही काफ़ी कुछ बातें सीखते है।

बच्चों के सामने नकारात्मक बातों को टाले।

नकारात्मक बातें बच्चों के मन पर काफ़ी गहरा असर करती है। जिसे बच्चे कभी नहीं उभरते बल्कि उनके जीवन में नकारात्मकता का प्रभाव बढ़ता जाता है। जिस से वह अनुशासित नहीं हो पाते। जैसे हम बच्चों को किसी बात का डर दिखाते है या फिर घर में किसी कारण वश तनाव का माहौल रहता है यह चीजे बच्चों के मन में काफी गहरा प्रभाव छोड़ जाती है।

माता पिता में हमेशा अनबन बने रहने की स्थिति बच्चों को प्रभावित करती है। इसलिए हमें बच्चों को अनुशासन सीखाने के लिए इन बातों से बचना चाहिए। घर में प्यार भरा माहौल काफी जरूरी है। और आप बच्चों को हर किसी से प्यार से रहने की बड़ों और छोटों के प्रति आदर और प्रेम की शिक्षा दे सकते है।

गलत बातों को बच्चों के सामने ना दोहराए। जैसे आप शराब, सिगरेट, तम्बाकू का सेवन करते हो तो इसे बच्चों के सामने ना दोहराए। ऐसी चीजें बच्चों के सामने करने से बच्चों पर काफी बुरा असर पड़ता है।

गलतियां करने पर बच्चों को ना दांटें।

बच्चे सही और गलत का फर्क नहीं जानते। इसलिए बच्चे कई बार गलतियां करते है। जिस पर हमें काफी गुस्सा भी आता है। लेकिन बच्चों की गलतियों पर किया गया आपका गुस्सा बच्चों को वहीं बातें दोहराने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए बच्चों को गलतियों पर डांटने की भूल कभी ना करें। और यदि आप ने गुस्से में बच्चों को डांट भी दिया तो भी थोड़ी देर में आप बच्चे को प्यार से गले लगाकर उसे सही तरीके से समझाएं।

बच्चों को गलत और सही का फर्क बड़े प्यार से समझाएं। एक बार नहीं बल्कि बार बार आप अपने बच्चों को उस चीज या किसी बात का सही और गलत फर्क समझाने की आवश्यकता होती है। जिसे बच्चों के मन में उस बात के प्रती सटीक जानकारी बिंबित होती है।और वह सही और गलत को समझने लगता है।

अगर आप बच्चो को बार बार की गलतियों पर डांटना शुरू करेंगे तो बच्चों के मन में इसका बुरा असर पड़ता है। डांटने से बच्चे के मन में एक डर का माहौल तैयार हो जाता है। जिसे बच्चा किसी चीज या बात को सीखने की चाह को खो सकता है। और ऐसा भी हो सकता है कि डांटने के डर से बच्चा अपनी गलतियों को छिपा कर रखें।

लेकिन इस बात का अर्थ यह भी नहीं है कि आप अपने बच्चों की गलतियों पर पर्दा डाले। बच्चों को हमेशा गलतियां स्वीकार करने के लिए प्रेरित करे।

बच्चों की हर जिद को पूरा ना करें।

बच्चों को अनुशासन लगाने के लिए जरूरी है कि बच्चों की हर जिद पूरी ना करें। अगर बच्चे जिद पर अड़ें है रों रहे है तो उन्हें रोने दे। जो बच्चों के लिए एक सबक होने की आवश्यकता है। जिसे हम बच्चों में धैर्य और समझदारी को विकसित कर सकते है। और बच्चों के मन को भी संयमित कर सकते है।

यदि हम बच्चों की गर जिद को पूरा करते गए तो इस बात की मान लेते है की जिद करने से उन्हे सब कुछ मिल सकता है। और आगे चलकर वह हर किसी बात के लिए जिद करना सीखेंगे और इस के लिए बच्चे गलत रास्ता अपनाने के लिए भी नहीं हिचकिचाएंगे। यह बात हमें आज समझनी होगी।

अक्सर बच्चे आसपड़ोस की चीजे देखकर या साथी बच्चों का behaviour देख कर कुछ बातों या चीजों के लिए जिद कर सकते हैं। ज़िद करने पर आप बच्चों को सौम्य दंडित कर सकते है। लेकिन उन्हें प्यार से समझाने से बच्चे समझ भी सकते है।

आक्रामक रवैैये के लिए दंडित अवश्य करें

घर के अंदर या घर के बाहर यदि बच्चा आक्रामक हो जाता है। तो बच्चे को अवश्य दंडित करें। किसी को पीड़ा या दुख पहुंचाने पर उसे अवश्य शिक्षा का पात्र होना पड़ेगा इस बात को बच्चे के मन में बिंबित होने की आवश्यकता है। बच्चों को अनुशासन के लिए यह जरूरी है। यदि वह किस को किसी तरह हानि पहुंचता है तो अपने बच्चों की side लेकर ना बोले। यदि आप ऐसा करते है तो बच्चा यह समझता है कि वह किसी को हानि पहुंचने पर या किसी के साथ गलत करने पर भी बच सकता है। और यह बात आप के बच्चे को बिगाड़ने के लिए काफ़ी है।

बच्चों की कल्पनाओं को विस्तार दें।

बच्चे अगर कुछ अच्छा करने की चाह रखते हो तो हमेशा बच्चों को प्रेरित करना उनकी प्रशंसा करना उनके कार्य के लिए प्रोत्साहन पर उन्हे पारितोषिक देना बच्चों मै नई उमिद को जगाता है। जैसे बच्चा किसी अच्छे और भले कामों में दिलचस्पी दिखता हो तो हमें चाहिए कि बच्चों को हमेशा प्रेरित करे। उनके कार्य की प्रशंसा करें। उन के मन की कल्पनाओं का विस्तार करें। जो आगे चलकर बच्चों में विश्वास की भावना को जगाता है। उनकी आंतरिक शक्ति को बढ़ाता है। और उनकी सोच को और निखारने के लिए जरूरी होता है।

बच्चों के मन के सवालों का समाधान होना जरूरी।

बच्चों को अनुशासन सिखाते वक्त हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के मन में उठ रहे सवालों को हम सही तरह से बच्चों को समझाने की कोशिश करें। बच्चे की मन की हर शंका कुशंका का हल होना जरूरी है। जिसे बच्चों मै गलत धारणाओं का विचार समाप्त होने में काफी मदद मिल सकती हैं।

बच्चे हमारे आसपास घटनेवाली बातों को देखकर उस पर सही या गलत राय बना सकते है जो उनकी धारणा बन जाती है। यदि हम बच्चों को सही तरह से ना समझा सके या उनकी धारणाओं को सही दिशानिर्देशित नहीं कर सकें। तो भविष्य में बच्चे गलत धारणाओं को आधार बनाकर जीवन को बर्बाद कर सकते है। इस लिए बच्चों के मन मे उठ रहे सवालों को हल होना जरूरी है।

बच्चों के लाड़ प्यार कि होनी चाहिए सीमाएं।

बच्चों को अनुशासन के लिए जरूरी है कि घर के सदस्यों द्वारा बच्चों के लाड़ प्यार को सीमाएं होनी चाहिए। जैसे अगर बच्चा किसी कारणवश अपने मातापिता से दंडित होता है तो घर के सदस्य बच्चों की side लेकर ना बोले। और बच्चे को अहेसास होने दे की किसी गलत काम के लिए मिलने वाले दण्ड में उसका कोई साथ नहीं देगा। यह भावना बच्चों को गलत काम करने से रोकती है। जो उस के भविष्य के लिए और बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए भी जरूरी है।

बच्चों के लिए घर में समय के नियम जरूरी।

अपने बच्चों के लिए घर में नियम अवश्य बनाए। जैसे खाने संबंधी, पढ़ाई संबंधी, खेलने कूदने संबंधी, मोबाइल, टीवी जैसे गैजेट्स के इस्तेमाल के सम्बन्धी बच्चों के लिए नियमों का होना काफी अनिवार्य है। जिसे बच्चों को सही वक्त पर सही कार्य करने की शिक्षा दी जा सकती है। जब नियमों के अधीन बच्चों का रूटीन develope होता है तो आगे चलकर यह उसकी आदत बन जाती है। और वह किसी चीज का आदि नहीं होता। बच्चा समय के महत्व को समझना सीखता है। और भविष्य में यह बात उसके सफलता के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।

बच्चों को साहसी बनाएं।

बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते वक्त बच्चों को साहसी बनाएं। जब खेल कूद के दौरान बच्चे गिर जाते है। तब उन्हे खुद ही संभालने का मौका दें। आप उसे उठाने ना जाए। अपवादात्मक स्थिति में यदि चोट गंभीर हो तो आप को जरूर दौड़कर जाना चाहिए। किन्तु अगर बच्चा गिरता है तो उसे स्वयं ही उठने के लिए प्रेरित करें। उस का ढांढस बढ़ाएं। जिस से बच्चों में सहनशक्ति का विकास होता है।

कुछ बातें...

उपरोक्त 10 बातें यदि आप ध्यान से पढे और अपने बच्चों को अनुशासन का सही पाठ पढ़ाए तो यकीनन आप का बच्चा उस के जीवन में नई ऊंचाइयों और बुलंदियों को हासिल कर पाएगा।

चाणक्य नीति में स्पष्ट तौर पर बच्चों के परवरिश के लिए माता पिता द्वारा अपनाने के तौर तरीकों के बारे में लिखा है। चाणक्य नीति कहती है, " अपने बच्चों को पांच साल तक खुप प्यार करों... छह: साल से पंद्रह: साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दों.... और सोलह साल से उसके साथ मित्रता करों..... आप की संतान ही आप की सच्ची मित्र है।"

READ ALSO :– बच्चों को मोबाइल देने से पहले जान लो यह जरूरी 5 बाते, नहीं तो पछताओगे।

अगर आप को हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा तो like, share, comment जरूर करें।


बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें
बच्चों को अनुशासन की यह 10 बातें

यह 5 बातें जानने के बाद आप अपने बच्चों को मोबाइल देने की हिम्मत नहीं करेंगे।

यह 5 बातें जानने के बाद आप अपने बच्चों को मोबाइल देने की हिम्मत नहीं करेंगे।


क्या आप अपने बच्चों को मोबाइल देते है?

बच्चों को मोबाइल
बच्चों को मोबाइल


क्या आप अपने बच्चों को खेलने के लिए, मन बहलाने के लिए या कुछ सीखाने के लिए मोबाइल दे रहे है? तो यकीन मानिए आप खुद अपने बच्चों को एक कमज़ोर इंसान बना रहे है। आप अपने बच्चों को कई बीमारियों के शिकार बना रहे है। आप अपने बच्चों के मन के विश्वास, positivity, धैर्य, साहस और कुछ कर दिखाने की चाह को खुद ही ख़त्म कर रहे है। और यदि आप बच्चों को मोबाइल दे रहे है तो आप खुद अपने बच्चे को मौत के मुंह में धकेल रहे है। इस के जिम्मेदार सिर्फ आप और आप ही है।

क्या आप यह जानते है कि एक smart phone आप के बच्चे को smart नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक, वैचारिक, बौद्धिक और चिकित्सक दृष्टि से कमज़ोर से भी कमज़ोर बना रहा है। अगर आप नहीं जानते तो जान लीजिए यह 5 बातें जो आप के बच्चों को मोबाइल देने के बाद खतरनाक तरीक़े से आप के बच्चों पर असर करती है।

बच्चों को मोबाइल देने से होती है यह 5 खतरनाक बातें।

अब हम आपको ऐसी 5 बातें बताएंगे जो बच्चों के घण्टों मोबाइल पर चिपके रहने से होती है। जिसे बच्चा खतरनाक तरीके से ग्रसित होता है। जिसे भविष्य में बच्चों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इन बातों से बच्चे का भविष्य खराब हो सकता है। आगे चलकर उसका जीवन बर्बाद हो सकता है। अगर आप अपने बच्चे के उज्वल भविष्य के प्रती सजग है तो आप को जरूर इन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

आप का बच्चा मोबाइल से हो सकता है भेंगेपन का शिकार

जब आप बच्चों को मोबाइल देते हो तब एक बात जरूर नोटिस करें की आप का बच्चा बिना पलकें झपकाए तो मोबाइल नहीं देख रहा है। और यही होता है जब बच्चा मोबाइल देखता है वह आखों के करीब से मोबाइल देखता है और कम से कम पलके झपकता है। अगर आपका बच्चा ऐसे करता है तो वह जरूर और जल्द ही भेंगेपन (आंख के तिरछे पन का विकार) का शिकार होने वाला है।

भेंगापन आखों का गंभीर विकार है जिस में बच्चे की दोनों आंखें एकसाथ Parallel में काम नहीं कर पाती।बच्चा एक आंख से सही देख पता है तो दूसरी आंख से ठीक से नहीं देख पता इस कारण बच्चा देखने के लिए एक आंख पर ज्यादा निर्भर करता है जिस के कारण दूसरे आंख की रोशनी धीरे धीरे कम होती जाती है। और बच्चा तिरछा देखना शुरू कर देता है। वक्त बीतने पर वह आंख काम करना बंद कर देती है और बच्चा अंधा हो जाता है।

अगर आप बच्चों को मोबाइल देते है तो यकीनन आप अपने बच्चे के अमूल्य आखों से खेल रहे।

बच्चों को मोबाइल से brain damage या cancer का खतरा

आप parents यह सोचते है कि बच्चों को मोबाइल देने से बच्चा दुनिया का ज्ञान अर्जित कर लेगा। तो यह आप की सब से बड़ी भूल है। यदि आप सोचते हो कि compitition का जमाना है। हम इंटरनेट के युग में जी रहे है। बच्चों को भी इस बात से वाकिफ करने की ज्यादा जरूरत है तो यकीनन आप अपने बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। क्यों की आज के इस दौर में ज्ञान अर्जित करने के कई तरीके मौजूद है।

हाल ही में एक शोध में पाया गया है कि मोबाइल जब एक्टिव मोड़ में होता है तब उस से निकलने वाले radiation की frequency काफी high होती है। जो बच्चों के दिमाग पर सीधा असर करती है। बच्चों के brain में मौजूद tissue को यह radiation घातक सिद्ध होते है। यह radiations बच्चों के nervous system को प्रभावित करते है। जिस से बच्चों में पागलपन, तनाव, मानसिक अस्वस्थता और brain tumor और कैंसर जैसे brain damage के खतरे बढ़ जाते है।

यदि आप अपने बच्चों को मोबाइल दे रहे हो तो आप अपने बच्चों को पागलपन, तनावग्रस्तता, मानसिक अस्वस्थता, brain tumor जैसे बीमारियों की ओर धकेल रहे है।

मोबाइल से बच्चों में होता है physiological addiction.

क्या आप को शराब कि लत है। या फिर किसी शराबी को आपने देखा तो होगा ही। शराब ना मिलने पर उस की स्थिति क्या होती है। इस बात से आप भलीभांति वाकिफ जरूर होंगे। तो यह भी जान लीजिए बच्चों को मोबाइल से होने वाला physiological addiction किसी शराब के लत से कम नहीं।

यदि बच्चे को कुछ देर मोबाइल ना मिल पाए तो बच्चा रोता है, गुस्सा होता है, चिड़चिड़ा होता है। वह हाथपैर मारता है, सर पटकता है, ज्यादा रोता है। अपने parents पर ग़ुस्सा होता है। उन्हे मारने से भी नहीं हिचकिचाता। मोबाइल ना मिलने पर बच्चा किसी की भी नहीं सुन पाता। वह ज्यादा aggressive हो जाता है।

अगर ऐसे लक्षण आप अपने बच्चों के पाते है तो आप का बच्चा physiological addiction का शिकार हुआ है।जिसे बच्चा अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है। और वह चोरी करने ता खुद को हानि पहुंचाने का भी प्रयास कर सकता हैं।

मोबाइल से बच्चों का दिमागी विकास नहीं होता।

यदि व्यस्थता के कारण आप अपने बच्चों को मोबाइल देकर चुप करा रहे हो तो यह जान लो कि आप का बच्चा दिमागी तौर पर विकसित नहीं हो पाएगा। खेलना, कूदना, दौड़ना हमारे आस पास की activities को देखना, समझना और चीजों में रूचि दिखाना, उत्सुकता दिखाना यह बातें हमारे बच्चों को दिमागी तौर पर विकसित करने के लिए जरूरी है। अगर बच्चा सिर्फ मोबाइल लेकर बैठा है। और आसपास की बातों पर उसका बिल्कुल ही ध्यान नहीं है। बच्चा मोबाइल के सिवा कुछ नहीं activities नहीं करता तो यकीनन उसका दिमागी विकास नहीं हो पाएगा।

यदि आप अपने बच्चों को मोबाइल देते हो तो जान लो की आप का बच्चा दिमागी तौर पर हमेशा बच्चा ही रहेगा। वह बा कुछ सीख पाएगा और ना ही खुद को कुछ सीखने के लिए प्रेरित कर पाएगा।उसका जीवन अनुभवहीनता के कारण blank रह जाएगा। और वह जीवन में कुछ भी करने के लायक नहीं बन पाएगा।

बच्चों को मोबाइल देना हो सकता है उनकी अनिद्रा का कारण

आप bussy होने कारण अपने बच्चों को मोबाइल देते हो तो बच्चा घण्टों तक मोबाइल से खेलता है। जिसे उसको नींद की समस्या हो जाती है। मोबाइल में व्यस्तता के कारण बच्चे खुद को जगा कर रखते है। नींद आने पर भी नहीं सोते। इसलिए कुछ दिनों बाद यह आदत सी बन जाती है। और बच्चों में अनिद्रा की समस्या आ जाती है। जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए हानिकारक होती है।

बच्चों की लंबाई बढ़ाने के लिए जरूरी growth harmon की सक्रियता के लिए बच्चों को दिन में 10 से 12 घंटो की नींद लेना आवश्यक है। मोबाइल की लत से बच्चे पूरी नींद नहीं लेते जिस में उनकी शारीरिक growth नहीं होती।

क्या बच्चों को मोबाइल देना चाहिए?

कई लोग google पर यह सवाल पुछते है। क्या बच्चों को मोबाइल देना चाहिए? तो आप को इस का जवाब तो मिल ही गया होगा। लेकिन क्या हम सच मे बच्चों को मोबाइल से दूर रख सकते है तो यह किसी भी parents के लिए एक चुनौती हो सकती है। क्यों की मोबाइल एक ऐसा divice है जिस के तरफ़ आज का हर बच्चा, बूढ़ा, नौजवान आकर्षित होता है। बच्चों को मोबाइल से दूर रख पाना सरल और आसान तो कतई नहीं है। लेकिन बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए या उनकी यह आदत छुड़ाने के लिए हम कुछ बातों का ध्यान रख सकते है। या उनकी मोबाइल की आदत को सीमित कर सकते है।


  • बच्चों को मोबाइल देते समय समय सीमा तय कर लेनी चाहिए। बच्चों को ज्यादा देर मोबाइल use ना करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

  • बच्चों की दिलचस्पी किताबों, मजेदार कहानियों में बढ़ानी चाहिए। Parents ने ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने बच्चों के साथ बिताना चाहिए।

  • बच्चों को अच्छे और बुरे चीज़ों में फर्क समझना चाहिए।

  • बच्चों को in door और out door खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

  • आप के खाली समय आप को अपने बच्चों को कहीं घुमाने के जाना चाहिए। जिस से बच्चे नई बातों को सीख पाएं।

  • घर में बच्चों को colour, painting, gardening, ऐसे कामों में व्यस्त रखना चाहिए। जिस से बच्चे मोबाइल से भी दूर रहे और और उनकी कल्पनाओं का विस्तार भी हों।

कुछ बातें...

बच्चों के जीवन को दिशा देने का काम parents का होता है। यह आप पर पूरी तरह से depend है कि आप का बच्चा भविष्य में किस तरह से आगे बढ़ सकता है। कई parents को लगता है कि मोबाइल से बच्चे सबकुछ जान सकते है तो यह उनकी सब से बड़ी भूल है। जानना और समझना यह दोनों अलग बातें है। बच्चों को जीवन में जानकर समझने का मौका दें। उनकी कल्पनाओं का विस्तार होने दे।

हम टीवी पर या अन्य साधनों पर कई तरह की चीजे देखते है जैसे बच्चों को कोडिंग सिखाए, या इस aap के जरिए बच्चों को brilliant बनाए। ऐसे कई तरह के विज्ञापन हम देखते है और बिना सोचे बच्चों को मोबाइल थमा देते है। यह हमारी सब से बड़ी भूल है। आज के बच्चे कल के भविष्य है। आगे चलकर उन्हे हर compitition में उतरना ही है। इस के लिए हम आज उनका बचपन क्यों छीनना चाहते है।

बच्चों को उनका बचपन पूरी तरह से जीने दे। तभी तो वह शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक स्तर पर सक्षम हो पाएंगे। बच्चों को मोबाइल थमा देने से वह कल्पनाओं का विस्तार नहीं कर सकते। उन के मन कि उत्सुकता, उनकी चिकित्सक वृत्ति उनकी कल्पनाओं का विस्तार करती है। जो बच्चे दुनिया को देखकर सीख सकते है। मोबाइल से नहीं।

READ ALSO :– क्या आप अपने बच्चों को मानसिक तौर पर सक्षम बनाना चाहते है? तो यह पढ़े।

यदि आप को हमारा यह आर्टिकल अच्छा और valueable लगा तो like, share, comment जरूर करें।


बच्चों को मोबाइल
बच्चों को मोबाइल

क्या आप अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीद रहें है? बच्चों के खिलौने और उस से जुड़ी 10
important बातें जान लीजिए।

क्या आप अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीद रहें है? बच्चों के खिलौने और उस से जुड़ी 10 important बातें जान लीजिए।

क्या आप अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीद रहें है?

बच्चों के खिलौने
बच्चों के खिलौने


क्या बच्चों के लिए खिलौने महज एक खेलने का साधन होते है? तो इसका जवाब है नहीं। बच्चों के लिए खिलौने महज खेलने का साधन नहीं होते बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक विकास एवं बौद्धिक क्षमताओं के विस्तार के लिए भी खिलौने महत्वपूर्ण होते है। एक शिशु के जीवन में सब से पहला दोस्त उसका खिलौना ही तो होता है।

आज कल parents बच्चों के जन्म के पूर्व ही ढेर सारे खिलौनों का चयन करते है। या खरीद कर रखते है। लेकिन क्या हमें पता है कि हमने बच्चों के लिए उचित खिलौनों का चयन किया है? क्या हम यह जानते है के बच्चों के लिए कौन से खिलौने उनके शारीरिक और मानसिक विकास में मददगार साबित होते है? क्या हम यह जानते है की किस उम्र में बच्चों को कौन से खिलौनों का आकर्षण हो सकता है? क्या हम बच्चों के लिए खिलौने का चयन करते वक्त सही या गलत में फर्क करते है?

यदि आप बच्चों के लिए खिलौने खरीद रहे है तो आप को हमारी 10 important बातों को जरूर जानना चाहिए। जो बाते जानकर आप अपने बच्चों के लिए उचित खिलौनों का चयन कर पाए।

बच्चों के लिए खिलौने खरीदते वक्त ध्यान रखें।

वैसे तो हम बच्चो के लिए खिलौने खरीदते वक्त कुछ खास ध्यान नहीं रखते। जो भी खिलौने हमें अच्छे लगते है वहीं हम अपने बच्चों के लिए खरीदते है। लेकिन बच्चों के लिए क्या सही क्या गलत इस बात को ध्यान हम नहीं रखते। किस तरह के खिलौनों से बच्चों में शारीरिक और दिमागी progress होगी इस बात को भी खयाल शायद ही आता होगा।

इस आर्टिकल में हम बच्चों के लिए कौन से उम्र में किस तरह के खिलौने बच्चों को सही विकास की ओर लें जाते है यह बताएंगे। बच्चों के शारीरिक और दिमागी विकास को ध्यान में रखकर हमने कुछ तथ्यों को सामने रखने का प्रयास किया है। जिस से आपको बच्चों के लिए खिलौने खरीदते वक्त खिलौनों का चयन करने मै आसानी होगी और बच्चे भी खिलौनों का भरपूर आनंद उठाएंगे।

0 से 6 महीने के बच्चों के लिए खिलौने

बच्चे खेल खेल में नई नई strategyके साथ खुद की पर्सनालिटी को development करना सीखते है। और हमें बच्चों के इसी skill को बढ़ावा देने के लिए खिलौनों को जरिया बनाना होगा। बच्चे किस खिलौने से खेलते है यह उसके दिमागी विकास के लिए जरूरी नहीं है। जरूरी है कि बच्चे किस तरह से खिलौनों के साथ खेल पाते है। जन्म से 2 साल के भीतर बच्चों का 80% brain developing हो जाता है। जन्म से 6 month बच्चों के पांचों ज्ञानेन्द्रिय (five senses) जैसे त्वचा, कान, नाक, आंखें और जीभ developing stage में होते है। इसलिए हमें इस stage में बच्चों के लिए ऐसे खिलौने चुनने चाहिए जिसे उस के पांचों ज्ञानेंद्रियों में improvment हो सकें।

Playmats and baby gyms

0 से 6 महीने के बच्चे ज्यादा तर लेटे रहते है। इस तरह के बच्चों के लिए खिलौने खरीदते वक्त हमें उसी type के खिलौनों का चयन करना होता है। इसलिए Playmats and baby gyms एक बढ़िया और atractive खिलौना साबित होता है। जिस मे अलग अलग कलर्स और shape के खिलौने लटके होते है। बच्चे के ऊपर लटके होने के कारण बच्चे इसे अच्छी तरह देख पाते है।

0 से 6 महीने के बच्चों को colours की अच्छी पहचान कराने के लिए भी यह toy काफी helpful साबित होता है। जिस मे कई तरह के atravtive colours और अलग अलग तरह के shape में toys लटके हुए होते है। जिसे बच्चे आराम से लेटे लेटे खेल सकते है। बच्चे उन toys की तरफ़ हाथों और पैरों को बढ़ात है। जिस मे बच्चों की अच्छी activity हो जाती है।

Baby rattles

0 से 6 month के बच्चों के लिए खिलौने लाते वक्त baby rattles को ना भूलें। झुनझुनी जिसे baby rattles भी कहते है। यह खिलौना बच्चों की देखने और सुनने की क्षमता को काफ़ी improve करता है। आजकल बच्चों के लिए socks rattles भी आते है जिस में बच्चों के हाथ या पैर हिलाने से झुनझुन वाली आवाज होती है। जिस मे बच्चों को काफ़ी मज़ा भी आता है और उस की activity भी होती है। और socks rattles के साथ साथ rattles balls भी मार्केट में available है।

1 साल के बच्चों के लिए खिलौने

जैसे जैसे बच्चे बढ़े होते जाते है उनकी activity बढ़ जाती है। खुद को आगे धकेलने की कोशिश करते है उठने की चलने की कोशिश करते है। उनकी सुनने देखने की क्षमता भी बढ़ती है। इस उम्र में बच्चों को activity करने वाले या बोलने वाले और musical toys काफी अच्छे लगते है। एक जगह से दूसरी जगह जाने वाली चीजे बच्चों को चलने में बढ़ावा देते हैं। दूर से आवाज की पहचानने की क्षमताओं में भी विकास होता है।

Shake and dance fun toys

1 साल के उम्र के आसपास के बच्चों के लिए खिलौने choose करते वक्त हमें ध्यान रखना पड़ता है। इस वक्त बच्चे की activity बढ़ जाती है। उनकी activity को हमें बढ़ावा देना जरूरी है हम उनके लिए shake and dance fun toys को choose कर सकते है। हिलने डुलने और चलने वाले toys बच्चों को activities को समझने में मदद करते है। और उन्हे भी चलने उठने के लिए प्रोत्साहित करते है। यदि toy में हिलने के साथ कोई musical instrument add हो तो बच्चे उसके रिदम को अच्छे से समझते है।

Teethers and soothers

6 महीने के आस पास ही बच्चों में दांत आना शुरू हो जाते है। जिस से बच्चों के मसूड़ों में समय समय पर दर्द होता है। ऐसे में बच्चे चीज़ो को मुंह में डालकर चबाने की कोशिश करते है। जिस से कई harmful बैक्टीरिया बच्चों के शरीर में जाते है जिसे बच्चों को दस्त और कई समस्याएं आ सकती है। इस के लिए Teethers and soothers जैसे toy हमारे लिए और बच्चों के लिए काफी helpful साबित होते है।

1 से 2 साल के बच्चों के लिए खिलौने

खिलौने बच्चों के skill को बढ़ाते है। बच्चों में skill को develope करते है। इसलिए बच्चों के लिए खिलौने जरूरी है। 1 साल के ऊपर के बच्चों में logical thinking develope होना शुरू हो जाता है। जैसे धकेलना, पकड़ना, फेंकना जैसी कई एक्टिविटी बच्चे सीखने की कोशिश करते है। ऐसे में हमें बच्चों के logical thinking को बढ़ावा देने की जरूरत होती है। इसलिए हमे ऐसे बच्चों के लिए खिलौने choose करने होंगे जिस से वो चीज़ो को समझ सकें।

building blocks toys

Building blocks toys से बच्चों को चीजों को लगाने के तरीके समझ में आते है। बच्चे जब blocks को एक दूसरे मे फिट करने की कोशिश करते है तब उनमें eye hand cordination improve होने में काफी मदद मिलती है।

Colourfull balls

बच्चे colourfull balls के साथ जब खेलते है तब उन्हे colours को पहचानने में काफी मदद मिलती है।इस के साथ balls को एक जगह से दूसरी जगह पर फेकना, पकड़ना या धकेलने जैसी activity को बच्चे अच्छे से समझ पाते है।

shape वाले toys

Shape वाले toys के साथ बच्चे अच्छे से घुलमिल जाते है। Square, triangle, rectangle, circle जैसी shape बच्चे पहचानने लगते है। इस के साथ बच्चों की brain developing में काफ़ी मदद होती हैं।

बच्चों के लिए खिलौने खरीदते वक्त रखे इन बातों का ध्यान।

जब हम अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीदते है तो हम काफी कुछ बातों को avoid करते है जिस से हमारे बच्चों को और साथ है हमें कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए हमें जरूरी बातों का ध्यान रखना ही चाहिए।

खिलौनों पर लिखी worning को पढ़ना जरूरी।

अगर आप किसी खिलौने को खरीद रहे हो तो खिलौने के लेबल पर दी जानेवाली instruction और warning को जरूर पढ़े। अगर आपका बच्चा 3 साल या उस से कम आयु का है तो label पर दिखने वाली worning को आप को पढ़ना ही चाहिए। बिना worning पढ़े कोई भी खिलौना खरीदना आप बच्चे के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

खिलौनों की sefty check करना जरूरी।

बच्चों के लिए खिलौने खरीदते वक्त खिलौनों की sefty check करना जरूरी है। अक्सर बच्चे खिलौनों पर गिर जाते है। या खिलौनों को मुंह में डाल देते है। यदि खिलौने sharp और pointed होंगे तो इस से बच्चों को चोट लगने का खतरा बना रहेगा। इसलिए खिलौने खरीदते समय sefty check करना जरूरी है कि खिलौने sharped और pointed तो नहीं है।

ज्यादा लंबी रस्सी वाले खिलौने ना खरीदें।

अगर खिलौने ज्यादा लंबी रस्सी वाले हो तो इस से बच्चों को काफी परेशानी हो सकती है। रस्सी पैर में अटक कर बच्चे गिर सकते है जिस से बच्चों को चोट लग सकती है। या किसी case में रस्सी बच्चों के गले का फंदा भी बन सकती है।

थोड़े बड़े और मजबूत खिलौने ही खरीदे।

बच्चे अक्सर खिलौने मुंह में डालते है। यदि बच्चों के खिलौने छोटे हो या किसी खिलौने के part easily अलग होते हो तो बच्चे में मुंह में अटक सकते है। जिसे काफी dangerous situation create हो सकती है। बच्चे कई बार खिलौने जोर से पटक देते है जिस से खिलौने टूटकर बिखर जाते है जिस से बच्चों को चोट लगने का खतरा बना रहता है।इसलिए ध्यान रखें खिलौने मजबूत हो।

Loud sound वाले खिलौने ना लें।

ज्यादा sound वाले खिलौनों से बच्चों के कानों में तकलीफ़ हो सकती है। बच्छेके body organs अभी भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुए है। ज्यादा sound वाले खिलौने बच्चों के कानों को नुकसान पहुंचा सकते है। ज्यादा sound से बच्चे irrited हो सकते है। जिस से बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ता है।

Non-Toxic toys ही खरीदें।

जब बाजारमें आप बच्चों के लिए खिलौने खरीदने जाते हो तो खिलौने खरीदते समय यह ध्यान रखें कि खिलौने Non-Toxic हो। खिलौनों में किसी भी प्रकार का chemical बा मिलाया गया हो। Chemical से युक्त खिलौने आप के बच्चे के skin या आप के बच्चों के लिए घातक सिद्ध हो सकते है।

डरावने खिलौने बच्चों के लिए ना खरीदें।

किसी भी प्रकार के डरावने खिलौने अपने बच्चों के लिए ना खरीदें। डरावने खिलौनों से आप का बच्चा डरा और सहमा रह सकता है। जिस से उस का आत्मविश्वास कम हो जाएगा। जिसे भविष्य में एक डरपोक व्यक्ति बनाने की संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता।

छोटे बच्चों को battery वाले खिलौने ना दें।

छोटे बच्चों को baterry वाले toys ना दे। Battery जो होती है वह lithium की होती है। और छोटे बच्चे अक्सर खिलौनों को तोड़कर चीजों को मुंह में डाल देते है। Lithium के battery के आप के बच्चे के लिए घातक परिणाम हो सकते है।

अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीदते वक्त आप यदि इन बातों का ध्यान रखे तो आप अपने बच्चे के लिए best खिलौने खरीद सकते हो। जिसे आप का बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास अच्छे से हो पाए और आप के बच्चों को खेलते वक्त ज्यादा खुशी मिलें।

READ ALSO :– क्या आप अपने बच्चे को मानसिक तौर पर सक्षम बनाना चाहते है? जानिए बच्चों का मानसिक विकास के Important टिप्स


बच्चों के खिलौने
बच्चों के खिलौने

क्या आप अपने बच्चे को मानसिक तौर पर सक्षम बनाना चाहते है? जानिए बच्चों का मानसिक
विकास के Important टिप्स

क्या आप अपने बच्चे को मानसिक तौर पर सक्षम बनाना चाहते है? जानिए बच्चों का मानसिक विकास के Important टिप्स

क्या आप अपने बच्चे को मानसिक तौर पर सक्षम बनाना चाहते है?

बच्चों का मानसिक विकास
बच्चों का मानसिक विकास


आज के इस compitition के जमाने में हर parents की ख्वाइश होती है कि दुनिया की इस रेस में कहीं उनका बच्चा पिछे ना रहें। इस लिए हर माता पिता को यह जरूरी है कि बचपन से ही वह अपने बच्चों का मानसिक विकास , स्वास्थ और शारीरिक विकास को गंभीरता से लें और शिशु के सर्वांगीण विकास में कोई कसर बाकी ना छोड़े।

इस आर्टिकल में हम जानेंगे बच्चों के मानसिक विकास और बौद्धिकता को कैसे बढ़ा सकते है? इस के लिए शिशु के जन्म से लेकर उसके बाल्यावस्था तक हमें किन बातों का खयाल रखना चाहिए? बच्चों का मानसिक विकास कैसे होता है? इस के लिए हमें क्या उपाय करने चाहिए? बच्चों के भोजन में हमें किस उम्र में किस तरह से बदलाव करने है? क्या किसी तरह के गैजेट्स, मोबाइल जैसी चीजें बच्चों के मानसिक विकास में फायदा पोहचा सकती है या इस से कोई नुक़सान होता है? इन सभी सभी बातों पर गौर करेंगे।

बाल्यावस्था में हम बच्चों का बौद्धिक स्तर कैसे बढ़ा सकते हैं? कैसे बच्चों में नई बातों की जिज्ञासा को बढ़ा सकते है? क्या हम हमारे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पर्याप्त समय दे पाएंगे? ऐसे कई सारे सवाल parents के मन में आते हैं। और parents कई बार ऐसी दुविधा में होते है। जो समझ नहीं पाते कि अपने बच्चों का विकास वह किस तरह से कर सकते है?

उन सभी parents के लिए हमारा यह आर्टिकल काफ़ी महत्वपूर्ण है। जो बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए काफ़ी confuse हो जाते है। और बच्चों के भविष्य के प्रती चिंता करते हैं।

गर्भावस्था से ही शुरू होता है बच्चों का मानसिक विकास

मां की गर्भावस्था से ही शिशु मानसिक तौर पर अपनी समझ को उजागर करता है। जैसे आप ने कई बार सुना होगा अक्सर घर के बड़े या बुज़ुर्ग सलाह देते है कि गर्भावस्था के दौरान अच्छे विचार और अच्छी बातों को बोलना और सुनना चाहिए। वीर पुरुषों की कथाओं को वाचन,चिंतन, मनन करना चाहिए। आज मार्केट में कई ऐसे वीडियो आडियो मौजूद है जो गर्भ संस्कार की शिक्षा देते है। मानना यह है कि उस के सुनने अथवा ग्रहण करने से बच्चों पर अच्छे संस्कार होते है। शिशु का मानसिक और बौद्धिक स्तर पर विकास होने में मदद मिलती है।

और यही बात science भी prove करता है कि गर्भावस्था के 7 वें से 8 वें सप्ताह से में भ्रूण में ग्रहण करने की क्षमता का विकास होना शुरू होता है। उसी उपरांत गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु में nervous system का भी विकास शुरू हो जाता है जिस में तेजी से neurones जुड़ने लगते है। और उस है बाद जैसे जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है उसी के साथ शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास शुरू होता है। इसलिए आप की बातों को गर्भ में शिशु सुनता भी है और उस पर गर्भ में शिशु किक कर react भी करता है। यही से बच्चों का मानसिक विकास शुरू होता है।

गर्भावस्था में रखें कुछ बातों का खयाल।

हर मां को लगता है उस का शिशु दिमागी तौर पर तेज हो और शारीरिक सुद्रूढ़ता से पूर्ण हो। इस के लिए एक मां को भी गर्भावस्था के दौरान कुछ बातों खयाल रखना जरूरी है। जैसे गर्भावस्था के दौरान खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। खुद में positivity को develope करना होता है। विचारों में क्रियाशिलता लाने की जरूरत होती है।

गर्भावस्था के दौरान खानपान

गर्भावस्था के 3 महीने से ही गर्भवती महिला को Omega 3 faccy acid और foric acid के साथ irons, minerals, विटामिन के supliment का सेवन शुरू कर देना चाहिए। इस के साथ साथ आप अपने आहार में रोजाना 2 मौसमी फलों और dry foods का सेवन करना चाहिए। साथ ही गर्भावस्था के दौरान green vegetables, फलों का ज्यूस, मछली, अंडा, दुग्ध जन्य पदार्थो का भी आपको सेवन करना चाहिए। इस से आप के शिशु का शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास होने में भी काफ़ी मदद मिलती है।

गर्भावस्था के दौरान खुद को रखें positive

गर्भावस्था में अच्छे विचारों के साथ खुश रहना। एक positive सोच से मन का उत्साह बढ़ाना काफी जरूरी होता है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाता है। अपनी सोच का दायरा बढ़ाकर अच्छे विचारों को ग्रहण करने से होनेवाले शिशु में सकारात्मकता के भावों को अंकुरित होते है। इस दौरान आप अच्छी किताबें पढ़े, अच्छा संगीत सुनें, कुछ प्रेरक और सकारात्मक विचारों को ग्रहण करें। उसका चिंतन, मनन करें। जो आप के होनेवाले शिशु को काफी फायदा पहुंचा सकता है।

जन्म के बाद बच्चों का मानसिक विकास

शिशु के जन्म के बाद कई सारे parents अपने शिशु के भविष्य के बारे में सोचने लगते है। और यह एक तरह से ठीक भी है। लेकिन parents को अपने बच्चों का मानसिक विकास, उसकी बौद्धिक क्षमता को विकसित करने हेतु प्रयास, उसका शारीरिक स्वास्थ एवं उसको हर चुनौती के लिए काबिल बनाने की आवश्यकताओं पर ध्यान देने की जरूरत होती है। जिसे आगे चलकर उनके बच्चों में खुद के भविष्य को संवारने की काबिलियत प्राप्त हो।

जब एक शिशु दुनिया में क़दम रखता है तब वह दुनिया की सारी चीजों से अनभिज्ञ रहता है और उस की सोच का दायरा भी सीमित रहता है। जैसे जैसे शिशु बढ़ता है वैसे उसका सोच का दायरा बढ़ाना शुरू होता है। बच्चे की आकलन शक्ति, उसकी जिज्ञासा, उसकी बौद्धिक क्षमताओं का विस्तार शुरू हो जाता है। इस वक्त हमें जरूरी बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। जैसे उसकी आकलन क्षमता को बढ़ाना, उसकी जिज्ञासा का सुचारू रूप से समाधान करना, बच्चे के खानपान पर विशेष ध्यान रखना, उसकी परखने की दृष्टि को विकसित करना आदि।

0 से 1 वर्ष में बच्चों का मानसिक विकास।

एक नवजात शिशु को गंध, दृष्टि और शब्द का ज्ञान नहीं होता। इसलिए हम 0 से 1वर्ष में बच्चों के मानसिक विकास के लिए हम क्या कर सकते है? यकीनन यह सवाल आप के मन में आता होगा। और यह एक अच्छा सवाल है। लेकिन आप को यह भी पता है कि शिशु कमंसिक विकास उस के गर्भ में रहते ही शुरू हो जाता है तो 0 से 1वर्ष में भी उसका मानसिक विकास तेजी से होता है जी के लिए हमें कुछ बातों को जानना जरूरी है।

शिशु की मालिश

जिस तरह मालिश शिशु के शारीरिक सद्रूढ़ता के लिए, शारीरिक विकास के लिए जरूरी है। उसी तरह मालिश से बच्चों का विकास, उसकी बौद्धिक क्षमताओं का विस्तार भी होता है। लेकिन मालिश करते वक्त यदि हम कुछ बातों का ध्यान रखें तो शिशु के मानसिक विकास में काफी वृद्धि हो सकती है।

शिशु की मालिश मां को ही करनी चाहिए। यदि किसी कारण मां अपने शिशु की मालिश नहीं कर सकती तो घर के किसी सदस्य जैसे दादी या नानी इन्होंने शिशु की मालिश करनी चाहिए। इस का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि जब हम अपने शिशु की खुद मालिश करते है तो उस वक्त हमारी सोच शिशु के प्रती positive होती है। और हमारी positive energy शिशु में transfer होती है जो शिशु पर जबरदस्त तरीके से effect करती है।

एक शिशु के लिए मां का दूध और मां का स्पर्श सर्वेपरी होता है। उस स्पर्श में बच्चे को सुरक्षितता, वात्सल्य, प्रेम और अपनेपन का एहसास होता है। कोई भी मां अपने बच्चे के प्रती समर्पित होती है। एक मां positive तरीक़े से शिशु के अच्छे स्वास्थ, बौद्धिकता एवं मानसिक विकास की कामना करती है। इसलिए मां ही अपने शिशु की मालिश करें तो बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास काफी अच्छे से हो सकता है।

शिशु का आहार

बच्चों का मानसिक विकास के लिए जरूरी है कि शिशु को भरपूर पोषक तत्वों युक्त आहार मिलें जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है। 0 से 6 महीने तक शिशु अपने मां के दूध पर ही निर्भर रहता है। इस लिए जरूरी है की मां अपने आहार में जरूरी पोषक तत्वों को add करें। अच्छा पोषणयुक्त भोजन करें जिस से उस के शिशु को पर्याप्त मात्रा में सभी जरूरी पोषक तत्त्व मिल सकें।

6 महीने के उपरांत जब बच्चा solid खाना शुरू करता है। तब हम बच्चों को पोषक अगर से सकते है। शुरवात के दिनों में हम सेरेलेक देते सकते है जिस में प्रोटीन, विटामिन, minerals के साथ सारे पोषक तत्त्व मौजूद होते है। उस के बाद हम बच्चे के आहार में vegetables, fruit, dry foods के साथ eggs, fish भी adds कर सकते है। जिसे बच्चों का मानसिक विकास बड़ी तेजी से होने मै काफी मदद मिलती है।

शिशु के साथ करें बातें।

गर्भ में ही शिशु के ग्रहण शक्ति का विकास होना शुरू हो जाता है। ध्वनि कंपनों से उसकी आकलन शक्ति में काफी इजाफा होता है। शिशु हमारे द्वारा बोले गए शब्दों को बड़े गौर से सुनता है। और हमारे lips की हरकतों को देखता है। और कभी हंस के react भी होता है। इस लिए हमें चाहिए कि बच्चों के साथ ढेर सारी बातें करें। बच्चे rythemic words को अच्छे से सुनते है। इसलिए बच्चों को लोरी सुनाए। इससे बच्चों का मानसिक विकास बड़ी तेजी से होता है।

1 से 3 वर्ष में बच्चों का मानसिक विकास।

1 वर्ष की आयु में बच्चा अच्छे से solid foods लेना शुरू कर देता है। और उस की आकलन शक्ति भी काफी विकसित हो जाती है। जिस मे वह अपने मातापिता को और पारिवारिक सदस्यों को पहचान सकता है। शब्दों को गौर से सुनने एवं शब्दों को पहचान ने कि क्षमता बच्चों मै विकसित हो जाती है। और इस आयु में उस की जिज्ञासा काफी बढ़ जाती है। इस आयु में बच्चों का मानसिक विकास next level पर आता है। इस उम्र में भी हमें बच्चों के आहार पर तो ध्यान रखना ही है लेकिन उस से अलग हमें कुछ और बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता होती हैं।

बोलने की शक्ति

इस आयु में बच्चे शब्दों को सुनकर उनका उच्चारण करने की कोशिश करते है। हमें उनके इस बोलने की शक्ति को बढ़ावा दिन की जरूरत होती है जिस से वह शब्दों को अच्छी तरह से समझ पाए। जैसे बच्चा यदि किसी शब्द को हमारे मुंह से सुनता है और lips की हरकते देखता है तो हमें बच्चों के सामने शब्द को बार बार दोहराना चाहिए और धीरे धीरे बोलना चाहिए जिस से बच्चा हमारे lips की हरकतों को समझ कर शब्द का उच्चारण स्वयं कर सकें। जिस से बच्चों का मानसिक विकास भी तेजी से होता है और बच्चे की बोलने की क्षमता भी बढ़ती है।

बच्चे की जिज्ञासा की पूर्ति करना।

1 से 3 वर्ष की आयु में बच्चों में काफी जिज्ञासा उत्पन्न होती है। वह कई तरह की चीज़ो को समझना चाहते है। यदि वह चीजों को अच्छी तरह ना समझ पाए तो बच्चे चिड़चिड़ा पन, ज्यादा रोना या अपने भावुकता को प्रदर्शित करने की कोशिश करते है। यदि इस उम्र में हम बच्चों की मानसिकता को समझकर उनकी जिज्ञासा को विस्तार नहीं देंगे या उनको सही तरीके से चीजों के बारे में नहीं समझाएंगे तो बच्चे उनकी आकलन शक्ति को खो बैठेंगे। इसलिए हमें बच्चे किसी चीज की तरफ इशारा कर रहे है तो वह चीज क्या है उस बोल कर समझना चाहिए।

बच्चों को डर ना दिखाएं।

अगर बच्चे किसी चीज से या किसी बात से डर रहे है तो हमें उन बातों से बच्चे के डर को खत्म करना चाहिए। और हमें यह खयाल रखना चाहिए कि हम किसी बात का बच्चे को डर ना दिखाएं। यह हमारी सब से बड़ी भूल हो सकती है। कभी भी किसी बात का डर बच्चों को ना दिखाए। बच्चों को किसी चीज या बातों से डराने से बच्चों में negativity क्रियान्वित हो सकती है। और नकारात्मक भाव बच्चों का मानसिक विकास में बढ़ाए उत्पन्न कर सकता है।

3 से 5 वर्ष में बच्चों का मानसिक विकास।

3 वर्ष तक बच्चा अच्छे से बोल सकता है। चीज़ोको समझ सकता है। इस उम्र में बच्चे की activity काफी बढ़ जाती है। बच्चे की भूख बढ़ जाती है। इसलिए हम बच्चों के आहार में प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, आयरन, मिनरल्स को शामिल करना ही है। बच्चे को पूर्ण nutrient मिल सके इसका ध्यान हमें रखना है।

इस आयु में बच्चे जिज्ञासा वश जय उल्टी सीधी हरकतें करते है। जिस पर हम बच्चों को डांटते या कभी मारते भी है। लेकिन डांटना या मारना यह समस्या का समाधान तो नहीं हो सकता। क्यों की सही और ग़लत इन बातों से बच्चा अनभिज्ञ होता है। इसलिए हमें कुछ बातों का खयाल रखना चाहिए।

बच्चों को प्यार से समझाए।

3 से 5 वर्ष की आयु में बच्चे काफी एक्टिव होते है। उस आयु में चीज़ोको जानने कि जिज्ञासा भी काफी बढ़ जाती है। और चीज़ो को समझने की जीन्यासा ही इस उम्र में बच्चों की खुशी होती है। जब बच्चा हमारी activity देखता है तो यह समझ नहीं पता कि यह क्या है? क्यों है? इस से क्या होता है? और उस समझने की चाह में बच्चे उल्टी सीधी हरकते करते है जिस से parents परेशान भी होते है। और बच्चों को डांटते और मारते भी है।

लेकिन इस से बच्चों पर गलत असर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए हमें बच्चों को प्यार से समझाने कि जरूरत होती है। जिस से बच्चों का ज्ञान भी बढ़ता है। चीज़ों को सही ढंग से समझने के बाद बच्चों का उस चीज के प्रती रवैया बदलता है। किसी चीज को समझने की उत्कंठा को बच्चे सही तरह से व्यक्त करने के आदि हो जाते है। जिस मे उन्हे यह पता होता है कि उनको parents सही तरह से समझा सकते है। जिस कारण अपने parents की प्रती बच्चों के लगाव में बढ़ोतरी होती है।

बच्चों को रिश्तों कि अहमियत समझाएं।

बच्चों को रिश्तों की अहमियत समझाने की जरूरत इसी उम्र में होती है क्यों कि इस उम्र में बच्चे रिश्तों के प्रति अपने बदलावों के दौर में होते है। बच्चों को बड़ों के प्रति सम्मान के लिए प्रेरित करें। जिसे बच्चों के स्वभाव में एक लचीलापन आ सकता है। जो भविष्य में सामाजिक तौर पर उस के रवैये को परिभाषित करती है।

बच्चों को खुद को सक्षम होने दें।

बच्चों का मानसिक विकास का यह एक जरूरी पैलु है। क्यों की उस उम्र से ही अगर आप बच्चों को सक्षम होने की शिक्षा देते है तो भविष्य में किसी भी तरह के संकटों में खुद को बेहतर साबित कर सकता है। बच्चे यदि खेलते वक्त गिर जाते है तो उन्हें तुरंत उठाने न जाएं। उन्हे खुद को उठने दे। (अगर चोट लगी हो या कोई गंभीर बात हो तो आप तुरंत जाए।) खुद के छोटे छोटे काम बच्चो को खुद कर ने के लिए प्रेरित करें।

बच्चों को मोबाइल या किसी तरह के गैजेट से दूर रखें।

आज कल के parents समझते है कि मोबाइल या किसी तरह के गैजेट बच्चों को दिमागी तौर पर सक्षम बनाने के लिए मदद कर सकते है। Smart phone से उनके बच्चे भी smart हो जाएंगे तो यह पूरी तरह से गलत धारणा है। स्मार्टफोन, या किसी तरह के गैजेट से बच्चों का मानसिक विकास कुंठित हो सकता है। या उस के आदि होकर बच्चे depression का शिकार होने की ज्यादा संभावनाएं होती है। और mobile के radiation से बच्चों के दिमाग पर काफी गहरा असर हो सकता है। बच्चों में किसी तरह की मानसिक विकृति भी नजर आ सकती है।

बच्चों की करें किताबों से दोस्ती।

बाल्यावस्था सए किशोरावस्था बच्चों का मानसिक विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इसलिए हमें बाल्यावस्था से ही अपने बच्चों का intrest किताबों मे बढ़ाना चाहिए। कथाएं , कहानियां बच्चों की कल्पनाओं को आकार देती है जो बच्चों की आकलन शक्ति को मजबूत करती है।

बच्चों का मानसिक विकास यदि सही तौर तरीकों से किया जाए तो यकीनन आप अपने बच्चे को भविष्य में एक अच्छा और सफल इंसान के रूप में देख सकते हो।

बच्चों का मानसिकविकास
बच्चों का मानसिक विकास